Wednesday , September 26 2018
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तो क्या सरकार की ये नीति काट रही है आपकी जेब

अगर आपको लगता है कि पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना है तो ऐसा नहीं है। इसकी प्रमुख वजह है केंद्र सरकार का पेट्रोल व डीजल पर टैक्स के जरिए कमाई की नीति, जिससे लागत के मुकाबले कहीं ज्यादा कीमत आज हमें और आपको चुकानी पड़ रही है।

कच्चे तेल की कीमत 2013 में भी यही थी, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल व डीजल पर टैक्स काफी कम था, जिससे यह तब सस्ता था। लेकिन आज केंद्र सरकार द्वारा इन पर जो टैक्स वसूला जा रहा है, उससे ही कीमतें अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इसलिए अगली बार जब आप पेट्रोल या फिर डीजल को अपनी गाड़ी में भरवाएं तो उस वक्त रुपये को न कोसें, क्योंकि ऊंची कीमतों का सारा खेल सरकार ने रचा है।

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इसलिए बढ़ा दिया टैक्स
केंद्र सरकार अपने चालू घाटे को कम करना चाहती है। पेट्रोल, डीजल पर जो एक्साइज ड्यूटी व वैट लगा है, उससे ही केंद्र व राज्य सरकारों को ही रोजाना सर्वाधिक कमाई होती है। इस कमाई के बल पर ही सरकार अपने चालू खाते के घाटे को कम करने की कोशिश में लगी है।

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सरकार की कमाई में हुआ दो साल में इजाफा

टैक्स में बढ़ोतरी के कारण सरकार की कमाई में पिछले दो सालों में काफी इजाफा देखने को मिला है। 2014-15 में केंद्र सरकार ने ट्रैक्स के बलबूते 1.3 लाख करोड़ रुपये की कमाई की थी, जो 2016-17 में बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये हो गई है। मतलब सीधा 117 फीसदी का इजाफा हुआ था।

हालांकि 2017-18 के आंकड़े अभी मौजूद नहीं है। वहीं राज्य सरकारों ने भी 2014-15 में 1.6 लाख करोड़ रुपये कमाये थे, जो कि 2016-17 में बढ़कर 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। राज्य सरकारों की कमाई में 18 फीसदी का इजाफा देखने को मिला था।

जीएसटी में आने से भी लाभ नहीं

पेट्रोल व डीजल को अगर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाता है, तो उस पर लगने वाले कर की संरचना में 28 फीसदी जीएसटी तथा राज्यों द्वारा लगाया गया कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) शामिल हो सकता है।
जीएसटी की सबसे उच्च दर (28 फीसदी) तथा वैट दोनों को मिलाकर उतना ही कर भार होगा, जितना यह दोनों ईंधनों पर मौजूदा समय में लग रहा है, जिसमें उत्पाद शुल्क तथा राज्यों द्वारा लगाया गया वैट शामिल है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए साफ तौर पर मना कर दिया है।

वर्तमान में वसूलती है इतना कर
वर्तमान में केंद्र सरकार पेट्रोल पर प्रति लीटर 19.48 रुपये तथा डीजल पर 15.33 रुपये का उत्पाद कर वसूलती है। वहीं विभिन्न राज्यों द्वारा लगाए गए वैट की दरें अलग-अलग हैं। दोनों ईंधनों पर बिक्री कर सबसे कम अंडमान एवं निकोबार द्वीप में लगता है, जहां यह सिर्फ छह फीसदी है।

मुंबई में पेट्रोल पर सर्वाधिक 39.12 फीसदी वैट वसूला जाता है, जबकि तेलंगाना में डीजल पर सर्वाधिक 26 फीसदी वैट वसूला जाता है। दिल्ली में पेट्रोल पर 27 फीसदी वैट लगता है, जबकि डीजल पर 17.24 फीसदी वैट है। पेट्रोल पर कुल कर भार 45-50 फीसदी तक चला जाता है, जबकि डीजल पर 35-40 फीसदी।

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