Wednesday , September 19 2018
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बड़ी खुशखबरी: परिवार की सुरक्षा के साथ अब इनकम टैक्स में राहत, यहाँ जाने कैसे

जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी, यानि आपकी जिंदगी के बाद भी उन लोगों के लिए खर्चे की पूरी तैयारी जो आपके ऊपर आश्रित हैं। बाजार में ऐसे कई टर्म इश्योरेंस मौजूद हैं जो आपके बाद भी आपके आश्रितों की जरूरतों को पूरा करते हैं। वैसे टर्म इंश्योरेंस उन सभी लोगों के लिए जरूरी है जिनपर परिवार आश्रित है और ऐसे लोगों को लाइफ कवर लेना जरूरी है। टर्म इश्योरेंस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ने के मद्देनजर कवर को जोड़ते रहना चाहिए। एक्सपर्ट का मानना है कि जब परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन हो या बीच में बड़ा लोन लेना पड़ जाए तो पर्याप्त अतिरिक्त कवर लेना चाहिए।

बाजार में कई तरह के टर्म इंश्योरेंस प्लान उपलब्ध हैं। ये न परिवार को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि ग्राहक को इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में छूट भी देते हैं। जीवनसाथी और बच्चों के लिए 1.5 लाख रुपए तक के प्रीमियम पर हर साल टैक्स डिडक्शन पाया जा सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यह किसके लिए कितने जरूरी हैं?

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परिवार की जरूरत और सुरक्षा के अनुसार चुनें प्लान
जब भी टर्म इंश्योरेंस लेने की योजना बनाएं तो सबसे पहले परिवार की जरूरत की राशि को जोड़ें कि कितनी राशि आपके परिवार के लिए जरूरी है। सही आंकड़े के लिए इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट और इंटरनेट के साथ कई ऐसी साइट मौजूद हैं जो आपको आपकी जरूरत के हिसाब से जरूरत की गिनती कर देंगी। बीमा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है, ज्यादातर टूल्स प्लान लेने वाले की आमदनी पर फोकस करते हैं, इसलिए इनके सुझाव अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आपको अपनी सालाना आमदनी के कम-से-कम 10 गुना रकम का लाइफ कवर लेना चाहिए।

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टर्म प्लान लेते समय कितने समय के लिए लेना है इसे तय करना बेहद जरूरी होता है। जितनी बड़ी अवधि होगी, उतना ही अधिक प्रीमियम होगा। लेकिन, अगर आपकी जिम्मेदारी जल्द खत्म हो रही हों तो रिटायरमेंट तक आप पर बड़ी जिम्मेदारी नहीं रहने वाली है तो लंबी अवधि की पॉलिसी लेने से बचना चाहिए। कुछ बीमा कंपनियां 35 से 40 वर्ष तक का टर्म प्लान देती हैं।

बाजार में मौजूद हैं कई प्लान
बीमा कंपनियां अब सामान्य टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी के अलावा कई ऐसे टर्म प्लान के साथ मौजूद हैं जिसमें वक्त के साथ-साथ एकमुश्त रकम बढ़ती या घटती है या फिर कुछ अलग तरह के विकल्प मौजूद होते हैं। अगर आप हर पांचवें वर्ष में अपनी जिम्मेदारी का आकलन कर सही कदम नहीं उठा सकते तो आपके लिए सामान्य टर्म इंश्योरेंस प्लान ही सही है।

सभी जीवन बीमा कंपनियां टर्म प्लान दे रही हैं। ऐसे में ज्यादा कवरेज के लिए कम प्रीमियम लेने वाली कंपनी का चुनाव बेहतर रहता है। इंश्योरेंस एजेंट के साथ ही इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर भी टर्म प्लान लिया जा सकता है। इसके अलावा कई ऐसी वेबसाइट मौजूद हैं जो न केवल टर्म इंश्योरेंस लेने में मदद कर रही हैं बल्कि योजनाएं दे भी रही हैं। पॉलिसीबाजार और कवरफॉक्स जैसी पॉलिसी ऐग्रिगेटर वेबसाइट्स का भी चयन किया जा सकता है।

कौन है सस्ता
एक ही इंश्योरेंस कंपनी का ऑनलाइन प्लान ऑफलाइन वर्जन से 25% तक सस्ता पड़ सकता है। वेबसाइट्स पर पॉलिसी की कीमत और उपलब्धताओं की तुलना ज्यादा आसान होती है।
जब बीमा फॉर्म भरें तो रखें इन बातों का ध्यान

1. जब भी कोई बीमा लें तो ध्यान रखें कि इंश्योरेंस एजेंट की बजाय खुद भरें। फॉर्म खुद भरेंगे तो आपको यह पता चल जाएगा कि इंश्योरेंस कंपनी आपको कवर देने से पहले आपके बारे में क्या-क्या जानना चाहती है। आप फॉर्म में मौजूदा बीमारियों, जारी इलाज, फैमिली हिस्ट्री और नशे की आदत आदि की जानकारियां अवश्य दें।

2. प्लान लेते वक्त नॉमिनी(अपने उत्तराधिकारी) का नाम जरूर दें। आपके नॉमिनी को भी पता होना चाहिए कि आप कितने का टर्म प्लान ले रहे हैं और संबंधित दस्तावेज कहां पर रखे हैं। इंश्योरेंस पॉलिसी लेते वक्त मैरिड विमिंज प्रॉपर्टी एक्ट, 1874 (एमडब्ल्यूपी) को भी स्वीकार करें।

3. प्रॉटेक्शन प्लान लेते वक्त गंभीर बीमारियों या कैंसर जैसी किसी खास बीमारी का कवर निश्चित रूप से लें। सिर्फ टैक्स बचाने के लिए लाइफ इंश्योरेंस लेना वित्तीय रूप से नुकसानदायक हो सकता है।

और भी कई सुविधाएं हैं मौजूद
किसी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में वैकल्पिक अतिरिक्त सुविधाओं को राइडर्स कहा जाता है। ये प्राइमरी पॉलिसी में हो सकते हैं या नहीं भी। किसी खास संभावित परिस्थिति के लिए राइडर लेने पर उस परिस्थिति में ग्राहक को निश्चित रकम मिल जाती है, जो कि इंश्योरेंस की तय रकम के अलावा होती है। कुछ खास तरह के राइडर्स हैं

क्या है फायदा
दुर्घटना में मृत्यु का लाभ, दुर्घटना और दुर्घटना के दौरान यदि आप अपंग हो जाते हैं तो उसका भी लाभ, प्रीमियम नहीं देने की छूट, दुर्घटना में अपंगता पर नियमित आमदनी और गंभीर बीमारी में वित्तीय लाभ बी मिलता है।

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