Friday , November 16 2018
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नासा के अंतरिक्ष यान ने क्षुद्रग्रह ‘बेन्नू’ की पहली तस्वीर उतारी

नासा के अंतरिक्ष यान ने दो साल की यात्रा के बाद क्षुद्रग्रह ‘बेन्नू’ की पहली तस्वीर उतारी है। इससे सौर मंडल के रहस्यों से पर्दा उठाने में मदद मिल सकती है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने सितंबर 2016 में बेन्नू पर पहुंचने के लिए स्पेक्ट्रल इंटरप्रिटशन, रिसोर्स आइडेंटिफिकेशन, सिक्योरिटी रिगोलिथ एक्सप्लोरल (ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स) यान लांच किया था। दिसंबर तक इसके ‘बेन्नू’ की सतह पर उतरने की संभावना है।

ओएसआइआरआइएस-आरईएक्स ने पिछले सप्ताह 17 अगस्त को अपने पॉलीकैम कैमरे की मदद से करीब 22 लाख किलोमीटर की दूरी से यह तस्वीर उतारी है। अंतरिक्ष यान ने जिस क्षुद्रग्रह की तस्वीर भेजी है, वह छोटे पहाड़ के बराबर है और इसकी परिधि 500 मीटर के करीब है।

नासा के अनुसार, तस्वीर में यह क्षुद्रग्रह तारों की विपरित दिशा में घूमता दिखाई देता है। बेन्नू पर पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यान अपने उपकरणों की मदद से क्षुद्रग्रह की धूल और प्राकृतिक उपग्रह के साथ ही उसके प्रतिबिंब बनाने की क्षमता का पता लगाएगा। यान लैंड होने के बाद बेन्नू के उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के करीब से गुजरेगा। 2020 में वैज्ञानिक इस यान द्वारा जुटाए नमूने जमा करेंगे और 2023 तक यह पृथ्वी पर लौट आएगा।

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अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय में अंतरिक्ष यान के प्रमुख जांचकर्ता दांते लॉरेटा ने बताया कि हम पहली बार बेन्नू के इतना करीब पहुंचे हैं। हमने पांच लाख क्षुद्रग्रह में से बेन्नू को इसलिए चुना था क्योंकि यह सूर्य के चारों ओर धरती के पथ के करीब है। माना जा रहा है कि साल 2135 में यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकरा सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी से इसके टकराने की आशंका बेहद कम है।

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भारत-फ्रांस अगले साल उपग्रहों पर काम शुरू करेंगे 
भारत और फ्रांस अगले साल से समुद्र की निगरानी के लिए उपग्रह लांच करने पर काम शुरू करेंगे। फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए भूमध्य सागर से हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्से को कवर करने के लिए उपग्रहों को डिजाइन किया जाएगा।

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