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विदेश जाकर राहुल गांधी बीजेपी पर लगातार कर रहे है हमले

विदेश जाकर राहुल गांधी बीजेपी पर लगातार हमले कर रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने आरएसएस की तुलना भी मुस्लिम ब्रदरहुड से कर दी है. ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप के सिलसिले ने नए टकराव को जन्म दे दिया है.
 आइए जानते हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड किस तरह का संगठन है  कैसे अस्तित्व में आया? आखिर ये संगठन किन उद्देश्यों पर कार्य करता है जिससे राहुल ने इसकी तुलना आरएसएस से की है.
बता दें कि मुस्लिम ब्रदरहुड अरब संसार का सबसे पुराना इस्लामी राजनीतिक समूह है  कुछ अरब राष्ट्रों में इसे प्रतिबंधित किया गया है. इसका अरबी में नाम अखवानुल मुस्लिमीन है.20वीं सदी में मिस्र में एक बड़े इस्लामी विद्वान  शिक्षक हुए जिनका नाम था हसन अल बन्ना. हसन अल बन्ना ने इस्लामी मूल्यों से शासित समाज, राष्ट्र  देश का सपना देखा. अपने सपनों को सच में बदलने के लिए हसन अल बन्ना ने 1928 में मिस्र में एक संगठन की स्थापना की जिसका नाम मुस्लिम ब्रदरहुड रखा.
शुरुआत में यह एक समाज सुधार आंदोलन था लेकिन बाद में राजनीतिक संगठन बन गया. धीरे-धीरे कई अरब राष्ट्रों में मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं स्थापित हो गईं. मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा अरब जगत में मौजूदा राजनीतिक सिस्टम के सुधार पर मुख्य रूप से केंद्रित है. अन्य इस्लामी संगठनों से हटकर मुस्लिम ब्रदरहुड का उद्देश्य सक्रिय लोकतांत्रिक चुनावी पॉलिटिक्स में भाग लेकर इस्लामी साम्राज्य की स्थापना करना है.
इस संगठन ने गरीब तबके के बीच दान काम  सहायता के माध्यम से राजनीतिक जमीन तैयार करने पर जोर दिया. 1928 में जब इसकी स्थापना हुई तो पूरे मिस्र में इसकी शाखाएं खोल दी गईं. हर शाखाओं को एक मस्जिद, स्कूल  खेल क्लब की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया. इससे संगठन की सदस्यता भी बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ी  1940 तक इसकी सदस्यता बढ़कर 20 लाख हो गई.
हसन अल बन्ना ने मुस्लिम ब्रदरहुड के सशस्त्र अंग की भी स्थापना कर दी जिसने मिस्र में ब्रिटिश शासन के विरूद्ध सशस्त्र आंदोलन चलाया. शुरुआती दिनों में हसन अल बन्ना  सैयद कुतुब शहीद अहम लीडर हुए. मौजूदा समय में मोहम्मद बदी मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड का सुप्रीम लीडर है जो कारागार में है. 2013 में मिस्र का राष्ट्रपति बना मोहम्मद मुर्सी भी मुस्लिम ब्रदरहुड का लीडर है.
यहूदी  ब्रिटिश हितों का विरोध करने के लिए मुस्लिम ब्रदरहुड (एमबी) पर पहली पाबंदी 1948 में लगाई गई थी. इसके बाद फ्री ऑफिसर्स नाम के मिस्री फौज के एक ग्रुप ने ब्रिटेन के कब्जे से आजादी मिलने के बाद मिस्र में अपनी गवर्नमेंट बनाई. फ्री ऑफिसर्स का मुखिया गमाल अब्दुल नासिर था. प्रारम्भ में मुस्लिम ब्रदरहुड ने तो नासिर का समर्थन किया लेकिन बाद में दोनों में मतभेद हो गए. इसके बाद एमबी की ओर से नासिर की मर्डर की प्रयास की गई.
इस घटना के बाद 1950 में एमबी के प्रमुख लीडर सैयद कुतुब को नासिर गवर्नमेंट ने कारागार में डाल दिया  1966 में फांसी दे दी. मिस्र के राष्ट्रपति अनवर अल सादात की मर्डर में भी एमबी का हाथ था. अरब जगत में मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े संगठन को राजनीतिक फायदा भी प्राप्त हुए जिनका विवरण इस तरह से है. 2011 में ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति जैन अल आबिदीन बिन अली को सत्ता से बेदखल कर दिया गया. इसमें ट्यूनीशिया की अन्नहद पार्टी ने संसदीय चुनाव जीता. अन्नहद एक इस्लामी पार्टी है जो एमबी से प्रेरित है.
2012 में बहार-ए-अरब आंदोलन के बाद मिस्र में हुए राष्ट्रपति के चुनाव में मुस्लिम ब्रदरहुड ने अपना कैंडिडेट उतारा. मोहम्मद मुर्सी राष्ट्रपति चुना गया लेकिन 2013 में मिस्र की सेना ने बगावत कर दिया  मुर्सी को सत्ता से बेदखल करके कारागार में डाल दिया. जॉर्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड पार्टी इस्लामिक ऐक्शन फ्रंट (आईएएफ) के नाम से मौजूद थी लेकिन 2013 में (आईएएफ) ने एमबी से अपना नाता तोड़ लिया. आईएएफ की जॉर्डन की संसद में बड़ी मौजूदगी थी.
मुस्लिम ब्रदरहुड कई अरब राष्ट्रों में मौजूद है. फिलिस्तीन में हमास, ट्यूनीशिया में अन्नहद, कुवैत में इस्लामिक कॉन्स्टिट्यूशनल मूवमेंट, बहरीन में मिनबार के नाम से मौजूद है. पाक भारत में जमात-ए-इस्लामी नाम का संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से प्रेरित है. पांच राष्ट्रों मिस्र, रूस, सऊदी अरब, सीरिया  यूनाइटेड अरब अमीरात में मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादीसंगठन घोषित किया गया है.2013 में सऊदी के शाह ने मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों पर जबर्दस्त क्रैकडाउन किया  मार्च 2014 में इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया.
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