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मुजफ्फरपुर बालिका गृह की मीडिया कवरेज पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले पर गुरुवार को पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को अद्यतन जांच रिपोर्ट नहीं सौंपने के कारण लताड़ लगाई है। साथ ही पटना हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तथ्यों के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच से जुड़े तथ्यों की जानकारी प्रिंट और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया तक कैसे पहुंच रही है। इससे जांच प्रभावित हो रही है।

राज्य सरकार की विश्वसनीयता दांव पर लगी
कोर्ट ने आगे कहा कि राज्य सरकार की विश्वसनीयता दांव पर लगी हुई है। ऐसे में जांच अधिकारी का तबादला कैसे हो गया। कोर्ट ने सीबीआई से इससे संबंधित स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह तथा न्यायमूर्ति डॉ. रविरंजन की खंडपीठ ने जांच से तथ्यों के प्रकाशन पर रोक तो लगाई। साथ ही सीबीआई को अद्यतन रिपोर्ट, सीलबंद लिफाफे में 27 अगस्त तक सौंपने को कहा।

27 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। मामले की सुनवाई अब 27 तारीख को होगी और सीबीआई को हर तारीख पर जांच का ब्यौरा सौंपना होगा। कोर्ट का आदेश महाधिवक्ता ने सरकार को बताया। साथ ही मामले के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक संबंधी एक पत्र समाज कल्याण विभाग ने भी जारी किया है।

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बिहार सरकार को नोटिस
वहीं भोजपुर जिले में महिला को निर्वस्त्र करने के मामाले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य के मुखय सचिव को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि इस मामले में एक महिला को 16 साल के नाबालिग की हत्या का दोषी बताते हुए भीड़ ने पहले तो खूब पीटा और फिर उसे निर्वस्त्र कर सड़क पर घुमाया। मृतक लड़का 11वीं कक्षा में दाखिले के लिए बिहिया गांव आया था। जिसके बाद उसका शव रेड लाइट एरिया में पड़ा मिला। इस घटना के बारे में पता चलते ही 20 अगस्त को बड़े पैमाने पर हिंसा फैल गई। भीड़ ने महिला के साथ तो अमानवीय व्यवहार किया ही साथ ही एक घर और कई दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया।

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