Wednesday , November 14 2018
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पायल के सपनों को पति ने दी नई उड़ान

कहते हैं हर कामयाब मर्द की कामयाबी के पीछे औरत का हाथ होता है। पर महिला कबड्डी टीम की कप्तान पायल चौधरी इस मामले में अपवाद हैं। वह उन खुशनसीब महिलाओं में से हैं जिनकी उम्मीदों को पति ने न सिर्फ नई उड़ान दी बल्कि उन्हें नई पहचान भी दिलाई।
कभी खेल को अलविदा कहने वाली कोलकाता की बेटी और हरियाणा की बहू पायल ने कबड्डी टीम को फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। टीम गोल्डन हैट्रिक से सिर्फ एक कदम दूर है। पर पायल के सपनों को साकार करने में पति पैरालंपियन तैराक प्रशांत कर्माकर का भी बड़ा हाथ।

तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाले एकमात्र पैरालंपियन प्रशांत कहते हैं कि पायल 2014 इंचियोन एशियाई खेलों के लिए टीम में चयन न होने से काफी निराश थी। यहां तक कि उन्होंने संन्यास लेने का मन बना लिया था। पर मेरे और कोच दीप्ति भट्टाचार्य के समझने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। फरवरी 2015 में शादी के बाद हमने फिर से रणनीति बनाई। वह अभ्यास के लिए हमारी मेहनत रंग लाई और उसका चयन सैफ खेलों के लिए टीम में हो गया। इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एशियाड का पदक सपना 
प्रशांत बताते हैं कि धुन की पक्की पायल का सपना एशियाड का स्वर्ण पदक जीतना है जिसके वह अब बहुत करीब है। 2014 खेलों में मैंने दो कांस्य पदक जीते थे आकर एक उसके गले में डाला था तब उसने कहा था यह है तो आपका ही। मैं भी चाहती हूं कि मैं पदक जीतूं, राष्ट्रगान बजे और तिरंगा लहरा रहा हो। उसका यह सपना सच होने जा रहा है। उससे ज्यादा खुशी मुझे है। बहुत खुश हूं। वह पहली बार एशियाई खेलों में भाग ले रही हैं और पहली ही बार उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया जिसे वह बचपन से देख रही थीं।

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शादी से दो दिन पहले हो गईं थी चोटिल 
प्रशांत कहते हैं शादी को दो दिन थे। उसकी जिद थी कि वह एक क्लब टूर्नामेंट में खेलेगी। मना करने के बावजूद वह उसमें खेली और घुटने में गंभीर चोट लगा ली। डाक्टरों का कहना था कि शायद ही अब वह कभी खेल के मैदान पर वापसी कर सके। पर इरादों की पक्की पायल ने अपने दृढ़ निश्चय से चोट को भी मात दे दी। कुछ ही दिनों में पायल ने अभ्यास शुरू कर दिया और टीम में वापसी भी की।

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