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दो नाबालिग बहनों से रेप के बाद हत्या के दोषी को सजा-ए-मौत

ऋषिकेश में दो बहनों से दुराचार और उनकी हत्या करने वाले गुरुद्वारे के सेवादार को विशेष न्यायाधीश पोक्सो रमा पांडेय की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। सेवादार को न्यायालय ने सोमवार को दुराचार और हत्या का दोषी ठहराया था। अभियोजन की ओर से मुकदमे में कुल 14 गवाह पेश किए गए।

मामला 15 जून 2017 का है। शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि ऋषिकेश की श्यामपुर पुलिस चौकी के पास नेपाली मूल की एक महिला दो बेटियों (13 व तीन साल) और नौ वर्षीय बेटे के साथ रहती थी। घटना वाले दिन महिला रोज की तरह घरों में कामकाज के लिए गई थी और बेटा ताई के यहां।

बेटा करीब साढ़े ग्यारह बजे घर आया तो देखा कि बाहर से कुंडी लगी हुई थी। दरवाजा खोला तो देखा कि दोनों बहने पलंग पर बेसुध पड़ी थीं। उसने सामने स्थित गुरुद्वारे के सेवादार के फोन से मां को फोन किया, जिसके कुछ देर बाद वह वहां आ गई।

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ऐसे साबित हुआ सेवादार का गुनाह

उन्होंने पड़ोस से ही चिकित्सक को बुलाकर दोनों बच्चियों की जांच कराई तो चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने बताया था कि बच्चियों की गला घोंटकर हत्या की गई है।

इसके बाद पुलिस ने कई साक्ष्य एकत्र किए और घटना वाले दिन देर शाम ही सेवादार सरदार परवान सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में परवान सिंह ने बताया था कि वह दोनों बच्चियों को अकेला देखकर घर में घुसा था। उसने पहले बड़ी बेटी के साथ दुराचार किया और गला घोंटकर उसे मार डाला।

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इसके बाद उसे लगा कि छोटी लड़की ने उसे देख लिया है। इसके बाद उसने छोटी लड़की से भी दुराचार किया और उसे भी मार डाला। पुलिस को बड़ी बच्ची के हाथों से कुछ बाल मिले थे। इनका आरोपी के साथ डीएनए मिलान कराया गया। ये बाल परवान सिंह की दाढ़ी के थे।

अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि अदालत ने इस साक्ष्य को ही सबसे बड़ा साक्ष्य माना है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सरदार परवान सिंह को दोषी करार दिया था। इसके बाद बृहस्पतिवार को दोषी की सजा पर बहस हुई।

न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद परवान सिंह को दुराचार (आईपीसी 376) और पोक्सो अधिनियम के तहत आजीवन कारावास और हत्या (आईपीसी 302) के तहत फांसी की सजा सुनाई है।

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