Wednesday , November 21 2018
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केरल में जल प्रलय के बाद अब आई सफाई की बड़ी चुनौती

केरल में बाढ़ग्रस्त स्थानों पर फंसे लोगों को बचाने का काम अब लगभग खत्म होने को है। राज्य में प्रभावित इलाकों में पानी उतरने के बाद मकानों और अन्य स्थानों पर पूरा मलबा भरा हुआ है। इससे बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। इस लिए सरकार मकानों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई की चुनौती से निपटने में जुट गई है।
आपदा प्रबंधन राज्य नियंत्रण कक्ष के अनुसार 8 अगस्त से बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 231 लोगों की मौत हो चुकी है और 32 लोग लापता हैं। राज्य भर में करीब पांच हजार राहत शिविरों में 3.91 लाख परिवारों के कम से कम 14.50 लाख लोग रह रहे हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य और स्थानीय स्व-सरकारी विभाग के तहत तीन हजार से अधिक दस्तों ने मकानों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई का काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि ज्यादातर फंसे लोगों को निकाल लिया गया है।

अब दूर दराज के मकानों में तलाश की जाएगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 40 जवानों की एक टीम बाढ़ प्रभावित त्रिशूर जिले में मलबा तथा शवों को हटाने के काम में लगी है। अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 500 से अधिक लोगों को बचाया गया है।

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नासा का अनुमान, मानसून की बारिश के कारण आई बाढ़

नासा ने उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए एक वीडियो जारी किया है। इससे केरल में बारिश और बाढ़ की स्थिति की भयावहता का पता चलता है। भारत में आम तौर पर इस समय में ग्रीष्मकालीन मॉनसून आता है और क्षेत्र में भारी बारिश होती है। हालांकि सामान्य मॉनसून के दौरान समय-समय पर कम दबाव के क्षेत्र बन सकते हैं। इस कारण अधिक बारिश हो सकती है।

नासा ने एक बयान में कहा है कि हिमालय की भौगोलिक स्थिति और पश्चिमी घाट के कारण दक्षिणी पश्चिमी तट पर भारी बारिश हो रही है। यह पर्वतश्रेणी हिमालय जितनी बड़ी तो नहीं है लेकिन भारत के पश्चिमी तट के समानांतर चलती है। इसकी कई चोटियां 2,000 मीटर से भी अधिक ऊंची हैं।

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इस तरह से देखें तो पश्चिमी घाट की माकूल स्थिति के कारण भारत के पश्चिमी तटीय इलाकों में अधिक बारिश होती है। दक्षिण पश्चिम मानसून के तहत उत्तरी हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली गर्म हवाओं में निहित नमी इस पर्वत श्रेणी से टकराती है, जिससे अधिक बारिश होती है।

राज्य में मस्जिद बनी हिंदुओं का सहारा
बाढ़ के हालात ने धर्म और जाति के अंतर को दूर कर दिया है। उत्तरी मलप्पुरम की एक मस्जिद ने 17 विस्थापित हिंदू परिवारों को शरण दी है। इसमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। चलियार गांव के अकमपाडम में स्थित जुमा मस्जिद 8 अगस्त को उत्तरी जिलों में बाढ़ आने के बाद से राहत शिविर में तब्दील हो गई है।

धर्म और जाति से परे विस्थापित लोगों को मस्जिद में सोने के लिए आश्रय दिया जा रहा है। उन्हें कैंटीन में तैयार खाना मिल रहा है। घर वापसी के समय दाल, चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी दी जा रही है। चलियार ग्राम पंचायत प्रमुख पी टी उस्मान ने कहा कि जुमा मस्जिद में जिन 78 लोगों ने शरण ली, उनमें से अधिकतर हिंदू हैं।

केरल में फीकी रही बकरीद

वर्षा और बाढ़ से उबर रहे केरल में बुधवार को बकरीद बिल्कुल फीकी रही। राज्यभर में मस्जिदों में सैकड़ों श्रद्धालु कुर्बानी का त्योहार मनाने पहुंचे। उन लोगों के लिए विशेष नमाज अदा की गई जिन्होंने अपनी जान गंवाई है और उनके लिए भी, जो बाढ़ की मार झेल रहे हैं। निचले इलाकों में अब भी पानी जमा होने और बचाव एवं राहत कार्य जारी रहने के कारण कई स्थानों पर विशेष ईदगाहों में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही।

बिना चेतावनी बांध के गेट खोलने पर जांच की मांग

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने बुधवार को आरोप लगाया कि बाढ़ और बारिश से बर्बाद हुए राज्य में कई बांधों के गेट पर्याप्त चेतावनी दिए बगैर खोले गए थे। इसके कारण ज्यादातर जिलों में बाढ़ आ गई। साथ ही बड़े पैमाने पर तबाही भी मची। उन्होंने आरोपों की न्यायिक जांच की भी मांग की।
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