Friday , September 21 2018
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ईद पर खुले में कुर्बानी पर हाईकोर्ट द्वारा लगाई रोक

उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा ईद पर स्लॉटर हाउस में कुर्बानी करने के आदेश का कुछ खास असर नहीं दिखाई दिया। देहरादून में स्लॉटर हाउस होने के बाद भी लोगों ने घरों पर ही कुर्बानी दी। वहीं हरिद्वार और रुड़की में स्लॉटर हाउस न होने से घरों पर ही बकरों की कुर्बानी दी गई।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के बयान ‘खुले में बलि नहीं, नालियों में खून नहीं’ का स्वत: संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने ईद पर गोवंश तथा ऊंट की कुर्बानी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि सभी धर्मों के लिए मंदिर या इबादतगाह के भीतर या इनके बाहर, चौराहों अथवा सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं की बलि या कुर्बानी पर रोक रहेगी। इसके अलावा कुर्बानी केवल स्लॉटर हाउस में करने के आदेश दिए।

मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देने वाली संविधान की धारा 25 और 26 का विस्तृत विश्लेषण और व्याख्या करते हुए धर्म, धार्मिक कट्टरता, विश्वास, परंपरा, जीवन पद्धति, विभिन्न न्यायालयों द्वारा दी गई व्यवस्थाओं तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 का हवाला देते हुए फैसला सुनाया। कोर्ट ने समस्त जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ईद के मौके पर सार्वजनिक स्थानों व खुले में पशुओं की कुर्बानी होने से रोकने के लिए निगरानी रखें। कोर्ट ने कहा है कि प्रार्थना भी प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थल पर ही की जाए।

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कोर्ट ने नगरपालिकाओं को भी कूड़ेदानों से पशुओं के अवशेष साफ करने की विशेष व्यवस्था करने को कहा है। हिंदू महासभा हल्द्वानी के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने भी हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा था कि ईद के मौके पर बड़ी संख्या में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इससे सार्वजनिक स्थानों, नालियों, गलियों में जानवरों का रक्त बहता है। साथ ही हिंदू बहुल क्षेत्रों में जानवरों को कुर्बानी देने से कानून व्यवस्था भी खराब होने की आशंका रहती है। इसका संज्ञान लिया जाए।

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सरकार स्लॉटर हाउस में इंतजाम करे तो कुर्बानी से गुरेज नहीं

सरकार स्लॉटर हाउस में इंतजाम करे तो हमें कुर्बानी से कोई गुरेज नहीं है। देहरादून के उलेमा ने हाईकोर्ट के उस फैसले का सम्मान किया है, जिसमें कहा गया है कि बकरों की कुर्बानी केवल स्लॉटर हाउस में की जाए। उलेमा का कहना है कि इस्लामिक तौर पर स्लॉटर हाउस में कुर्बानी में कोई परेशानी नहीं है।

शहर मुफ्ती सलीम अहमद का कहना है कि मकसद बकरे की कुर्बानी है। अब यह घर से बाहर अगर स्लॉटर हाउस में की जा रही है तो इसमें कोई परेशानी वाली बात नहीं है। सरकार को स्लॉटर हाउस में पुख्ता इंतजाम कराने की जरूरत है। क्षमता बढ़ाने की जरूरत है ताकि जो भी लोग कुर्बानी करने जाएं, वहां आसानी हो। शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी ने कहा कि स्लॉटर हाउस अच्छा विकल्प हो सकता है, बशर्ते वहां इंतजामात होें। मौलाना शिराकत का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसले सराहनीय है और हम सम्मान करते हैं। जीएमएस रोड स्थित मदरसा के मौलाना हुसैन अहमद का कहना है कि राजधानी के स्लॉटर हाउस की क्षमता बढ़ानी जरूरी है क्योंकि ईद के पहले ही दिन भारी तादाद में बकरों की कुर्बानी होती है।

स्लॉटर हाउस में प्रतिदिन 300 बकरों की है क्षमता 
राजधानी में भंडारीबाग के निकट नगर निगम का स्लॉटर हाउस है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह का कहना है कि यहां रोजाना करीब 300 बकरे कुर्बान किए सकते हैं। हालांकि बकरीद पर संख्या ज्यादा होने की स्थिति में थोड़ा वक्त लग सकता है।

नगर निगम चलाएगा विशेष सफाई अभियान
ईद-उल-जुहा पर शहर में होने वाली कुर्बानी के मद्देनजर नगर निगम ने तैयारी पूरी कर ली है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि निगम की ओर से विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत जहां भी गंदगी होगी, उसे तत्काल हटाया जाएगा। सफाई के बाबत संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं।

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