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बजरंग के ‘बल’ से लहराई स्वर्णिम पताका

पहलवान बजरंग पूनिया ने जकार्ता एशियाई खेलों में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया। 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती भार वर्ग के फाइनल में उन्होंने जापान के तकातानी दाईची को 11-8 मात दी। इस जीत को हासिल करने के लिए बजरंग को थोड़ी मशक्क जरूर करनी पड़ी, लेकिन पूरी बाउट में उन्होंने जबरदस्त आक्रामकता दिखाई।

गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदकधारी बजरंग को इस वर्ग में स्वर्ण पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। अपनी स्वर्ण पदक बाउट से पहले बजरंग ने उज्बेकिस्तान के खासानोव सिरोजिद्दीन (13-3), ताजिकिस्तान के फेजिएव अब्दुलकोसिम (12-2) और मंगोलिया के बातचुलुन्न बातमागनाई (10-0) को हराया।

उन्हेें पहले दौर में बाई मिली थी। तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बदौलत बजरंग ने सभी तीनों बाउट अपने नाम करते हुए 65 किग्रा वर्ग में दबदबा कायम रखा। 24 वर्षीय भारतीय पहलवान ने एशियाई खेलों से पहले लगातार तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे।

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उन्होंने गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में, जार्जिया में तबलिसी ग्रां प्री और इस्तांबुल में यासर दोगु अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खिताब जीता था।

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बजरंग के अलावा दो बार के ओलंपिक पदकधारी सुशील कुमार (74 किग्रा) और संदीप तोमर (57 किग्रा) बाहर हो गए। लेकिन अभी मौसम खत्री (97 किग्रा) और पवन कुमार (86 किग्रा) के लिए अपने संबंधित वर्गों में उम्मीद बनी हुई और उन्हें इंतजार करना होगा कि उन्हें रेपेचेज राउंड का मौका मिलता है या नहीं।

कैसे हारे सुशील कुमार

सुशील 74 किग्रा वर्ग में बहरीन के एडम बातिरोव से 3-5 से हारे। सुशील को एशियाई खेलों के लिए हुए ट्रायल में छूट दी गई थी और वह यहां चार साल में पहली बाउट हारने के बाद आए थे।

पहले पीरियड में सुशील ने 2-1 की बढ़त बनाई हुई थी लेकिन बहरीन के खिलाड़ी ने शानदार वापसी कर भारतीय प्रशंसकों को चुप कर दिया। उनकी हार से भारतीय खेमे के लिये हैरानी भरी है, सुशील खुद अपनी हार से हैरान थे।

उन्होंने कहा, ’मैंने इसकी उम्मीद नहीं की थी। मैं कोई बड़ा टूर्नामेंट खेलकर नहीं आया था, मेरी हार का यही कारण है। लेकिन यह खेल का हिस्सा है। मैं कड़ी मेहनत करूंगा और वापसी करूंगा। मैं सुस्त नहीं था, मैंने कोशिश की थी।’

लंदन ओलंपिक के रजत पदकधारी सुशील ने दूसरे पीरियड में स्कोर करने के दो मौके बनाये लेकिन वे इन्हें अंक में नहीं बदल सके जबकि बातिरोव ने कोई मौका नहीं गंवाया। वह 3-2 से आगे थे और फिर उन्होंने इस भारतीय को मैट से बाहर कर जीत दर्ज की।

वर्ष 2008 और 2012 ओलंपिक में क्रमश: कांस्य और रजत पदक जीतने वाले सुशील के पास रेपेचेज खेलने का मौका तब समाप्त हुआ जब बातिरोव क्वार्टरफाइनल की बाउट हार गए। अगर बातिरोव फाइनल में पहुंच जाते तो इस भारतीय को रेपेचेज के जरिये कांस्य पदक मुकाबले का मौका मिलता।

लड़कर हारे भारतीय पहलवान

संदीप तोमर ने क्वार्टरफाइनल में हारने से पहले अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने तुर्कमेनिस्तान के रूस्तम नाजारोव के खिलाफ दूसरे दौर की बाउट 12-8 से जीती थी लेकिन उन्हें ईरान के रेजा अत्रिनाघार्ची से 9-15 से हार का मुंह देखना पड़ा। ईरान का यह पहलवान अपनी सेमीफाइनल बाउट हार गया जिससे संदीप का टूर्नामेंट में सफर खत्म हो गया।

तोमर ईरानी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ तकनीकी रूप से बेहतर प्रदर्शन की बदौलत 6-6 की बराबरी पर थे। लेकिन दूसरे पीरियड में रेजा ने बड़े स्कोर करने वाले दांव खेले और जीत दर्ज की।

मौसम खी को 97 किग्रा वर्ग में उज्बेकिस्तान के मागोमेद इब्रागिमो से 0-8 से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। खत्री पूरी बाउट के दौरान सुस्त दिखे और उन्होंने कोई आक्रामक दांव नहीं खेला।

वहीं 86 किग्रा में पवन कुमार ने कम्बोडिया के हेंग वुथी को 8-0 से पराजित कर अच्छी शुरूआत की लेकिन वह बाद में ईरान के मौजूदा विश्व चैम्पियन हसन याजदानी चराती से हार गये जो तकनीकी रूप से उनके फाकी बेहतरत थे।

याजदानी रियो ओलंपिक पदक के स्वर्ण पदक विजेता भी हैं, इसके अलावा वह तीन विश्व कप स्वर्ण पदक भी जीत चुके हैं।

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