Wednesday , September 19 2018
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ऐसी हैवानियत देख आप भी डर जाएंगे: फावड़े से काटता रहा, खून पीता रहा सिरफिरा

सिरफिरे संजीव के हाथ में फावड़ा था। उसके सामने जो आया, उस पर वो फावडे़ से वार करता गया। मौत का खूनी खेल देखकर ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो उसकी मानसिक स्थिति का आलम यह था कि वह फावड़े से लोगों को काटता रहा और फिर फावड़े पर लगा खून चाटता रहा। हत्यारोपी का भयावह और नरपिशाच रूप देख पूरे गांव में दहशत फैली रही। ग्रामीणों ने छतों से पथराव कर उसे काबू में किया।

ऐसे मचाया आतंक
शाम के 6:15 बजे थे जब कंकरखेड़ा के जंगेठी गांव में सिरफिरे संजीव शर्मा ने आतंक मचाया। सबसे पहले वह परचून दुकानदार रतन सिंह के पास पहुंचा। बोला कि तुम इतने बूढे़ हो गए। लेकिन बोलते बहुत हो। बार-बार पैसे मांगते हो। आज तुम्हारा हिसाब ही कर देता हूं। इससे पहले रतन कुछ समझते कि संजीव ने फावडे़ से पहला बार उनके सिर पर किया। जिस पर रतन दुकान के अंदर जा गिरे। इसके बाद संजीव ने उन पर एक के बाद एक करीब आधा दर्जन वार किए। चीख पुकार सुन उनका पुत्र संजय, पुत्रवधू सुमन, पोती अंजली पहुंचे तो उसने सभी पर हमला बोल दिया।

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जिसमें दम है, सामने आओ
रतन की हत्या व परिवार को घायल करने के बाद हत्यारोपी संजीव कंधे पर फावड़ा लेकर गांव में घूमता रहा। चिल्लाता रहा कि जिसमें दम है, वह सामने आकर दिखाए। उसके सामने जो भी आया, उस पर हमला बोला। फिर कोई ग्रामीण उसके सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
सिर में मारी ईंट
सिरफिरा फावड़े से आठ लोगों को घायल कर चुका था। जिसके चलते लोग अपने घरों की छत पर जा चढ़े और घेराबंदी कर पथराव किया। संजीव के सिर पर ईंट लगी तो वह जमीन पर जा गिरा। तब जाकर लोगों ने उसे पीटकर पुलिस को सौंपा।

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दोनों पोते बचाए
रतन ने घर में ही परचून की दुकान खोली थी। दादा रतन के साथ दुकान में उसके दोनों पोते शुभम (11) और कार्तिक (8) भी थे। हमले के दौरान संजीव बार बार दुकान में घुसना चाहता था। लेकिन रतन ने घुसने नहीं दिया। इस दौरान दुकान से दोनों बच्चे पीछे के रास्ते घर में चले गए। ग्रामीणों ने बताया कि रतन सिंह ने अपने दोनों पोते की जान बचा ली।

पुलिस को भी दौड़ाया
प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों ने बताया कि रतन की हत्या करने के बाद आरोपी ने बुजुर्ग हरपाल को लहूलुहान कर दिया। यूपी 100 पुलिस और फैंटम पुलिस मौके पर पहुंची तो हत्यारोपी संजीव ने फावड़ा लेकर पुलिस को दौड़ा लिया। बाद में पुलिस ने उसे किसी तरह पकड़ा तो वह फिर गाड़ी से कूदकर भाग गया। ग्रामीणों ने ही उसे पकड़कर पुलिस को सौंपा।

बाबा लौटा दो या आरोपी की लाश दे दो
पुलिस ने जब रतन सिंह के शव को कब्जे में लेने का प्रयास किया तो दोनों मासूम पोते अधिकारियों के सामने आ गए। कहा कि या तो बाबा को लौटा दो या आरोपी की लाश हमें सौंप दो, उसके बाद शव उठने देंगे। मासूमों की आंखों में गुस्सा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। किसी तरह अधिकारियों ने बच्चों और परिजनों को समझाकर शव पीएम के लिए भेजा।

प्रधान के बेटे पर किया था हमला
ग्रामीणों के अनुसार संजीव गांव में खौफ जमाए रखने को ऐसा करता था। तीन साल पूर्व उसने पूर्व प्रधान सोहन पाल के बेटे बिशू को घायल किया था। संजीव आए दिन शराब पीकर झगड़ता था। आरोपी का पिता कचहरी में सौर ऊर्जा कार्यालय में नौकरी करता है। जो अधिकारियों के संपर्क में रहता है। उसकी सिफारिश पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती थी। होती भी थी तो हल्की धाराओं में चालान होता था। आरोपी कई बार झगड़ों में जेल जा चुका है।

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