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बड़ा खुलासा: तीन-चौथाई सीटें हार सकती है भाजपा

इस साल के आखिर में तीन राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं। उनमें एक राज्य राजस्थान भी शामिल है। एबीपी न्यूज और सी-वोटर ने वहां चुनाव से चार महीने पहले ओपिनियन पोल सर्वे कराया है जिसके मुताबिक राजस्थान में हरेक पांच साल बाद सत्ता बदलने की परंपरा (1993 के बाद) इस बार भी जारी रह सकती है। सर्वे में कहा गया है कि सीएम वसुंधरा राजे की अगुवाई में सत्तासीन भाजपा मौजूदा सीटों से काफी कम सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। सर्वे के मुताबिक 2018 के आखिर में होने वाले चुनाव में भाजपा 57 सीटें जीत सकती है जो मौजूदा 162 सीट से 105 सीट कम है। यानी भाजपा 200 सदस्यों वाली विधान सभा में तीन चौथाई सीटें हार सकती है जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस 6 गुना बेहतर प्रदर्शन करते हुए करीब 130 सीटें जीत सकती है। फिलहाल कांग्रेस के पास मात्र 21 सीटें हैं।

सर्वे के मुताबिक कांग्रेस 20 साल पुराना इतिहास दोहरा सकती है। बता दें कि 20 साल पहले यानी 1998 में कांग्रेस ने अबतक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 153 सीटें जीती थीं। तब भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई थी। तब केंद्र में भी भाजपा की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। 1998 में अशोक गहलोत पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। इसके पांच साल बाद यानी 2003 में कांग्रेस की जबर्दस्त हार हुई और वो 56 सीटों पर सिमट गई। भाजपा को 120 सीटों पर जीत मिली और वसुंधरा राजे राज्य की सीएम बनीं। उस वक्त भी केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी।

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साल 2008 के विधान सभा चुनाव में एक बार फिर राज्य में सियासी समीकरण बदला और कांग्रेस 96 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। भाजपा 78 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद 2013 के चुनावों में कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन रहा और वो 21 सीटों पर जा सिमटी जबकि भाजपा ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 162 सीटें जीतीं। हालिया सर्वे के मुताबिक भाजपा को 37 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं, जबकि कांग्रेस को 51 फीसदी और अन्य को 12 फीसदी। हालांकि, सीएम चेहरे को तौर पर कांग्रेस के अशोक गहलोत वसुंधरा राजे पर बारी दिख रहे हैं। उन्हें 41 फीसदी लोगों ने पसंद किया है, जबकि वसुंधरा को 24 और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट को मात्र 18 फीसदी लोगों ने पसंद किया है।

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