Wednesday , September 19 2018
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इस मामले में यूपी में अव्वल और उत्तर भारत में दूसरे स्थान पर है काशी

अपनी काशी पूरे प्रदेश में रिहायश के लिए सबसे बेहतरीन है। पूरे उत्तर भारत में चंडीगढ़ के बाद यह दूसरे स्थान पर है। केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय ने सोमवार को ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स सूची जारी की। इसमें वाराणसी 33वें स्थान पर है। यहां नागरिक सुविधाएं प्रदेश में सबसे बेहतर हैं। वाराणसी के बाद प्रदेश में दूसरे स्थान पर झांसी है, जो देश में 34वें स्थान पर है। स्मार्ट सिटी में आने के साथ ही वाराणसी में नागरिक सुविधाएं तेजी से बढ़ी हैं। रेलवे स्टेशन, हवाई सुविधा, पर्यटन, सड़कों, पार्कों और चौराहों की दशा में लगातार सुधार हुआ है।

महाराष्ट्र का पुणे देशभर में रिहायश के लिए सबसे बेहतरीन शहर है। नागरिक सुविधाओं के लिहाज से देशभर के 111 शहरों की रैंकिंग में चंडीगढ़ को छोड़कर उत्तर भारत का कोई भी शहर शीर्ष दस की सूची में शुमार नहीं है। चंडीगढ़ के बाद उत्तर भारत का दूसरा बेहतर शहर वाराणसी 33वें नंबर पर है। इसके बाद झांसी 34वें और नई दिल्ली 65वें स्थान पर है। सबसे निचले पायदान पर रामपुर शहर है।

केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को सूची (ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स) जारी करते हुए बताया कि बेहतर नागरिक सुविधाओं के मामले में दूसरे स्थान पर नवी मुंबई और तीसरे नंबर पर ग्रेटर मुंबई हैं। बीते चार सालों से मिशन मोड में चल रही योजनाओं से शहरी ढांचे में बुनियादी बदलाव आया है। आज इसके आकलन के आधार पर मिले परिणाम जारी किए जा रहे हैं। इंडेक्स के आधार पर संस्थाओं व निवेशकों समेत आम लोगों के पास चयन का विकल्प रहेगा।

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दरअसल, केंद्र सरकार ने जनवरी 2018 में शहरों की सुविधाओं के आधार पर इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। रैंकिंग में तुलनात्मक आधार पर यह पता करना था कि कौन सा शहर बेहतर है और किस शहर में सुविधाएं खराब हैं। इसमें 100 स्मार्ट शहरों के साथ 10 लाख से ऊपर की आबादी के 16 शहर शामिल किए गए। लेकिन पश्चिम बंगाल के चार शहर शामिल नहीं हुए। मानकों पर खरे न उतरने के कारण नया रायपुर व अमरावती को छोड़ दिया गया। इसमें गुरुग्राम को शामिल किया गया।

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इस तरह शहरों को दिया गया अंक

शहरों के लिए 100 अंक तय किए गए थे। इसमें से सांस्थानिक व सामाजिक स्थिति के लिए 25-25 अंक थे। वहीं, 5 अंक आर्थिक सेवाओं के हिस्से में था। बाकी 45 अंक भौतिक सेवाओं को दिया गया।

इंडेक्स में शामिल मानदंड
सांस्थानिक (सरकार से जुड़े हुए), सामाजिक (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि), आर्थिक व भौतिक सेवाओं की स्थिति को इस सूची का मुख्य स्तंभ बनाया गया। इन्हें आगे 15 वर्गों के 78 मानकों में बांटा गया। इसमें नागरिक सुविधाओं, छात्र-शिक्षक, डॉक्टर-मरीज अनुपात, पेयजल सप्लाई, प्रदूषण स्तर, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक परिवहन, अपराध दर जैसे कई सारे मानक भी रखे गए।

सूची में शामिल उत्तर भारत के शहर
वाराणसी- 33
झांसी- 34
लुधियाना- 35
गाजियाबाद- 46
आगरा- 55
धर्मशाला- 56
नई दिल्ली- 65
फरीदाबाद- 72
लखनऊ- 73
कानपुर- 75
देहरादून 80
बरेली-81
करनाल- 82
अलीगढ़- 86
गुरुग्राम- 88
मुरादाबाद- 89
रामपुर- 111

वाराणसी में तेजी से बढ़ रही नागरिक सुविधाओं के चलते लोगों का बढ़ा रुझान

 वाराणसी में तेजी से बढ़ रही नागरिक सुविधाओं के चलते काशी में लोग बसना चाहते हैं। हाल ही केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। यही कारण है कि स्मार्ट सिटी में शुमार काशी अब रहने के लिहाज से प्रदेश में पहले नंबर और पूरे देश में 33वें नंबर पर है। जबकि काशी उत्तर भरत में चंडीगढ़ के बाद दूसरे स्थान पर है। जबकि झांसी प्रदेश में दूसरे और देश में 34वें स्थान पर है।

अब तक धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के अलावा मोक्ष के नाम पर लोग काशी प्रवास्र पर आकर रहते थे, वहीं प्राचीन समय में राजा महाराजा भी घाटों के किनारे महल बनाकर रहते थे। लेकिन अभी भी काशी प्रवास के मामले में प्रदेश में एक नंबर पर है। शहर में बन रही सड़ुकें, आवास कॉलोनियां, रेलवे स्टेशन, हवाई सुविधा, पर्यटन, मनोरंजन, आवागमन के साधन और इलाज की बेहतर सुविधा सहित कई अन्य सुविधाओं में काशी विकास कर रही है।

एक ओ जहां स्मार्ट सिटी के चलते चौराहों, पार्कों और सड़कों की दशा में लगतार सुधार हो रहा है। वहीं पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है। इन सभी व्यवस्थाओें के चलते ही काशी रहने के मामले में देश में 33वें, उत्तर भारत में दूसरे और प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त हुआ है।

यहां हुआ सर्वे
केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को (ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स) सूची जारी की। इसमें बेहतर नागरिक सुविधाओं के मामले को लेकर सर्वे हुआ है। इस पूरे सर्वे में बीते चार सालों से मिशन मोड में चल रही योजनाओं से शहरी ढांचे में बुनियादी बदलाव का सर्वे किया गया है। इस आंकलन के आधार पर मिले परिणाम के आधार पर संस्थाओं व निवेशकों समेत आम लोगों के पास चयन का विकल्प रहेगा।

इस तरह शहरों को दिए गए अंक

शहरों के लिए 100 अंक तय किए गए थे। इसमें से सांस्थानिक व सामाजिक स्थिति के लिए 25-25 अंक थे। वहीं, 5 अंक आर्थिक सेवाओं के हिस्से में था। बाकी 45 अंक भौतिक सेवाओं को दिया गया।

देशभर के 111 शहरों की रैंकिंग के लिए सस्थानिक (सरकार से जुड़े हुए), सामाजिक (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि), आर्थिक व भौतिक सेवाओं की स्थिति को इस सूची का मुख्य स्तंभ बनाया गया। इन्हें आगे 15 वर्गों के 78 मानकों में बांटा गया। इसमें नागरिक सुविधाओं, छात्र-शिक्षक, डॉक्टर-मरीज अनुपात, पेयजल सप्लाई, प्रदूषण स्तर, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक परिवहन, अपराध दर जैसे कई सारे मानक भी रखे गए।

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