Tuesday , September 25 2018
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एशियाई खेलों के लिए मिला ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन का साथ

इंचियोन एशियाई खेल पहलवान बजरंग के लिए बेहद खास था। यहां उन्हें फाइनल में अपने गोल्ड खोने का कोई गम नहीं था, लेकिन गुरू योगेश्वर दत्त के चैंपियन बनने की बेहद खुशी थी। अब बजरंग अपने रजत के रंग को सोने में बदलने को बेकरार हैं।

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हालांकि इस बार उन्हें योगेश्वर का साथ नहीं मिलेगा, लेकिन जार्जियन कोच शाको बेनेटिडिस उनके साथ होंगे। यह शाको ही हैं जिन्होंने इस पहलवान की हालिया सफलता में अहम भूमिका निभाई है। यही कारण है कि ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट शाको को अपने खर्च पर बजरंग की निगरानी के लिए जकार्ता भेज रहा है। बजरंग मानते हैं कि शाकों की मौजूदगी उनके लिए खास रहेगी।

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बजरंग मानते हैं कि शाकों के आने के बाद उनके फिटनेस स्तर और पहलवानी में काफी फर्क पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड के बाद तिबल्सी और इंस्तानबुल में यासिर दोगु इंटरनेशनल में स्वर्ण पदक इसका उदाहरण हैं। 65 किलो में खेलने वाले इस पहलवान का कहना है कि शाको ने उन्हें कुछ खास टेक्निक पर अभ्यास कराया है और मनोदशा को भी बदला है।

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ओलंपिक चैंपियन आकगुल, हाजी ने कराया अभ्यास 

बजरंग समेत भारतीय पहलवान मानते हैं कि हालिया तुर्की दौरा उनके लिए बेहद फाएदेमंद रहा। यहां उन्हें तुर्की, अजरबैजान, उक्रेन, रूस के नामी विश्व और ओलंपिक चैंपियन पहलवानों के साथ अभ्यास का मौका मिला। बजरंग बताते हैं कि उन्हें अजरबैजान के ओलंपिक चैंपियन हाजी अली के साथ अभ्यास किया। एशियाई खेलों से पहले यह काफी काम आएगा।

वहीं 125 किलो में गोल्ड जीतने वाले सुमित को दुनिया के नंबर एक, तीन बार के विश्व और वर्तमान ओलंपिक चैंपियन ताहा आकगुल ने अभ्यास कराया। सुमित के मुताबिक यह सपने के सच होने जैसा था। उन्होंने उनसे कहा कि कुश्ती की खामियों को मैट पर ही दूर करो और अभ्यास में कोई कसर नहीं छोड़ो।

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