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जेवर एयरपोर्ट के भू-अधिग्रहण में किसानों की सहमति जरूरी नहीं

जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण करने से पहले सरकार को किसानों व अन्य भूस्वामियों की सहमति लेने की जरूरत नहीं होगी। सरकार लोक प्रयोजन के तहत इस काम के लिए भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा-2 (1) के तहत सीधे उचित मुआवजा तय कर भूमि अधिग्रहण कर सकती है।
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एयरपोर्ट निर्माण की नोडल एजेंसी यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की तरफ से 6 अगस्त को दी गई इस राय को निदेशक, भूमि अध्याप्ति ने भी हरी झंडी दिखा दी है। अब शासन न्याय विभाग से राय लेकर गौतमबुद्धनगर के डीएम को नागरिक उड्डयन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के नाम पर अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश देगा।

बता दें कि जेवर एयरपोर्ट के निर्माण को पहले चरण में 1441 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहण के लिए चिह्नित किया गया है। लेकिन अधिग्रहण की  अड़चनों को देखते हुए तीन अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नोएडा दौरे में 150 किसानों को उनसे मिलवाया गया था। इसके बाद ही यह नया रास्ता खोजा गया है।

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सूर्यपाल गंगवार, विशेष सचिव नागरिक उड्डयन ने बताया कि, जेवर एयरपोर्ट के लिए नागरिक उड्डयन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के नाम भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही गौतमबुद्धनगर के कलेक्टर द्वारा की जा रही है। लोक परिवहन के तहत राज्य सरकार के स्वयं के उपयोग व नियंत्रण में मानते हुए सहमति से मुक्त रखा जाना उचित होगा। पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन में यीडा के अभिमत से निदेशक भूमि अध्यप्ति ने भी सहमति प्रकट की है।

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