Monday , August 20 2018
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कम नींद हो सकते हैं टीएटीटी सिंड्रोम के लक्षण

क्या आपका बच्चा दिनभर थका-थका रहता है, उसे हर वक्त सुस्ती और आलस छाया रहता है? अगर ऐसा है तो वह टीएटीटी सिंड्रोम का शिकार हो सकता है। एक सर्वेक्षण में पता चला है आजकल के 80 फीसद किशोरों को पर्याप्त नींद नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा, इनमें से ज्यादातर बच्चे एक समस्या से भी ग्रस्त रहते हैं, जिसे टायर्ड ऑल द टाइम (टीएटीटी) सिंड्रोम कहते हैं। कंप्यूटर या टीवी पर ज्यादा वक्त बिताने पर यह स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे बच्चे व किशोर अक्सर सुस्ती और थकान की शिकायत करते हैं। मधुमेह, एनीमिया और मानसिक बीमारी के लक्षणों से मिलता-जुलता होने की वजह से इसकी जल्द पहचान नहीं हो पाती।

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कम समय के भीतर अत्यधिक थकान और बोरियत महसूस करने की स्थिति को टीएटीटी या टैट कहा जाता है। टैट की पहचान करने में कई बार दिक्कत आती है क्योंकि इसके लक्षण और डायबिटीज, एनीमिया व डिप्रेशन के लक्षण एक जैसे लगते हैं। इस बारे में बताते हुए हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआइ) के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल ने कहा कि टैट होने के पीछे जो अन्य कारक जिम्मेदार हो सकते हैं, वे हैं- पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, कम प्रोटीन का सेवन और कार्बोहाइड्रेट का बहुत अधिक या बहुत कम सेवन। समय पर भोजन न करने और संतुलित आहार न लेने से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, जब कोई व्यक्ति कंप्यूटर के सामने बैठकर पूरे दिन काम करता है, तब भी उसे पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती है।

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उन्होंने कहा कि नींद की कमी से थकावट हो सकती है। इन दिनों लोग बेहद तनावपूर्ण जीवन जी रहे हैं, जिससे उनका एड्रेनिल का स्तर बढ़ा रहता है और वे हर वक्त जागे रहते हैं। तनाव से ऊर्जा घटती है और मानसिक शांति खत्म होती है। यहीं से टैट की शुरुआत होती है। डॉ अग्रवाल ने आगे बताया कि अच्छी खबर यह है कि टैट की दशा लंबे समय तक नहीं रहती है और उचित आराम, संतुलित व समय पर भोजन और नियमित व्यायाम से इसे ठीक किया जा सकता है। सबसे पहले तो यह मानना जरूरी है कि यह एक समस्या है। इससे छुटकारा पाने के लिए आपको अपनी जीवन शैली बदलनी होगी।

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