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इस मामले में पुलिस कप्तान ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन

रोहतक। दलित संघर्ष समिति के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार जिला पुलिस कप्तान से मुलाकात कर पीजीआईएमएस के फोरेंसिक मेडिसन विभाग के सहायक प्रो. डॉ. विनोद कुमार मेहरा के पक्ष में अपनी शिकायत दी। इसमें आरोप लगाया गया कि विभागाध्यक्ष डॉ. एसके धत्तरवाल जातीय आधार पर डॉ. मेहरा का मानसिक शोषण कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने लिखित शिकायत एवं प्रमाण के तौर पर सीडी भी जमा करवाई है।
बसपा जिलाध्यक्ष अडीचंद निंबडिया ने कहा कि जिले में इस प्रकार की घटना निंदनीय है और इस प्रकार के शोषण को सहन नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस अधीक्षक ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है कि जांच में पक्षपात नहीं होगा। वहीं कैप्टन बलवंत भौरिया ने इस विषय पर 13 अगस्त को दलित महापंचायत का आयोजन कर दोषी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाकर न्याय दिलवाने की बात कही। वहीं डॉ. आंबेडकर मिशनरीज विद्यार्थी एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह डुमोलिया ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी जातिगत शोषण के आधार पर यह घटना बहुत दुखदायी है। मौके पर पूर्ण सिंह चाहलिया, सत्यवीर बहमणी, कैप्टन बलवंत भौरिया, सेवा सिंह, डॉ. रोहतास, साधुराम मेहरा, कृष्ण सिंघल, अमित अहलावत, रिंकू भौरिया, दिलबाग सिंह, केसी बंगालिया, कैप्टन रामेहर, बलिंद्र, दिनेश ओहल्याण, प्रवीण कलसन, अनिल मेहरा, राजेश, राकेश आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

विभागाध्यक्ष का पक्ष
सहायक प्रो. डॉ. विनोद कुमार मेहरा के संबंध में निदेशक व कुलपति को पत्र लिखा है कि वह कभी विभाग में नहीं टिकते। वे कार्य करने की बजाए सारा दिन एसोसिएशन के साथ घूमते हैं। इन्होंने अपने पिछले नौ माह के कार्यकाल में कोई भी अकेडमिक कार्य नहीं किया और न ही कोई इनका पेपर प्रकाशित हुआ है। डॉ. मेहरा अंगूठा व उंगली न होने की वजह से पोस्टमार्टम करने में असमर्थ हैं। वीरवार को राज्य महिला आयोग की चेयरमैन प्रतिभा सुमन व निदेशक शवगृह में आई, लेकिन डॉ. मेहरा एक मिनट के लिए भी मौके पर नहीं गए। जबकि वीरवार को इनकी ड्यूटी थी। स्थिति यह है कि डॉ. मेहरा अपना हेडक्वार्टर तक मेनटेन नहीं करते, ऊपर से कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को चाय-काफी के लिए धमकाते और हैं। इसकी सूचना अथारिटी को दे दी गई है। सरकारी संस्थान में एसोसिएशन की बैठक करना, स्वयं को अवैध रूप से मेडिको लीगल एक्सपर्ट लिखना इनके लिए आम है।
-डॉ. एसके धत्तरवाल, विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसन, पीजीआईएमएस

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