Saturday , October 20 2018
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सुप्रीम कोर्ट: क्यों न दागी को टिकट देने वाली पार्टी का रद्द कर दिया जाए पंजीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्यों न आपराधिक मामला झेलने वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने का टिकट देने वाली राजनीतिक पार्टियों का पंजीकृत रद्द कर दिया जाए। शीर्ष न्यायालय ने सरकार से पूछा कि क्या चुनाव आयोग को ऐसा करने का निर्देश दिया जा सकता है? राजनीति में अपराधीकरण के लिए कोई जगह नहीं होने की बात कहते हुए शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि अपराधमुक्त राजनीति के लिए क्या विधायिका को इस संबंध में कानून बनाने के लिए कहा जा सकता है? अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ये सवाल इस संबंध में दाखिल कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उठाए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि भ्रष्टाचार एक ‘संज्ञा’ है, लेकिन जैसे ही यह राजनीति में  प्रवेश करता है कि यह ‘क्रिया’ बन जाती है। तब कोई एंटीबायोटिक काम नहीं करती।

बता दें कि 8 मार्च, 2016 को एक तीन सदस्यीय पीठ ने ये मसला संविधान पीठ को रेफर किया था। इससे पहले शीर्ष न्यायालय सांसदों-विधायकों पर चल रहे आपराधिक मुकदमों की सुनवाई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर 1 साल के अंदर निपटाने के निर्देश सभी हाईकोर्ट को दे चुका है।

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अदालत की लक्ष्मण रेखा कानून की व्याख्या तक
एक एनजीओ की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि कानून तोड़ने वाले कानून निर्माता नहीं हो सकते। इस पर पीठ ने कहा कि आप चाहते हैं कि हम संसद को इस संबंध में कानून बनाने के लिए कहें। संविधान में सभी के अधिकारों का बंटवारा किया गया है। कानून बनाना विधायिका का काम है न कि अदालत का।

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अदालत की लक्ष्मण रेखा कानून की व्याख्या करने तक सीमित है। इस पर द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2014 में 34 फीसदी से अधिक सांसद व विधायक दागी थे। इस कारण विधायिका इस मसले पर चुप है, इसलिए अदालत को इसमें दखल देना चाहिए।

दोष सिद्ध होने तक सभी निर्दोष : सरकार
केंद्र सरकार ने गंभीर आपराधिक मामले में आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी लगाने का विरोध किया है। केंद्र की तरफ से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि ये मुद्दा संसद के दायरे में आता है। मौजूदा कानून के मुताबिक दोषी साबित होने पर ही चुनाव लड़ने पर पाबंदी है। जब तक किसी आरोपी को अदालत में दोषी नहीं ठहरा दिया जाता, तब तक वह निर्दोष रहता है। ऐसे में उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती।

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