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कांग्रेस की उम्मीदवारी ने आसान बनाई राजग की राह

राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए बृहस्पतिवार को होने वाले चुनाव में हार-जीत का सस्पेंस खत्म हो गया है। बीजेडी के राजग उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह केसमर्थन में आ जाने के बाद इस चुनाव में कांग्रेस की भाजपा को पटखनी देने की योजना पर पानी फिर गया है। राजग के इतर गेमचेंजर माने जाने वाले बीजेडी समेत तीन अन्य दलों अन्नाद्रमुक, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस का समर्थन हासिल कर भाजपा ने कांग्रेस की बची खुची उम्मीदें भी ध्वस्त कर दी हैं।
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दरअसल इस चुनाव की हार जीत का सस्पेंस मंगलवार की रात उस समय खत्म हो गया, जब ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने एनसीपी के मुखिया शरद पवार को विपक्ष के उम्मीदवार को समर्थन करने के मामले में हाथ खड़े कर दिए। पवार ने इस क्रम में टीआरएस के मुखिया के चंद्रशेखर राव का भी मन टटोला, मगर उन्हें यहां भी निराशा हाथ लगी। दोनों ने पवार से कहा कि उन्होंने राजग उम्मीदवार को समर्थन करने का पहले ही वादा कर लिया है। इसके बाद पवार ने अपनी पार्टी की वंदना चौहान को विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार बनाने के प्रस्ताव को नकाराते हुए कांग्रेस को अपना उम्मीदवार उतारने की सलाह दी।

शह-मात के खेल में हारी कांग्रेस

दरअसल भाजपा और कांग्रेस दोनों को पता था कि अगर उसने इस चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा तो यूपीए और राजग के बाहर के दलों का समर्थन हासिल करना मुश्किल होगा। भाजपा ने इस रणनीति के तहत अपनी सहयोगी जदयू के हरिवंश का नाम आगे किया। कांग्रेस ने भी व्यापक विचार विमर्श के बाद एनसीपी की वंदना चौहान को विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनाने की पहल की।

ग्रेस के रणनीतिकारों को लगता था कि एनसीपी उम्मीदवार के बहाने पवार शिवसेना को राजग से तोडने के अलावा  बीजेडी, टीआरएस जैसे दलों का भी समर्थन हासिल कर लेंगे। हालांकि बीजेडी-टीआरएस के कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के नाम पर ना से न सिर्फ कांग्रेस की रणनीति पटरी से उतरी, बल्कि शिवसेना ने भी राजग उम्मीदवार को समर्थन की घोषणा कर दी।

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चुनाव में राजग का गणित
उच्च सदन में राजग के 89 (भाजपा 73, जदयू 6, शिवसेना-अकाली दल 3-3, आरपीआई समेत चार छोटे दल के 4) सदस्य हैं। राजग को तीन मनोनीत और चार निर्दलीय सांसदों के समर्थन से यह संख्या 96 तक पहुंच जाती है। इसके इतर राजग उम्मीदवार को चार दलों (अन्नाद्रमुक 13, बीजेडी 9, टीआरएस 6 और वाईएसआर कांग्रेस 2) के 30 सांसदों का भी समर्थन हासिल है। इस प्रकार यह संख्या 126 हो जाती है जो कि जीत के लिए जरूरी 123 वोटों से 3 ज्यादा है। भाजपा की कोशिश आईएनएलडी का भी समर्थन हासिल करने की है, जिसका उच्च सदन में एक सदस्य है।

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