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पारदर्शी होगी ऑनलाइन कंपनियों की पैसा वापसी नीति

ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय इस पर इसी हफ्ते दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी कर सकता है। इसमें ऑनलाइन कंपनियों को उत्पाद पहुंचाने, वापसी, पैसा वापसी और बदलाव को पारदर्शी बनाने की नीति होगी। निर्देशों पर सभी पक्षों की राय जानकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय इसे सितंबर में अधिसूचित करेगा।
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उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक, नए दिशा-निर्देशों पर कंपनियों, उपभोक्ताओं, संस्थाओं और क्षेत्र के विशेषज्ञों से एक माह में सुझाव मांगे जाएंगे। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हमारा इरादा ग्राहकों को ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी, धोखाधड़ी और ठगी से बचाना है। सुझावों के बावजूद कई बार कंपनियां अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तक स्पष्ट नहीं करती हैं। यहां तक कि उसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है और फिर उसमें छूट दिखाकर बेचा जाता है। यह एक तरह से व्यावसायिक धोखाधड़ी है।

उल्लंघन पर आर्थिक दंड का प्रावधान
अधिकारी का कहना है कि पारदर्शी रवैया अख्तियार करने के निर्देशों का पालन नहीं करने की स्थिति में आर्थिक दंड का प्रावधान होगा, जबकि ग्राहकों को शिकायत के लिए बेहतर व्यवस्था मुहैया कराई जाएगी। तब जाकर संतुलन कायम किया जा सकता है।

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उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा पहले यह तय किया गया था कि उत्पाद के प्रयोग की अंतिम तिथि बड़े शब्दों में स्पष्ट करनी होगी। लेकिन इस मामले में अधिकतर कंपनियां पहले जैसे ढर्रे पर चल रही हैं। निर्देशों में विभिन्न स्तरों पर अनुपालन कड़ाई से करना अनिवार्य होगा, जबकि ऑनलाइन कंपनियों को पैसा वापसी की नीति को पारदर्शी करना होगा। साथ ही कस्टमर केयर को सारी जानकारी ग्राहकों को देनी होगी।

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गौरतलब है कि नए निर्देशों के तहत कंपनियों को तय समय में शिकायतों का निपटारा करना होगा। कंपनियों को छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी शिकायत को 45 दिन के भीतर निपटाना होगा। ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायतों में 2017-18 में 42 फीसदी का इजाफा हुआ है।

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