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12 साल बाद पेप्सीको के सीईओ पद से हटेंगी इंदिरा नूयी

पेप्सिको की भारतीय मूल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) इंद्रा नूयी तीन अक्तूबर को अपना पद छोड़ेंगी। वह पिछले 12 साल से अमेरिका की इस प्रमुख फूड और बेवरेज कंपनी की अगुवाई कर रही हैं। कंपनी ने आज यह घोषणा की।
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नूयी  3 अक्तूबर को कंपनी के सीईओ का पद छोड़ेंगी। वह पिछले 24 साल से इस कंपनी से जुड़ी हैं। हालांकि वह 2019 की शुरुआत तक कंपनी की चेयरमैन रहेंगी।  कंपनी के अध्यक्ष रामोन लागुआर्ता को निदेशक मंडल ने नूयी का उत्तराधिकारी चुना है। लागुआर्ता को कंपनी के निदेशक मंडल में भी शामिल किया गया है।

नहीं सोचा था पेप्सीको का सीईओ बनना
नूयी ने बयान में कहा, ‘‘मैं भारत में पली बढ़ी हूं। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मुझे ऐसी असाधारण कंपनी की अगुवाई करने का मौका मिलेगा।’’ नूयी ने कहा कि कंपनी काफी मजबूत स्थिति में है और आगे उसके काफी बेहतर दिन आएंगे।

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2006 में बनी थी सीईओ
नूयी 2006 में कंपनी की पहली महिला सीईओ बनी थी। अब अक्टूबर में वो इस पद से विदा लेंगी। हालांकि इसके बाद भी वो कंपनी से जुड़ी रहेंगी।

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पिछले 22 साल से कंपनी से जुड़े लागुआर्ता सितंबर से अध्यक्ष पद पर हैं। वह वैश्विक परिचालन, कॉरपोरेट रणनीति, सार्वजनिक नीति तथा सरकारी मामलों से संबंधित कामकाज देख रहे हैं। इससे पहले लागुआर्ता यूरोप ओर उप सहारा अफ्रीका खंडों की अगुवाई कर चुके हैं।

कंपनी ने कहा कि नूयी के जाने के बाद पेप्सिको की नेतृत्व वाली शेष टीम में कोई बदलाव नहीं होगा। सीएनबीसी की खबर के अनुसार नूयी के संदर्भ में घोषणा के बाद कंपनी के शेयर मूल्य में मामूली गिरावट आई।

चेन्नई में हुआ था जन्म
इंदिरा नूयी का जन्म चेन्नई में 1955 में हुआ था। उनके पिता स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और दादा जिला जज थे। उन्होंने मैनेजमेंट का कोर्स आईआईएम-कलकत्ता से पूरा किया। वर्ष 2001 में इंदिरा ने सीएफओ के तौर पर पेप्सिको ज्वाइन की है, तब से लेकर अब तक पेप्सिको का मुनाफा 2.7 बिलियन डॉलर से बढ़कर  6.5 बिलियन डॉलर हो गया है।

इंदिरा ने पेप्सिको ज्चाइन करने से पहले कई महत्वपूर्ण पदों पर बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप,आसिया ब्राउन बोवेरी,मोटोरोला,जॉनसन एंड जॉनसन और मेटुर बर्डसेल शामिल है। इंदिरा को टाइम मैगजीन में ‘दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची’ में 2007 और 2008 में जगह दी गई। उनकी इस उपलब्धि से देश का नाम ऊंचा हुआ।

पद्म विभूषण से हो चुकीं है सम्मानित
वर्ष 2007 में भारत सरकार ने इंदिरा को पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा था। इंदिरा गर्ल्स बैंड में लीड गिटारिस्ट के तौर पर अपना सहयोग देती थीं। वह ज्यादा पैसे कमाने के लिए कब्रिस्तान में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्य करती थीं। वहां उन्हें 50 सेंट मिलते थे। इंदिरा को कैरोके गाने का बहुत शौक है,इसलिए उन्होंने घर पर एक मशीन भी लगा रखी है।

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