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चुप्पी पर नीतीश ने दिया जवाब, विपक्ष पर कसा तंज

बिहार के मुजफ्फ्रपुर में स्थित बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ यौन शोषण होने की घटना पर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष लगातार इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साध रही है। सोमवार को इस मसले पर कुमार ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि इस घटना पर राजनीति हो रही है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से वह शर्मसार हैं और उनकी सरकार हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग कर रही है।


नीतीश ने मुजफ्फरपुर घटना के विरोध में विपक्ष द्वारा जंतर-मंतर पर किए गए धरने पर भी निशाना साधा। उन्होंने जेडीयू के पूर्व नेता शरद यादव को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि धरने में बैठे लोग इतने संवेदनशील मसले पर हंस रहे थे। महिलाओं के खिलाफ अपशब्द बोलने वाले नेता हाथों में मोमबत्ती लेकर मार्च कर रहे थे। उन्होंने इस मसले पर सामने आ रही अपनी सरकार की मंत्री मंजू वर्मा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने ही इस मामले की जांच कराई थी। उन्होंने कहा, ‘मेरी चुप्पी का गलत मतलब निकाला गया है। हमने हाईकोर्ट से इस मामले की जांच उनकी निगरानी में कराने की मांग की है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) की रिपोर्ट के बाद हमने एक्शन लेना शुरू कर दिया है। सरकार द्वारा प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। हमने इस घटना की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए हैं।’

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मुख्यमंत्री नीतीश ने इस मामले में अपनी मंत्री मंजू वर्मा का नाम आने का बचाव करते हुए कहा, ‘मंत्री ने मुझसे मिलकर सफाई दी है। मैंने जो पूछा उसका मंत्री ने जवाब दिया। किसी को बेवजह कैसे जिम्मेदार ठहराया जाए। मंत्री के स्तर पर कोई निर्णय हुआ होगा तो उसपर भी कार्रवाई करेंगे। लेकिन यह कहना कि मंत्री को हटा दें यह सही नहीं होगा। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।’ मंत्री को लेकर भाजपा और जेडीयू में दरार आ गई है। सीपी ठाकुर और गोपाल नारायण सिंह वर्मा को हटाने की मांग कर रहे हैं।

विपक्ष के धरने पर निशाना साधते हुए कुमार ने कहा, ‘राजनीतिक हमला किया जा रहा है। समय आएगा तो इधर से भी जवाब मिलेगा और तब बात समझ में आएगी। इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर आयोजित धरने में लोग हंस रहे थे। कौन-कौन लोग उस कैंडल मार्च में शामिल थे। महिलाओं के प्रति अपशब्द बोलने वाले नेता भी इसमें शामिल थे। उनके अपशब्द के कारण उनकी काफी आलोचना हुई थी।’ बिना शरद यादव का नाम लिए उन्होंने कहा, ‘परकटी कहा था न? ऐसे लोग भी कैंडल मार्च में शामिल थे। कोई भी सरकार रहे इस तरह की घटना कहीं भी हो सकती है। हम कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। कोई समझौता नहीं कर रहे हैं। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।’

बालिका गृह के आरोपी ब्रजेश कुमार ठाकुर के साथ अपनी, उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव की तस्वीर पर नीतीश कुमार ने सफाई दी। उन्होंने कहा, ‘वह (ब्रजेश) पत्रकार भी था। किसी भी व्यक्ति की तस्वीर किसी के साथ हो सकती है। इसपर बवाल किया जा रहा है। जितने लोग अब बोल रहे हैं कि उन्हें घटना की जानकारी थी तो पहले क्यों नहीं बताया।’
घटना को शर्मसार बताते हुए नीतीश कुमार ने कहा, ‘घटना के बारे में मैं बहस नहीं करना चाहता हूं। यह शर्मसार करने वाली घटना है। पूरे सिस्टम में ही गड़बड़ी है। समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव ने ही इस पूरे मामले की जांच करवाया था। जिसे जो बोलना है बोले, हमलोग इस तरह की घटना से चिंतित हैं। हम शेल्टर होम की जिम्मेदारी एनजीओ को देने के खिलाफ हैं। मैंने समाज कल्याण विभाग को सलाह दी है कि ऐसे शेल्टर होम की निगरानी और संचालन राज्य सरकार द्वारा हो। यह काम चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।’

वहीं लोकसभा में आज मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामला जोरदार ढंग से उठा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि महिलाओं एवं लड़कियों पर अत्याचार को कोई भी सहन नहीं कर सकता है, साथ ही सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की जांच की ठीक तरह से निगरानी हो। शून्यकाल में कांग्रेस की रंजीत रंजन और राजद के जयप्रकाश नारायण यादव ने सदन में इस विषय को उठाया। इस विषय पर शोरशराबे के कारण सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये साढ़े 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

साढ़े 12 बजे बैठक दोबारा शुरू होने पर अध्यक्ष ने कहा कि जयप्रकाश नारायण यादव और रंजीत रंजन ने जो विषय उठाया है, वह केवल उनका मामला नहीं है बल्कि यह सभी का विषय है। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार को कोई भी सहन नहीं कर सकता है। सरकार ने भी इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया है।’ सुमित्रा महाजन ने कहा कि सदस्यों ने जो विषय उठाया है, उस संदर्भ में वह कहना चाहती हैं कि सीबीआई सही तरीके से जांच करे और ठीक तरीके से निगरानी हो। वह सरकार से यही आग्रह कर सकती हैं।

बता दें कि भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर ने मांग की है कि सीबीआई जांच होने तक बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा से इस्तीफा ले लेना चाहिए। लेकिन वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने मंजू वर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि भाजपा पूरी तरह से मंजू वर्मा के समर्थन में है। उन्होंने कहा कि मंजू के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। साथ ही भाजपा ने कहा कि हम सीपी ठाकुर को गंभीरता से नहीं लेते हैं।

सीपी ठाकुर के इस बयान के बाद राजनीति तेज हो गई है। इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इससे पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो पत्र लिखे हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी पत्र लिखा है। इस पर जदयू के एक नेता कहा हैं कि राजभवन को कलम उठाने की पठकथा कहीं और लिखी गई है। इसके पीछे बिहार भाजपा नहीं है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह सब दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में हुआ हो। बता दें कि राज्यपाल के पत्र लिखने के बाद से ही यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

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