Sunday , November 18 2018
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मार्केट में आखिर कैसे पैदा हो रही है ऑक्सिटोसिन की किल्लत

ऑक्सिटोसिन पर आकस्मित बैन लगने से अस्पताल, दवा कंपनी  डॉक्टरों में एक हलचल सी मच गई है आने वाले दिनों में अस्पतालों में ऑक्सिटोसिन की बहुत ज्यादा कमी देखने को मिल सकती है  इसकी काला बादारी भी बढ़ सकती है , ऐसे इशारा मिल रहे हैं !डिलीवरी के दौरान ऑक्सिटोसिन का कोई विकल्प अब तक नहीं बना है ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि बगैर किसी तैयारी  विकल्प के कैसे गवर्नमेंट ने इसके इस्तेमाल, इंपोर्ट  मैन्यूफ्रेक्चरिंग पर रोक लगा दी  क्या एक कंपनी बाज़ार की मांग पूरी कर पाएगी ! क्योंकि केएपीएल (karnataka antibiotic pharmaceutical limited) ने बताया की उनके पास प्राइवेट अस्पतालों से अब तक एक भी आरडर नहीं आया है!

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दरअसल, केंद्रीय सेहत एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 27 अप्रैल, 2018 को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की सार्वजनिक बिक्री पर बैन के लिए एक नोटिस जारी हुआ था जिसके तहत 1 जुलाई, 2018 को इस दवाई को बैन किया जाना था हालांकि शासन ने सभी प्राइवेट स्टोर्स संचालकों को स्टॉक समाप्त करने के अब एक सितंबर तक की मोहलत दे दी है लेकिन जब हमने कुछ अस्पतालों से बात की तो पता चला कि उनके पास स्टॉक ज्यादा नहीं है  कर्नाटक की जिस कंपनी ने इसकी मैन्यूफ्रेक्चरिंग का कार्य लिया है वो जुलाई के मध्य से इसे बनाना प्रारम्भ कर चुकी है लेकिन इस दौरान कई बड़े अस्पतालों में जहां गाईनी वार्ड है वहां इसकी किल्लत अभी से दिखने लगी है

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क्योंकि नयी मैन्यूफ्रेक्चरिंग नहीं हो रही  जो स्टॉक पड़ा था वो कभी भी समाप्त हो सकता हैसप्लाई  चेन में बड़ा ग़ैप होगा आने वाले दिनों में ! हेल्थकेयर एट होम के सीओओ चिकित्सकगौरव ठुकराल बताते हैं कि एक कंपनी कैसे 125 कंपनियों जितना प्रोडक्शन दे पाएगी मार्केट में इसका कोई विकल्प नहीं है  जितना भी स्टाक है वो कुछ महीनों के भीतर समाप्त हो  जाएगाउसके बाद क्या होगा, भले ही कंपनी ने प्रोडक्शन प्रारम्भ कर दिया है लेकिन सप्लाई  डिमांड का गैप जरूर होगा गांव तक ये पहुंचने में बहुत वक्त लगेगा

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ये है नया नियम
पब्लिक  प्राइवेट सेक्टर्स के रजिस्टर्ड अस्पतालों  क्लीनिक्स में मैन्यूफैक्चर्स कंपनी से डायरेक्ट सप्लाई मंगवाई जाएगी जनऔषधि केंद्र सीधे शासन से जुड़े हैं इसलिए इन सेंटर्स पर भी ऑक्सीटोसिन बेचने के लिए अनुमति मिलेगी किसी भी नाम से ऑक्सीटोसिन को प्राइवेट कैमिस्ट नहीं बेच सकेंगे सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को भी यह इंजेक्शन मंगवाने के लिए कंपनी को वाजिब कारण  पूरा रिकार्ड देना होगा केएपीएल ने प्रोडक्शन प्रारम्भ कर दी है ! अब तक 18 lakh ampules बन चुकी है अगस्त तक 50 lakh की उम्मीद है

गर्भवती स्त्रियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है
गर्भवती स्त्रियों के लिए ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है रक्तस्राव होने, बिना ऑपरेशन के डिलीवरी  निर्बल दर्द के लिए इसका प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसे गलत तरीके से प्रयोग पर यह स्वास्थ्य के लिए नुकसान देह भी है गाईनी चिकित्सक खुद कहते हैं कि पर्याप्त मात्रा में इसके प्रयोग से कोई नुकसान नहीं होता है दरअसल ऑक्सीटोसिन की कई बार कुछ कम जानकार ज्यादा डोज दे देते हैं, जिनसे गर्भवती स्त्रियों को खतरा होता है एक एमएल की डोज को भी पांच हिस्सों में बांटकर  वह भी गर्भवती की लगातार मॉनिटरिंग के बाद ही दिया जाता है यही नहीं वर्ष 2016 में हिमाचल प्रदेश हाई न्यायालय ने भी डेयरी उत्पादों में इसके गैरकानूनी प्रयोग की वजह से इसपर रोक का आदेश दिया था

डॉक्टर (गाईनी) रुबी सेहरा ने बोला कि इसके बगैर हम डिलीवरी रूम की कल्पना भी नहीं कर सकते हैँ इसका प्रयोग अगल सही मात्रा में किया जाए तो ये गलत नहीं है डेयरी में इसका गलत प्रयोगहोता है हमें ब्लिडिंग रोकने के लिए इसे यूज करना ही होता है राष्ट्र में करीब 125 व्यक्तिगतफार्मा कंपनियां ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का निर्माण करती थीं व्यक्तिगत कंपनियों को ऑक्सीटोसिन के निर्माण संबंधी रॉ मैटेरियल सप्लाई पर भी रोक लगा दी गई है

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