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चोरी करने पर मिलती है 5 बोतल शराब देने की सजा

पिछले सप्ताह जब दालू बिरहोर का अपने एक पड़ोसी के साथ झगड़ा हो गया था तक उनके समुदाय के प्रमुख ने उन्हें दोषी ठहराया और उन्हें दो बोतल हरिया (स्थानीय शराब) का जुर्माना भरने का आदेश दिया। एक महीने पहले, राखा बिरहोर (18) को भी एक ग्रामीण का सामान चुराने पर दो मुर्गी और तीन बोतल हरिया का जुर्माना भरना पड़ा था।
जी, हां… यह है झारखंड का चलकारी गांव, जहां सामुदायिक अदालत में दोषी ठहराये जाने के बाद बिरहोर आदिवासी समुदाय के सदस्य जुर्माने के तौर पर देशी शराब भेंट करते हैं। यह गांव धनबाद जिले में पड़ता है।

टोपचाची के प्रखंड विकास पदाधिकारी विजय कुमार ने बताया कि आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूर्वजों द्वारा बनाए गये नियमों का पालन करते हैं। उन्होंने बताया, ‘बिरहोर समुदाय के सदस्य आमतौर पर अपने मामलों को लेकर जिला प्रशासन या अदालतों का रुख नहीं करते। वे इसे आपस में ही सुलझाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कोई भी व्यक्ति सामुदायिक अदालत के फैसले को न तो चुनौती देता है और ना ही विरोध करता है।’

राका बिरहोर ने अपनी परंपराओं पर गर्व करते हुये कहा कि समुदाय के नियमों और मानदंडों से उन्हें वर्षों से शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि अपराध की प्रकृति के आधार पर ही व्यक्ति को सजा सुनायी जाती है।

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उन्होंने बताया, ‘अगर एक व्यक्ति झगड़े का दोषी पाया जाता है तो उसे दो बोतल हरिया का जुर्माना भरना पड़ता है। चोरी के मामले में सजा पांच बोतल और गंभीर अपराधों में 10 बोतल हरिया देने की सजा भी हो सकती है।’

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