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मोटापे की गिरफ्त में है दिल्ली के इस स्कूल के 30 फीसदी बच्चे

दिल्ली के व्यक्तिगत स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 30 फीसदी बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं10 से 18 आयु वर्ग के लगभग 10 फीसदी बच्चों डायबिटीज जैसी बीमारी से पीड़ित हैं एक सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा हुआ है सर्वेक्षण के मुताबिक जो डायबिटीज से ग्रस्त हैं उनमें से कई प्री-डायाबेटिक  हाइपरटेंसिव या अतिसंवेदनशील स्थितियों से पीड़ित हैं सर्वेक्षण के मुताबिक, ‘शहर की कई स्कूल कैंटीनों में अस्वास्थ्यकर भोजन जैसे डीप फ्राई किए हुए स्नैक्स  अधिक चीनी वाले पेय पदार्थ सर्व किए जाते हैं उनमें से ज्यादातर अपने विद्यार्थियों की खाने-पीने की आदतों से भी अनजान हैं’

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हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ के के अग्रवाल ने कहा, ‘बचपन का मोटापा आज की एक वास्तविकता है जिसमें दो सबसे प्रमुख कारक हैं- असंतुलित आहार  बैठे रहने वाली जीवनशैली बच्चों समेत समाज के 30 फीसदी से अधिक लोगों में पेट का फैट की चर्बी हैअधिकतर बच्चे हफ्ते में कम से कम एक या दो बार बाहर खाते हैं साथ ही भोजन करने के दौरान हाथ में एक न एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पकड़े रहते हैं’

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डॉ अग्रवाल ने कहा, ‘हालांकि इन दशा के बारे में माता-पिता जागरूक हैं लेकिन समस्या का निवारण करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा रहा है बड़ों को वैसा व्यवहार करना चाहिए जो वे अपने बच्चों में देखना चाहते हैं स्वस्थ बचपन स्वस्थ ज़िंदगी का एकमात्र आधार है’ संसार में चाइना के बाद हिंदुस्तान में मोटापे से पीड़ित बच्चे सबसे अधिक हैं सामान्य वजन वाला फैट की चर्बी समाज की एक नई महामारी है इसमें एक आदमी मोटापे से ग्रस्त हो सकता है, भले ही उसके बॉडी का वजन सामान्य सीमा के भीतर है पेट के चारों ओर फैट का एक अलावा इंच दिल की बीमारीकी आसार को 1.5 गुना बढ़ा देता है

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डॉ अग्रवाल ने बताया कि, ‘तंबाकू उत्पादों पर चेतावनी के निशानों के अभियान की तर्ज पर उन सभी फूड पैकेटों पर भी लाल निशान छापा जाना चाहिए जिनमें निर्धारित मात्रा से अधिक चीनी, कैलोरी, नमक  सेचुरेटेड फैट मौजूद है इससे खाने या खरीदने वाले को पहले से पता चल जायेगा कि इस फूड आइटम में वसा, चीनी  नमक की मात्रा अस्वास्थ्यकर स्तर में है’

डॉ अग्रवाल ने कुछ सुझाव देते हुए कहा, ‘शुरुआत से ही बच्चों को स्वस्थ भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए पसंदीदा व्यंजनों को हैल्दी तरीके से बनाने का कोशिश करें कुछ परिवर्तनकरके स्नैक्स को भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा किया जा सकता है बच्चों को अधिक कैलोरी वाले भोजन का लालच न दें उन्हें ट्रीट देना तो अच्छा है लेकिन संयम के साथ साथ ही, अधिक वसा चीनी या नमकीन स्नैक्स कम करके’

उन्होंने कहा, ‘माता-पिता को बच्चों को होने का महत्व समझाना चाहिए बच्चों के बैठने का समय कम भी कम करना चाहिए ज्यादा से ज्यादा बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी में करने को प्रोत्साहित करना चाहिए पढ़ना एक अच्छा विकल्प है, लेकिन स्क्रीन पर अधिक समय लगाना उचित नहीं हैबच्चों को व्यस्त रखने के लिए बाहर की मजेदार गतिविधियों की योजना बनाएं  उनका स्क्रीन टाइम बदलें’

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