Saturday , November 17 2018
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दिल पर पत्थर रखकर इस नरक में आती हैं लड़कियां

दिल्ली की एक सड़क है, जिसका नाम सुनते ही लोगों की भौंहें तन जाती हैं  वे दबी जुबान में हैं स्कूल में जब मैंने पहली बार इसके बारे में सुना था, तो कौतूहल था कि आखिर कैसी होगी यह सड़क? फिल्मों में अक्सर देखे गए कोठे याद आने लगते थे याद आती थी मर्दो को लुभाने वाली सेक्स वर्कर्स, जिस्म की मंडी चलाने वाली कोठे की मालकिन  न जाने क्या-क्या यही कौतूहल इतने वर्षों बाद मुझे जी बी रोड खींच लाया बीते रविवार प्रातः काल आठ बजे जब मैं जीबी रोड पहुंची, तो यह सड़क दिल्ली की अन्य सड़कों की तरह आम ही लगी सड़क के दोनों ओर दुकानों के शटर लगे हुए थे इन दुकानों के बीच से ही सीढ़ी ऊपर की ओर जाती हैं  सीढ़ियों की दीवारों पर लिखे नंबर कोठे की पहचान कराते हैं कुछ लोग सड़कों पर ही चहलकदमी कर रहे हैं  हमें हैरानी भरी नजरों से घूर रहे हैं हमने तय किया कि कोठा नंबर 60 में चला जाए

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एक शख्स तय करता है लड़कियों  सेक्स वर्कर का रेट
एनजीओ में कार्य करने वाले अपने एक मित्र के साथ फटाफट सीढ़ियां चढ़ते हुए मैं ऊपर पहुंची, चारों तरफ सन्नाटा था शायद सब सो रहे थे, आवाज दी तो पता चला, सब सो ही रहे हैं कि तभी अचरज भरी नजरों से हमें घूरता एक शख्स बाहर निकला बड़े मान-मनौव्वल के बाद बताने को तैयार हुआ कि वह राजू (बदला हुआ नाम) है, जो बीते नौ वर्षों से यहां रह रहा है  लड़कियों (सेक्स वर्कर्स) का रेट तय करता है

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पहचान उजागर न करने की शर्त के साथ राजू ने एक सेक्स वर्कर सुष्मिता (बदला हुआ नाम) से हमारी मुलाकात कराई, जिसे जगाकर उठाया गया था मैं सुष्मिता से अकेले में बात करना चाहती थी, लेकिन राजू को शायद भय था कि कहीं वह कुछ ऐसा बता न दे, जो उसे बताने से मना किया गया है

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नौकरी का झांसा देकर इस धंधे में धकेली गई सुष्मिता
सुष्मिता की आयु 23 वर्ष है  उसे तीन वर्ष पहले जॉब का झांसा देकर पश्चिम बंगाल से दिल्ली लाकर यहां बेच दिया गया था सुष्मिता अच्छा से हिंदी नहीं बोल पाती, वह कहती है, “मैं पश्चिम बंगाल से हूं, मेरा परिवार बहुत गरीब है एक पड़ोसी का हमारे घर आना-जाना था उसने कहा, दिल्ली चलो वहां बहुत नौकरियां हैं तो उसके साथ दिल्ली आ गई एक दिन तो मुझे किसी कमरे में रखा  अगले दिन यहां ले आया ” यह पूछने पर कि क्या वह अपने घर लौटना नहीं चाहती है? बहुत ज्यादा देर चुप रहकर वह कहती है, “नहीं घर नहीं जा सकती बहुत मजबूरियां हैं यहां खाने को मिलता है, कुछ पैसे भी मिल जाते हैं, जो छिपाकर रखने पड़ते हैं ”

सुष्मिता बीच में ही कहती है, “किसी को बताना मत” इससे आगे कुछ पूछने की हिम्मत की नहीं हुईसुष्मिता है तो 23 की, लेकिन उसका बॉडी देखकर लगता है कि जैसे 15 या 16 की होगी, दुबली-पतली कुपोषित लगती है

एक कोठे पर रहते हैं 13-14 लोग
इमारत की पहली  दूसरी मंजिल पर जिस्मफरोशी का धंधा चलता है इच्छी हुई कि इन कमरों के अंदर देखा जाए कि यहां कैसे रहते हैं? अंदर घुसी की एक अजीब सी गंध ने नाक ढकने को मजबूर कर दिया इतने छोटे  नमीयुक्त कमरे हैं, सोचती रही कि कोई यहां कैसे रह सकता है

राजू बताता है कि एक कोठे में 13 से 14 सेक्स वर्कर हैं  सभी अपनी मर्जी से धंधा करती हैं लेकिन गीता (बदला हुआ नाम) की बात सुनकर लगा कि ये मर्जी में नहीं मजबूरी में धंधा करती हैं गीता कहती है, “जैसे आप जॉब करके पैसे कमाती हो वैसे ही ये हमारी जॉब है आप बताइए, हमारी क्या समाज में इज्जत है, कौन हमें जॉब देगा जिस्म बेचकर ही हम अपना घर चला रहे हैं बेटी को पढ़ा रही हूं, ये छोड़ दूंगी तो बेटी का क्या होगा ”

एक वर्ष में तीन कोठे बदल चुकी है गीता
गीता कहती है कि वो एक वर्ष में तीन कोठे बदल चुकी है वजह पूछने पर कहती है, “पैसे अच्छे नहीं मिलेंगे तो कोठा तो बदलना पड़ेगा ना ” गीता की ही दोस्त रेशमा (बदला हुआ नाम) कहती है, “हम जैसे हैं, खुश हैं गवर्नमेंट हमारे लिए क्या कर रही है हमारे पास ना राशन कार्ड है, ना वोटर कार्ड ना आधार हमारे पास कोई वोट मांगेन भी नहीं आता गवर्नमेंट ने हमारे लिए क्या किया कुछ नहीं ” जेहन में ढेरों सवाल लेकर एक  कोठे पर गई, जहां 15 से लेकर 19 वर्ष की कई सेक्स वर्कर मिली, जो शायद रातभर की थकान के बाद देर प्रातः काल तक सो रही हैं

रात आठ बजे से जीबी रोड का माहौल बदल जाता है
जी बी रोड का पूरा नाम गारस्टिन बास्टियन रोड है, जहां 100 वर्ष पुरानी इमारतें भी हैं जगह-जगह दलालों के झांसे में नहीं आने  जेबकतरों  गुंडों से सावधान रहने की चेतावनी लिखी हुई हैइसके बारे में राजू कहते हैं, “रात आठ बजे के बाद यहां का माहौल बदल जाता है कोठे पर आने वालों की संख्या बढ़नी प्रारम्भ हो जाती है अकेले आने वाले शख्स को जेबकतरे लूट लेते हैं, चाकूबाजी की भी कई वारदातें हुई हैं ”

यहां आकर लगता है कि एक शहर के अंदर कोई  शहर है जिस्मफरोशी के लिए यहां लाई गई या यहां खुद अपनी मर्जी से पहुंचीं औरतों की जिंदगी दोजख से कम कतई नहीं है अपने साथ कई सवालों के जवाब लिए बिना वापस जा रही हूं, इस उम्मीद में कि जल्द लौटकर जवाब बटोर लूंगी

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