Wednesday , September 19 2018
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सुप्रीम न्यायालय में 6 अगस्‍त को होने वाली सुनवाई टली

जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को विशेष दर्जा देने वाले  राज्य के स्थाई निवासी की परिभाषा देने वाले के मामले में सोमवार को सुप्रीम न्यायालय में होने वाली सुनवाई टल सकती हैक्योंकि जम्मू व कश्मीर गवर्नमेंट ने सुनवाई टालने की मांग को लेकर अर्जी दायर की है राज्य गवर्नमेंट ने सुनवाई टालने के पीछे प्रदेश में होने वाले पंचायत  लोकल चुनाव का हवाला दिया हैहालांकि सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ में सोमवार के लिए मामला सूचीबद्ध है लेकिन राज्य गवर्नमेंट की मांग पर सोमवार को सुप्रीम न्यायालय सुनवाई टाल सकता है

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दरअसल, इस अनुच्छेद को भेदभाव  समानता के अधिकार का हनन करने के आधार पर सुप्रीम न्यायालय में चुनौती दी गई थी है बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अनुच्छेद 35ए को चुनौती देते हुए बोला गया है कि ये राज्य  राज्य के बाहर के निवासियों मे भेदभाव करता है जम्मू व कश्मीर की लड़कियों  लड़कों में भी भेदभाव करता है जम्मू व कश्मीर की लड़की अगर दूसरे राज्य के पुरुष से विवाह करती है तो उसके बच्चों का पैतृक संपत्ति मे हक नहीं रहता जबकि राज्य के लड़के अगर बाहर की लड़की से विवाह करते हैं तो उनके बच्चों का हक ख़त्म नहीं होता

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अनुच्‍छेद 35ए को दी गई है चुनौती 
अनुच्‍छेद 35ए की संवैधानिक वैलिडिटी को याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई है एनजीओ ‘वी द सिटीजन’ ने मुख्‍य याचिका 2014 में दायर की थी इस याचिका में बोला गया है कि इस अनुच्छेद के चलते जम्मू व कश्मीर के बाहर के इंडियन नागरिकों को राज्य में संपत्ति खरीदने का अधिकार नहीं है वहीं न्यायालय में दायर याचिका पर अलगाववादी नेताओं ने एक सुर में बोला था कि अगर न्यायालय राज्य के लोगों के हितों के विरूद्ध कोई निर्णय देता है, तो जनता आंदोलन के लिए तैयार हो जाए

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क्या है आर्टिकल 35A 
यह कानून 14 मई 1954 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की ओर से लागू किया गया था आर्टिकल 35ए जम्मू  कश्मीर के संविधान में शामिल है, जिसके मुताबिक राज्य में रहने वाले नागरिकों को कई विशेषाधिकार दिए गए हैं साथ ही राज्य गवर्नमेंट के पास भी यह अधिकार है कि आजादी के वक्त किसी शरणार्थी को वह राज्य में सहूलियतें दे या नहीं आर्टिकल के अनुसार, राज्य से बाहर रहने वाले लोग वहां जमीन नहीं खरीद सकते, न ही हमेशा के लिए बस सकते हैं इतना ही नहीं बाहर के लोग राज्य गवर्नमेंट की स्कीमों का फायदा नहीं उठा सकते  ना ही गवर्नमेंट के लिए जॉब कर सकते हैंकश्मीर में रहने वाली लड़की अगर किसी बाहर के शख्स से विवाह कर लेती है तो उससे राज्य की ओर से मिले अधिकार छीन लिए जाते हैं इतना ही नहीं उसके बच्चे भी हक की लड़ाई नहीं लड़ सकते

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