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मोदी सरकार ने सोशल मीडिया हब बनाने का छोड़ा इरादा

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया हब बनाने का प्रस्ताव वापस ले लिया है. सरकार ने गुरुवार को ये जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी. सरकार की तरफ से कहा गया है कि वो सोशल मीडिया पॉलिसी की समीक्षा करेगी.

सरकार के प्रस्तावित सोशल मीडिया हब को लेकर आरोप लगाए गए थे कि ये लोगों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखने का हथियार बन सकता है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने केंद्र की दलील को सुना. पीठ ने इसके बाद प्रस्तावित सोशल मीडिया हब को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि सरकार अपनी सोशल मीडिया पॉलिसी की पूरी तरह समीक्षा करेगी.

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टीएमसी विधायक की याचिका पर हो रही थी सुनवाई

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पीठ तृणमूल कांग्रेस की विधायक महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि केंद्र की सोशल मीडिया हब पॉलिसी को सोशल मीडिया एक्टिविटी पर निगरानी रखने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी लताड़

सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को सरकार को जमकर लताड़ लगाई थी. कोर्ट ने ये पूछा था कि क्या सरकार लोगों के WhatsApp मैसेज टैप करना चाहती है. सोशल मीडिया हब के गठन के फैसले पर कोर्ट ने कहा है ये ‘निगरानी राज बनाने जैसा’ होगा. इससे पहले 18 जून को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया था जिसमें सोशल मीडिया कम्यूनिकेशन हब बनाने के केंद्र सरकार के कदम पर रोक लगाने की मांग की गई थी जो डिजिटल और सोशल मीडिया की चीजों को इकट्ठा कर उसका विश्लेषण करेगा.

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