Wednesday , September 19 2018
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इमरान खान ने नवजोत सिंह सिद्धू की उप-कप्तानी में हिंदुस्तान के विरूद्ध जीता मैच

आज से अच्छा 13 दिनों के बाद यानी 15 अगस्त को आज़ादी की 71वीं सालगिरह मनाई जाएगी आप अगले दो हफ्तों को हिंदुस्तान का Independence Week भी कह सकते हैं लेकिन इस वक्त हमारे राष्ट्र में चर्चा का विषय ये नहीं है, कि 15 अगस्त को हिंदुस्तान को आज़ाद हुए 71 वर्ष पूरे हो जाएंगे बल्कि चर्चा का विषय ये है, कि इमरान ख़ान के शपथग्रहण समारोह में कौन-कौन जाएगा ? पिछले दो दिनों से इस बात पर बहस हो रही है, कि इमरान खान किसे बुलाएंगे, किसे नहीं ?  जिसे बुलाएंगे, वो पाक जाएगा या नहीं ? इन चर्चाओं के बीच जिन्हें इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण मिला है, वो खुश है  जिन्हें ये निमंत्रण नहीं मिला है, वो थोड़े मायूस हैं

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इस बीच इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी  कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू अपनी खुशी छुपा नहीं पा रहे हैं क्योंकि, इमरान ख़ान ने उन्हें Private Invitation भेजा है,  बोला है कि आना ज़रुरएक प्रकार से ये इमरान ख़ान का सियासी बाउंसर है जिसे नवजोत सिंह सिद्धू को छोड़ देना चाहिए था लेकिन, क्रिकेट के ज़माने वाली यारी के चक्कर में सिद्धू ने इमरान ख़ान का बाउंसर अपने सीने पर ले लिया है  इमरान ख़ान की तारीफ़ों के चौके  छक्के लगाने प्रारम्भ कर दिए हैं ये मैच किसी क्रिकेट स्टेडियम में नहीं बल्कि पॉलिटिक्स की पिच पर खेला जा रहा है सिद्धू ने हिंदुस्तान की तरफ से 19 वर्ष पहले, 1999 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था 19 साल बहुत लंबा समय होता है इस दौरान इमरान ख़ान  नवजोत सिंह सिद्धू, दोनों ही खिलाड़ी से नेता  फिर नेता से मंझे हुए नेता बन चुके हैं  पॉलिटिक्स की पिच पर खेलना भी सीख गए हैं

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आज पत्रकारों से वार्ता के दौरान उन्होंने इमरान खान के लिए कई आदरसूचक शब्दों का प्रयोगकिया उदाहरण के तौर पर उन्होंने इमरान ख़ान को चरित्रवान बताया उन्हें Khan Sahab कहकर संबोधित किया  बोला कि वो Man Of Character हैं उनपर आंख बंद करके भरोसा किया जा सकता है वो उम्मीद का सूरज हैं वगैरह वगैरह सिद्धू की बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, कि वो पाक की तरफ से कोई क्रिकेट मैच जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए हों  अपनी टीम के कप्तान की तारीफ कर रहे हों आप ये भी कह सकते हैं, कि इमरान ख़ान की कप्तानी में पाक ने 26 वर्ष पहले क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीता था  आज नवजोत सिंह सिद्धू की उप-कप्तानी में उन्होंने हिंदुस्तान के विरूद्ध मैच जीत लिया सबसे पहले आप इमरान ख़ान के प्रति नवजोत सिंह सिद्धू का प्यार देखिए

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कुछ दिन पहले ही हमने आपको ये जानकारी दी थी, कि जब इमरान ख़ान, हिंदुस्तान के विरूद्धक्रिकेट खेला करते थे, तो उनका खून खौलता था क्योंकि, मैच के दौरान उन्हें कश्मीर की याद आती थी  ये सिर्फ सुनी सुनाई बात नहीं है इमरान ख़ान ने कई मौकों पर साक्षात्कार के दौरान ये बात स्वीकार की है, कि हिंदुस्तान  पाक के बीच क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि युद्ध हुआ करते थे आज हिंदुस्तान के कई बुद्धीजीवियों को ये लग रहा है, कि इमरान खान पाक के बड़े खिलाड़ी रहे हैं उनकी छवि किसी हीरो जैसी है इसलिए जब वो पीएम बनेंगे, तो उनकी राजनीतिक पारी में भी उतना ही मज़ा आएगा, जितना उनके क्रिकेट मैच को देखने में आता था

भारत के कुछ लोग ये सोच रहे हैं कि इमरान ख़ान सबकुछ अच्छा कर देंगे वो आतंकवाद का खात्मा कर देंगे लेकिन जिन लोगों को ये लग रहा है, कि क्रिकेटर से नेता बन चुके इमरान ख़ान का दिलबदलाव हो चुका है, वो ग़लत हैं क्योंकि, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इमरान खान क्रिकेट की पिच पर बाउंसर फेंक कर, हिंदुस्तान के बल्लेबाज़ों को घायल किया करते थे  अब पाक का पीएम बनकर भी वो अपने राजनीतिक विरोधियों  पड़ोसियों को घायल ही करेंगे दिक्कत ये है, कि हमारे राष्ट्र में लोगों को ये बात समझ में नहीं आ रही

इमरान ख़ान, पर अक्सर तालिबान के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगता है इसकी वजह से उनके आलोचक उन्हें तालिबान ख़ान कहते हैं उन्होंने 26 जुलाई को जो सम्बोधन दिया था, उसमें आतंकवाद  तालिबान से निपटने के लिए अपनी किसी योजना का ज़िक्र उन्होंने नहीं किया थाउन्होंने इतिहास में जितने भी बयान दिए हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है, कि वो ऐसे आतंकी संगठनों के पक्ष में हैं जुलाई 2002 में इमरान ख़ान ने बोला था, कि वो तालिबान की न्याय व्यवस्था से बहुत प्रभावित हैं  अगर उनकी गवर्नमेंट बनी तो वो भी वैसी ही शासन प्रक्रिया को अपनाएंगे

इमरान ख़ान उन लोगों में से एक हैं, जो हमेशा पाक की सेना की तारीफ़ करते रहते हैं उनके राजनीतिक विरोधी उन्हें सेना का ख़ास आदमी कहते हैं The Dawn के मुताबिक़, इमरान ख़ान ने 2016 में बोला था, कि पाक में नवाज़ शरीफ़ की राजशाही की वजह से लोकतंत्र ख़तरे में हैं  अगर सेना तख़्तापलट कर दे तो लोग ख़ुशी मनाएंगे  मिठाई बांटेंगे यानी जो लोग, इमरान ख़ान को हिंदुस्तान  पाक के सुनहरे भविष्य की गारंटी समझ रहे हैं, उन्हें उनके शपथग्रहण समारोह में जाने से पहले ये सारी जानकारियां इकट्ठा कर लेनी चाहिए थोड़ा रिसर्च भी कर लेना चाहिए

वैसे जो नवजोत सिंह सिद्धू, इमरान ख़ान के निमंत्रण पर इस्लामाबाद जाने के लिए इतने आतुर हैं, उन्हें 1996 का घटनाक्रम याद कर लेना चाहिए तब उन्होंने इंडियन क्रिकेट टीम का इंग्लैंड का दौरा बीच में ही छोड़ दिया था  वापस हिंदुस्तान लौट आए थे  उसकी वजह ये थी, कि टीम के तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन के साथ उनके मतभेद हो गये थे अब सोचने वाली बात ये है कि अपने कप्तान की बात का बुरा मानने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को पाक की कोई भी बात बुरी नहीं लग रही

यहां दिलचस्प बात ये भी है, कि सिद्धू पूरे उत्साह के साथ इमरान खान द्वारा मिले निमंत्रण की बात कर रहे हैं जबकि दूसरी तरफ इमरान ख़ान पर वहां की सेना का दबाव इतना ज़्यादा है, कि वो शपथग्रहण समारोह के लिए अपनी Guest List भी Final नहीं कर पा रहे हैं इमरान ख़ान को ऐन मौके पर अपना सारा प्लान बदलना पड़ रहा है हो सकता है, कि अगले कुछ घंटों के अंदर सिद्धू को इमरान खान का फोन आए  वो बोलें, कि रहने दो यार, फिर कभी मिलेंगे इसलिए हिंदुस्तान में किसी के भी मन में इमरान ख़ान को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए

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