Wednesday , September 19 2018
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टीम चुनने से लेकर कोच भी नियुक्त करेगा बोर्ड

सुप्रीमकोर्ट की ओर से नियुक्त क्रिकेट प्रशासक समिति की ओर से नियुक्त उत्तराखंड क्रिकेट कांसेंसस कमेटी (यूसीसीसी) की मंगलवार को हुई बैठक में लिए गए फैसलों पर बीसीसीआई की छाप स्पष्ट नजर आई। टीम, कोच से लेकर मैनेजर बीसीसीआई के होंगे। इसके पीछे तीन बड़ी वजह नजर आती हैं, पहली यूसीसीसी में शामिल चारों क्रिकेट एसोसिएशनों के सदस्यों पर टीम चयन में पारदर्शिता बरतने का भरोसा नहीं है। दूसरा इतने बड़े स्तर पर क्रिकेट मैच कराने का अनुभव नहीं होना। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सदस्यों में समन्वय की कमी।
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फ्लैशबैक की बात करे तो 2009 में बोर्ड ने चारों क्रिकेट एसोसिएशन प्रस्ताव दिया था कि आप सभी दो-दो नाम दे दीजिए और एसोसिएट सदस्य के रूप में मान्यता ले लीजिए। बीसीसीआई की ओर से दोबारा यह प्रस्ताव 2016 में आया और 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी यही बात कही। लेकिन, उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन और युनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन को छोड़कर कोई एसोसिएशन इस पर तैयार नहीं हुईं।

अमर उजाला भी पिछले कई वर्षों से अपनी खबरों के जरिए यह बात समझाता आ रहा है, लेकिन यह बात किसी के पल्ले नहीं पड़ी। आज की बात की जाए तो यूसीसीसी में कमोवेश कुछ ऐसी ही स्थिति हैं, लेकिन अधिकार बीसीसीआई के पास हैं। अगर उस समय सभी ने प्रस्ताव मान लिया होता तो नौ वर्ष के लंबे अंतराल में उत्तराखंड क्रिकेट आज कहीं और होता। प्रदेश के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा होते।

पर्वतीय जिलों के बहुरेंगे दिन 
यूसीसीसी की बैठक के बाद अब समिति के साथ ही सभी क्रिकेट एसोसिएशनों का फोकस नौ पर्वतीय जिलों पर है। अभी तक चारों क्रिकेट एसोसिएशन भले ही बड़ी-बड़ी बातें करें, लेकिन हकीकत में मैदानी जिलों को छोड़कर इन नौ जिलों में क्रिकेट को लेकर किसी ने भी कोई खास काम नहीं किया है। अब आने वाले 10 से 15 दिन के भीतर बीसीसीआई की देखरेख और यूसीसीसी के सहयोग से इन जिलों में ट्रायल आयोजित किए जाएंगे।

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बिना बोर्ड की अनुमति के नहीं होंगे मैच 
प्रदेश में आइपीएल की तर्ज हर महीने अलग-अलग जिलों में आयोजित होने वाले मैचों पर पाबंदी लग जाएगी। क्योंकि बिना बोर्ड की अनुमति के ये मैच नहीं हो सकेंगे। बोर्ड की अनुमति के बिना होने वाले टूर्नामेंट खेलने वाले खिलाड़ियों को बीसीसीआई ट्रायल में तवज्जो नहीं देगा। मालूम हो कि हर महीने क्रिकेट को बढ़ावा देने के नाम पर अलग-अलग जिलों में कई टीमें बनाकर प्रायोजक खोजकर टूर्नामेंट कराए जाते हैं। कुछ लोगों का तो यहां तक आरोप है कि इन टूर्नामेंट के नाम पर अच्छा खासा पैसा हजम किया जाता है और कई बार खिलाड़ियों को पैसा तक नहीं दिया जाता।

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