Saturday , November 17 2018
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चीन से बढ़ता आयात भारत के लिए खतरा

प्रेम शर्मा
भारत में नीति बनाने वालों के लिए चीन से डोकलाम विवाद अकेला सिरदर्द नहीं है। जिस तरह से चीनी वस्तुओं का प्रयोग हिन्दुस्तान में तेजी से बढ़ा और चीन के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक केन्द्र भारत बना है। वह एक खतरे का संकेत दे रहा है। समय रहते अगर सरकार ने चीन से होने वाले आयात पर लगाम न लगाई तो देश के उद्योग जगत का धराशायी होना तय है। ऐसे में भारत सरकार को सस्ते चीनी आयात से निपटने का रास्ता भी जल्द तलाशना होगा. नहीं तो इससे देश में रोजगार छिनने का खतरा और बढ़ जाएगा. दरअसल, कमजोर युआन के चलते घरेलू बाजार में सस्ते चीनी सामानों की बाढ़ आ गई है. इससे पहले से ही मुश्किल में चल रही फैक्ट्रियों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।इसके साथ ही चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे में और बढ़ोतरी होगी। इसलिए सरकार को इस बारे में जल्द कदम उठाना चाहि। हाल में .चीनी सामान के अंधाधुंध आयात के खतरों के प्रति आगाह करते हुए संसदीय समिति ने सरकार को इस पर अंकुश लगाने और घरेलू उद्योग को इसकी मार से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। समिति ने इस संबंध में अमेरकिा और यूरोपीय संघ की नजीर पेश करते हुए कहा है कि भारत को डब्यूटीओ के प्रावधानों का इस्तेमाल कर घटिया क्वालिटी के चीनी सामान की भारत में डंपिंग रोकनी चाहिए। अगर ऐसा ही चलता रहा तो निश्चित तौर पर चीन भारत को आर्थिक रूप से कमजोर और कर्जदार बना देगा। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016-17 में भारत-चीन व्यापार 71.47 अरब डॉलर का रहा। चीन को भारत से 10.19 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात किए गए, जबकि चीन से आयात का मूल्य 61.28 अरब डॉलर रहा। व्यापार घाटा 47.68 अरब डॉलर का रहा। इससे पहले के तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पाते हैं कि वर्ष 2012-13 में भारत-चीन व्यापार 65.85 अरब डॉलर का रहा। चीन को भारत से 14.82 अरब डॉलर के निर्यात किए गए, जबकि चीन से 51.03 अरब डॉलर के आयात हुए। व्यापार घाटा 36.21 अरब डॉलर! वर्ष 2013-14 में भारत-चीन व्यापार 72.36 अरब डॉलर का रहा। चीन को भारत से निर्यात का आंकड़ा 11.93 अरब डॉलर, जबकि आयात 60.43 अरब डॉलर रहा। व्यापार घाटा 48.48 अरब डॉलर रहा। इसी प्रकार वर्ष 2015-16 में भारत-चीन व्यापार 70.71 अरब डॉलर रहा। भारत से चीन को निर्यात 9.01 अरब डॉलर, जबकि आयात 61.7 अरब डॉलर का रहा। व्यापार घाटा 52.69 अरब डॉलर का रहा। स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। जबकि हाल में चीन और भारत के बीच जो व्यापारिक आंकड़े समिति के तरफ से जारी किए गए है वे भी कम चैकाने वाले नही है। समिति ने जो आंकड़े दिये है उसके मुताबिक 2017-18 में 89.6 अरब डालर भारत चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार हुआ। 2013-14 में भारत के कुल आयात का 11.6 प्रतिशत चीन से होता था, 2017-18 में यह बढ़कर 16.6 प्रतिशत हो गया। 2013-14 में चीन से भारत में आयात में 9 प्रतिशत सालाना वृद्धि हो रही थी 2017-18 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो गयी।चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 63 अरब डालर है जो देश के व्यापार घाटे का 40 प्रतिशत है।2007-08 से 2017-18 के दौरान चीन को भारत का निर्यात 2.5 अरब डालर बढ़ा है जबकि चीन से आयात 50 अरब डालर बढ़ा है। लेकिन चीन से आयात लगातार बढ़े हैं और चीन को भारत से निर्यात लगातार घटे हैं। साथ-साथ व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ता गया है। सिर्फ पिछले वित्त वर्ष (2016-17) में भारत में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की नीति से व्यापार घाटे में नगण्य कमी दिखाई दी है। भारतीय उद्योग पर चीनी वस्तुओं के प्रभावश् शीर्षक वाली राज्य सभा की वाणिज्य मामलों संबंधी स्थाई समिति का कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ ने उनके घरेलू उद्योग को हुए नुकसान और रोजगार कम होने पर काफी आक्रामक रुख अख्तियार किया है। ऐसे में सरकार को देश में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को नुकसान पहुंचाने वाली चीनी वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने के लिए विश्व व्यापार संगठन द्वारा उपलब्ध कराए गए व्यापार रक्षा उपाय करने के साथ-साथ अन्य तरह से रोक लगानी चाहिए।शिरोमणि अकाली दल के सदस्य नरेश गुजराल की अध्यक्षता वाली समिति का कहना है कि वह चीन के साथ व्यापार के खिलाफ नहीं है लेकिन उसने किसी भी देश द्वारा अपनायी जाने वाली संरक्षणवादी, अवैध और अनुचित व्यापार पद्धति से भारतीय उद्योग को पूरी तरह संरक्षण देने की सिफारिश की। समिति ने यह भी कहा कि सरकार ने अब तक चीनी उत्पादों पर जो एंटी डंपिंग ड्यूटी लगायीं हैं वे चीन द्वारा देश में की जा रही डंपिंग के मुकाबले काफी कम हैं। घरेलू साइकिल उद्योग को सस्ती चीनी साइकिलों की मार का असर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है। प्रतिबंध के बावजूद चीन से सस्ते पटाखे अवैध ढंग से भारतीय बाजार में आ रहे हैं। समिति ने कस्टम अधिकारियों को पर्यावरण के लिए खतरनाक पटाखों की देश में तस्करी रोकने के उपाय करने को भी कहा है। साथ ही जब्त होने वाले पटाखों की नीलामी करने के बजाय नष्ट करने और घरेलू आतिशबाजी उद्योग पर जीएसटी की मौजूदा 18 प्रतिशत की दर को घटाकर तर्कसंगत स्तर पर लाने की सिफारिश भी की है।चीन से खिलौना आयात के संबंध में मानक और विशिष्टताएं तय होने के बावजूद भारतीय खिलौना बाजार घटिया गुणवत्ता के जहरीले चीनी खिलौनों से पटा हुआ है। जबकि देश में खिलौनों उद्योग धिसटने लगा है। समिति का मानना है कि चीन से आयात होने वाले सोलर पैनल एंटीमनी जैसे खतरनाक रसायन होते हैं। देश में ऐसे उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं होनी चाहिए। समिति ने कहा कि भारत 2006-07 से 2011 के बीच जर्मनी, फ्रांस और इटली को सोलर उत्पादों की आपूर्ति करता था लेकिन उसके बाद चीन ने उसके उत्पादों की डंपिंग शुरु कर दी और भारत का सोलर उत्पादों का निर्यात रुक गया। सरकार को इस तरह की डंपिंग का संज्ञान लेते हुए तत्काल कदम उठाने चाहिए।यही नही समिति की तरफ से कहा गया कि सरकार को गारमेंट पर आयात शुल्क बढ़ाना चाहिए और जिन गारमेंट को भारत में जीरो ड्यूटी पर आयात की छूट है, उनके लिए रॉ मैटेरियल भारत से ही खरीदने की बाध्यता करनी चाहिए। साथ ही मेड इन इंडिया उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए समिति ने स्वदेशी अपनायो अभियान भी छेड़ने की वकालत की है।समिति ने दवाएं बनाने के लिए चीन से बड़ी मात्रा में आयात होने वाले ड्रग्स पर निर्भरता घटाने की सिफारिश करते हुए कहा है कि ऐसे रणनीतिक उत्पाद के संबंध में चीन की दया पर निर्भर नहीं रहा जा सकता क्योंकि इसका असर देश की स्वास्थ्य सुरक्षा पर पड़ेगा। समिति ने हिन्दुस्तान एंटीबायॉटिक्सस और आइडीपीएल जैसे पीएसयू को पुनः खड़ा करने की संभावनाएं तलाशने की सिफारिश भी की है। चीनी आयात का असर यह है कि भारत पर आयातकों और व्यापारियों का देश बनने का संकट मंढ़रा रहा है क्योंकि घरेलू फैक्ट्री या तो अपने उत्पादन में कटौती कर रही हैं या पूरी तरह बंद हो रही हैं। समिति ने साफ कहा कि वह देश में ऐसी स्थिति देखना नहीं चाहती। देश छोटे और मझोले उद्यमों सहित उद्योग को नेस्तनाबूद होते बर्दाश्त नहीं कर सकता।यही नही जब चीन भारत की सेहत से खिलवार्ड करते हुए प्लास्टिक का चाॅवल तक भेज रहा हो तो फिर कल्पना कर ली जाए कि उससे बिना सोचे समझे व्यापार करना सिर्फ घाटे का सौदा है। चीन ने भारत के साथ वर्ष 2019 तक व्यापार संतुलन के लिए समझौता किया था, लेकिन वह हवाहवाई हो गया है।

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