Wednesday , September 26 2018
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खुशखबरी: सावन के पहले सोमवार पर निकलेगी बाबा की सवारी

आज सावन का पहला सोमवार है  बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल मन्दिर में भस्म आरती के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने के लिए पंहुचे आधी रात 2.30 बजे ही मंदिर में भस्म आरती प्रारम्भ हुई जिसमें दूध, दही, घी , शहद, फूल इत्र आदि से ईश्वर को स्नान कराया गयामान्यता है कि सावन में सोमवार को शिव के दर्शन करने से जो मांगो वो फल मिलता है भस्म आरती के बाद भक्तों को दर्शन देने के लिए आज शाम 4 बजे महाकाल की सवारी भी मंदिर से निकलेगी

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल के मंदिर में आज भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से उज्जैन पंहुचे थे मंदिर का हॉल पूरी तरह भक्तों से भरा हुआ था बाबा महाकाल का फूलों से श्रृंगार करने के बाद बाबा की आरती प्रारम्भ हुई ढोल-नगाड़ों  मंदिर की घंटियों के बीच झांज-मंजीरो के साथ बाबा महाकाल की आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालु आज के दिन महाकाल मंदिर में पूजन-अभिषेक करते हैं तो भोले उनकी सभी मुरादें पूरी करते हैं आज शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से बाबा पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे

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सावन के सोमवार का महत्व 
आज सावन का पहला सोमवार है  देशभर के शिवालयों में प्रातः काल से ही भक्तों का मेला लगना शुय हो गया है महीनों में सावन का अपना महत्व है इसी के साथ सोमवार के व्रत रखने का भी खास होता है देवों में देव महादेव ऐसे ईश्वर हैं जो सिर्फ जलाभिषेक से ही खुश हो जाते हैं सोमवार का दिन चंद्र का दिन होता है  चंद्रमा के नियंत्रक ईश्वर शिव हैं इस दिन पूजा करने से न केवल चंद्रमा बल्कि ईश्वर शिव की कृपा भी मिलती है  सोमवार का व्रत रखने से सेहत की समस्या, शादी की मुश्किल, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है सोमवार को जो भी आदमी विधि पूर्वक ईश्वर शिव की आराधना करता है तो तमाम समस्याओं से मुक्ति पा सकता है इससे भी अधिक सावन के सोमवार के व्रत रखने से मिलता है

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कुंडली के दोष होते हैं दूर 
सावन के सोमवार का व्रत रखने से अगर कुंडली में शादी का योग न हो या शादी होने में अड़चने आ रही हों तो संकल्प लेकर व्रत किया जाना चाहिए अगर कुंडली में आयु या सेहत बाधा हो या मानसिक स्थितियों की समस्या हो तब भी सावन के सोमवार का व्रत श्रेष्ठ परिणाम देता हैसोमवार व्रत का संकल्प सावन में लेना सबसे उत्तम होता है, इसके अतिरिक्त इसको अन्य महीनों में भी किया जा सकता है इसमें मुख्य रूप से शिव लिंग की पूजा होती है  उस पर जल तथा बेल लेटर अर्पित किया जाता है

महाकाल महाराज के रूप में साक्षात करते हैं निवास
सावन महीने में महाकाल की नगरी उज्‍जैन में भक्‍तों का तांता लगना प्रारम्भ हो जाता है उज्जैन सम्राट विक्रमादित्य की राजधानी के रूप में भी इतिहास के पन्‍नों में दर्ज है प्राचीन काल में इस शहर को अवन्तिका के नाम से जाना जाता था इसका उल्लेख प्राचीन धर्मग्रन्थों में भी मिलता हैमान्यता है कि आज भी उज्जैन शहर में ईश्वर शिव राजाधिराज महाकाल महाराज के रूप में साक्षात निवास करते हैं सावन, महाकाल  उज्जैन इन तीनों की पवित्र त्रिवेणी से भक्‍तों का ज़िंदगी पास हो जाता है सावन में शिवभक्ति  शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बनता है

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