Sunday , September 23 2018
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यहाँ जाने रामगढ़ की इस टूटी झरना मंदिर के बारे में कुछ राज़ की बात

आज 30 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है  देशभर के शिवालयों में प्रातः काल से ही भक्तों का मेला लगना प्रारम्भ हो गया है महीनों में सावन का अपना महत्व है इसी के साथ सोमवार के व्रत रखने का भी खास होता है देवों में देव महादेव ऐसे ईश्वर हैं जो सिर्फ जलाभिषेक से ही खुश हो जाते हैं सोमवार का दिन चंद्र का दिन होता है  चंद्रमा के नियंत्रक ईश्वर शिव हैं इस दिन पूजा करने से न केवल चंद्रमा बल्कि ईश्वर शिव की कृपा भी मिलती है

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दैवीय शक्ति का अनोखा चमत्‍कार
झारखंड के ऐसा भी है जहां ईश्वर शंकर के शिवलिंग पर जलाभिषेक कोई  नहीं स्वयं मां गंगा करती हैं ईश्वर को कोई माने या न माने लेकिन वह अपनी शक्ति  उपस्थिति का एहसास किसी न किसी रूप में करा ही देते हैं ऐसा ही एक चमत्‍कारी मंदिर झारखंड में मौजूद है जो दैवीय शक्ति का अनोखा चमत्‍कार है मंदिर की अच्छाई यह है कि यहां जलाभिषेक वर्ष के बारह महीने  चौबीस घंटे होता हैयह पूजा सदियों से चली आ रही है माना जाता है कि इस स्थान का उल्‍लेख पुराणों में भी मिलता हैभक्तों की आस्‍था है कि यहां पर मांगी गई हर मुराद पूरी होती है झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर को लोग टूटी झरना के नाम से जानते है

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अंग्रेजों की खोज है ये मंदिर
मंदिर का इतिहास 1925 से जुड़ा हुआ है  माना जाता है कि तब अंग्रेज इस इलाके से रेलवे लाइन बिछाने का कार्य कर रहे थे पानी के लिए खुदाई के दौरान उन्हें जमीन के अन्दर कुछ गुम्बदनुमा वस्तु दिखाई पड़ा अंग्रेजों ने इस बात को जानने के लिए पूरी खुदाई करवाई  अंत में ये मंदिर पूरी तरह से नजर आया मंदिर के अन्दर ईश्वर भोले का शिव लिंग मिला  उसके अच्छा ऊपर मां गंगा की सफेद रंग की प्रतिमा मिली प्रतिमा के नाभी से आपरूपी जल निकलता रहता है जो उनके दोनों हाथों की हथेली से गुजरते हुए शिव लिंग पर गिरता है मंदिर के अन्दर गंगा की प्रतिमा से स्वंय पानी निकलना अपने आप में एक कौतुहल का विषय बना है

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नहीं सूखती यहां की नदी 
सवाल यह है कि आखिर यह पानी अपने आप बोला से आ रहा है ये बात अभी तक रहस्य बनी हुई हैबोला जाता है कि पर जलाभिषेक कोई  नहीं स्वयं मां गंगा करती हैं यहां लगाए गए दो हैंडपंप भी रहस्यों से घिरे हुए हैं यहां लोगों को पानी के लिए हैंडपंप चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है बल्कि इसमें से अपने-आप हमेशा पानी नीचे गिरता रहता है वहीं मंदिर के पास से ही एक नदी गुजरती है जो सूखी हुई है लेकिन भीषण गर्मी में भी इन हैंडपंप से पानी लगातार निकलता रहता है

पूरी होती है हर मुराद 
लोग दूर-दूर से यहां पूजा करने आते हैं  वर्ष भर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता हैश्रद्धालुओं का मानना हैं कि टूटी झरना मंदिर में जो कोई भक्त ईश्वर के इस अदभुत रूप के दर्शन कर लेता है उसकी मुराद पूरी हो जाती है भक्त शिवलिंग पर गिरने वाले जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं  इसे अपने घर ले जाकर रख लेते हैं इसे ग्रहण करने के साथ ही मन शांत हो जाता है  दुखों से लड़ने की ताकत मिल जाती है

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