Friday , September 21 2018
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हिंदुस्तान रत्न पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आज भी सबके दिलों में जिन्दा

हिंदुस्तान रत्न पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आज ही के दिन आकस्मित हमें छोड़ कर चले गए थे. 27 जुलाई 2015 में आईआईएम शिलोंग में लेक्चर देने के दौरान इस महान पुरुष ने इस संसार को अलविदा बोला था. राष्ट्र के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के ज़िंदगी से जुड़े बहुत से किस्से आपने सुने होंगे. मगर ऐसा बहुत कुछ है जो आपको शायद ही पता होगा.
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– डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक होने के साथ मनोवैज्ञानिक भी थे. वह चेहरा पढ़ना भी खूब जानते थे. वो किसी का भी चेहरा पढ़कर उसके बारे में बहुत कुछ बता देते थे.

– अब्दुल कलाम, उस शख्सियत का नाम है, जो जीवनभर ज्ञान के भूखे रहे  दूसरों के भीतर भी ज्ञान की भूख जगाने की अद्भुत क्षमता थी. उन्होंने हमेशा विकास की बात की, फिर वह डेवलेपमेंट समाज का हो या फिर आदमी का.

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– इतना ही नहीं डॉ कलाम जब भी लखनऊ आए तो एक ओर उन्होंने बच्चों को सवाल पूछने का संकल्प दिलाया वहीं दूसरी ओर युवाओं  बुजुर्गों को घर में लाइब्रेरी बनाने का.
आज हम कुछ नया सीखेंगे कहते ही गिर पड़े कलाम

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सृजन पाल सिंह जो उनके शागिर्द थे  अंत समय में भी उनके साथ थे उन्होंने कलाम से जुड़े जो अनुभव सुनाए, उसे सुन कई बार दर्शकों की आंखें नम हुई हैं. सृजन कलाम से पहली मुलाकात से लेकर अंतिम समय तक की तमाम यादें साझा करते रहे हैं. सृजन पाल सिंह बताते हैं कि शिलॉन्ग में जब वह डॉ कलाम के सूट में माइक लगा रहे थे तो उन्होंने पूछा ‘फनी गॉय हाउ आर यू’,जिस पर मैंने जवाब दिया ‘सर ऑल इज वेल’.

फिर वह विद्यार्थियों की ओर मुड़े  बोले ‘आज हम कुछ नया सीखेंगे’  इतना कहते ही पीछे की ओर गिर पड़े. पूरे सभागार में सन्नाटा पसर गया.

सृजन पाल सिंह ने बताते हैं कि डॉ कलाम हर किसी से पूछते थे कि ज़िंदगी में किस एरिया में पहचान बनाने की ख्वाहिश रखते हैं, जिससे सफलता हासिल कर सकें.

10 जुलाई को डॉ कलाम अपने घर के बगीचे में घूम रहे थे तो मैंने भी डॉ कलाम से यह सवाल पूछ लिया. उन्होंने जवाब दिया कि ‘मैं चाहता हूं कि संसार मुझे शिक्षक के रूप में जाने’ फिर बोले कि मेरे हिसाब से संसार को अलविदा कहने के सबसे अच्छा उपाय यह होगा कि ‘व्यक्ति सीधा खड़ा हो,जूते पहना हो  अपनी पसंद का काम कर रहा हो’. यह सुनाते ही सृजन पाल की आंखें नम हो गईं.

सृजन पाल सिंह ने बताया कि डॉ कलाम हमेशा राष्ट्र के विकास, गांवों में एजुकेशन का प्रसार, चिकित्सा व्यवस्था में सुधार जैसे मामलों पर गहनता से बातें करते थे. बताया कि वह जब किसी से मिलते थे तो उसे सलाह देते कि वह हर दिन अपनी मां के चेहरे पर एक मुस्कान जरूर दें.
आस्था अस्पताल के डॉ अभिषेक शुक्ल ने बताया कि डॉ कलाम से कई बार मुलाकात हुई, लेकिन राजभवन की मुलाकात आज भी याद है. वहां मैंने वृद्धजनों की समस्याओं को लेकर उनसे वार्ता की, जिस पर डॉ कलाम ने बोला कि समस्या संयुक्त परिवारों के समाप्त होने की है.

न्यूक्लियर फैमिली में बुजुर्गों की देखरेख नहीं हो पाती. उनके सुझाव से वृद्धों के लिए कार्य करने में बहुत ज्यादा सहायता मिली. डॉ कलाम की कमी हमेशा खलेगी. जिलाधिकारी राजशेखर ने बताया कि एयरपोर्ट की लॉबी में डॉ अब्दुल कलाम से 40 मिनट की मुलाकात हुई  इस दौरान उन्हें विकास के अतिरिक्त किसी  मुद्दे पर बात नहीं की.

उनका मानना था कि गांवों के विकास पर फोकस होना चाहिए. इसके अतिरिक्त बच्चों की एजुकेशन सेहत को दुरुस्त करवाना सरकारों की प्राथमिकता रहनी चाहिए. डॉ कलाम की सोच साधारण रहन-सहन के साथ सामाजिक रूप से उत्पादकता देने वाली थी.

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