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यशपाल मलिक गुट करेगा अभिमन्यु का बहिष्कार, जाने क्या है असल माजरा

जाट आरक्षण के लिए प्रयत्न कर रहे यशपाल मलिक गुट ने हरियाणा गवर्नमेंट में कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. यशपाल मलिक की अध्यक्षता वाली जाट आरक्षण प्रयत्न समिति की जिला इकाई की रविवार को कृष्णलाल हुड्डा की अध्यक्षता में जसिया में मीटिंग हुई. इसमें प्रदेश के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया.

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निर्णय के तहत, जो आदमी कैप्टन से संपर्क रखेगा उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.बहिष्कार तब तक जारी रहेगा जब तक कैप्टन केसों को वापस नहीं ले लेते. अब यदि किसी को अरैस्ट किया गया तो गंभीर परिणाम होंगे. वहीं, जवाब में वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु का कहना है कि ये कौन होते हैं सामाजिक बहिष्कार का निर्णय करने वाले. ये तो आपराधिक तत्व हैं. इनका रैकेटजाट कौम का अहित कर रहा है. ऐसे लोगों का बहिष्कार या संबंध क्या मायने रखता है. इनके बहकावे में जाट समाज आने वाला नहीं हैं.

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फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए दंगों में वित्तमंत्री अभिमन्यु की रोहतक स्थित कोठी को जला दिया गया था. इस विषय में CBI ने 51 लोगों के विरूद्ध चार्जशीट दाखिल की है.इनमें 16 लोगों को भगोड़ा घोषित किया है. CBI ने पिछले दिनों भगोड़ा घोषित पवन जसिया सोमबीर जसिया को उठाया है. यशपाल मलिक गुट की जाट आरक्षण प्रयत्न समिति इसका विरोध कर रही है.

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जाट आरक्षण प्रयत्न समिति की जसिया में हुई जिला स्तरीय मीटिंग में कई निर्णय लिए गए.समिति के मुख्य महासचिव कृष्णलाल हुड्डा ने बोला कि सोमबीर  पवन समाज के बीच रहते थे.ऐसे में वे भगोड़े कैसे हो गए? गवर्नमेंट ने चार बार जाट आरक्षण प्रयत्न समिति के साथ समझौता किया, लेकिन समझौते का उल्लंघन किया.

उन्होंने बोला कि आगामी तीन दिनों में जिले के अंदर गांव-गांव में भाईचारा सम्मेलन होंगे, जिसमें गवर्नमेंट के विरूद्ध निंदा प्रस्ताव पास किये जाएंगे. प्रत्येक गांव में 10-10 ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, ताकि तत्काल आंदोलन प्रारम्भ किया जा सके. जाट आरक्षण प्रयत्न समिति के महासचिव कृष्णलाल हुड्डा का कहना है कि दंगों में दर्जनों युवक मारे गए, लेकिन CBI उनकी मौत की जांच करने के बजाए मंत्री की कोठी जलाने के मामले की जांच कर रही है. क्या कोठी युवाओं की जिंदगी से ज्यादा जरूरी है?

यह आपराधिक तत्वों का रैकेट है, जिसने जाट समाज का अहित ही किया है. ये कौम के शत्रु हैं. जाट समाज बहुत बड़ा है, जिसका अपना गौरवशाली इतिहास है. ऐसे लोगों का बहिष्कार या संबंध क्या मायने रखता है.

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