Monday , September 24 2018
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पाक में मीडिया की हालत बदतर, पत्रकारों के अधिकारों के लिए कार्य करने वाली संगठन ने उठाए सवाल

पत्रकारों के अधिकारों के लिए कार्य करने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने पहले मीडिया सामने उत्पन्न स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं न्यूयार्क के संगठन कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने शनिवर (21 जुलाई) को अपनी एक नयी रिपोर्ट में बोला है कि सेना एवं सरकारी अधिकारियों की आलोचना करने वाले पत्रकारों का अपहरण कर लिया जाता है या उन पर हमला किया जाता है

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रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि कैसे सेना के प्रवक्ता ने पत्रकारों को गवर्नमेंट एवं सेना विरोधी दुष्प्रचार साझा करने का आरोपी ठहराया  पाक के दो सबसे बड़े मीडिया संगठनों – जियो टीवी डॉन का वितरण मनमाने तरीके से सीमित कर दिया गया

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सीपीजे शोधकर्ता आलिया इफ्तिकार ने अपनी इस रिपोर्ट में कई पाकिस्तानी पत्रकारों का हवाला दिया है जिन्होंने बोला है कि न्यायपालिका की चुप्पी से ‘ डर  आत्म सेंसरशिप का माहौल’ बढ़ता जा रहा है

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पाकिस्तानी अखबार ने अपनी ही गवर्नमेंट के दावों को बताया ‘खूनी’, जानिए क्या है वजह
पाक आम चुनाव से पहले आतंकी हमलों में करीब 150 लोगों के मारे जाने पर रविवार (15 जुलाई) को शोक दिवस मना रहा है  ऐसे में प्रमुख अखबारों ने सेना एवं गवर्नमेंट के इस दावे पर प्रश्न खड़ा किया है कि उन्होंने राष्ट्र में आतंकवाद को कुचल डाला है अशांत बलूचिस्तान  पख्तूनख्वा प्रांतों में चुनावी रैलियों पर एक के बाद एक कर कर तीन हमले हुए जिनमें 150 नागरिकों के साथ दो बड़े नेता मारे गये इससे यह चिंता फिर खड़ी हो गयी है कि हिंसा से 25 जुलाई के मतदान में बाधा पहुंच सकती है

आतंकवादी हमलों पर रिएक्शन जाहीर करते हुए एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपने कठोर संपादकीय में लिखा, ‘‘पाकिस्तान में आतंकी ताकतों को खदेड़ने के गवर्नमेंट के दावे में खून के छींटे हैं ’’ उसने लिखा है , बताया गया है कि पुलिस , अर्धसैनिक बलों  सेना के निरंतर कोशिश से तहरीक ए तालिबान पाकस्तान जैसे संगठन के कदम पीछे हट गये लेकिन इतने नहीं हटे कि वे फिर से नुकसानदेह प्रहार नहीं कर पाये
उसने बोला कि चुनाव प्रचार पूरे जोरों पर है  ऐसे में जब इन संगठनों से मुकाबला करने की बात सामने आती है तो गवर्नमेंट की ठसक पर सवाल खड़ा होता है डॉन अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि आतंकी हमलों में आकस्मिक वृद्धि से जरुरी हो जाता है कि गवर्नमेंट सुरक्षा की मांग करने वाले सभी उम्मीदवारों को अविलंब सुरक्षा देने समेत तत्काल जरुरी तरीका करे

बिना किसी चेतावनी के हुए इन हमलों से खुफिया तंत्र में चूक का इशारा मिलता है द न्यूज ने अपने संपादकीय में लिखा है कि गवर्नमेंट को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने खतरे में चल रहे लोगों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान कर चुनाव की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं की

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