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राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार

मशहूर कवि, गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज का अंतिम संस्कार शनिवार(21 जुलाई) को अलीगढ़ में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया गया प्रदर्शनी मैदान के पास स्थित श्मशान घाट पर उन्हें प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी अंतिम संस्कार के दौरान उनका प्रसिद्ध गीत ‘कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे  ‘ ‘ये भाई जरा देख के चलो  ‘ ‘बस यही क्राइम मैं हर बार करता हूं  ‘ साउंड बॉक्स में बजता रहा एलईडी स्क्रीन पर उनकी जीवनी भी बताई जा रही थी

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अलीगढ़ में घर पर उनका पार्थिव बॉडी करीब 40 मिनट रखा गया
इससे पहले उनका पार्थिव बॉडी नुमाइश मैदान में कृष्णांजलि नाट्यशाला के मंच पर जनता दर्शन के लिए रखा गया था, कभी यहीं पर वह कविता पाठ किया करते थे अलीगढ़ में घर पर उनका पार्थिव बॉडी करीब 40 मिनट रखा गया इस दौरान उन्हें नहलाया गया  सफेद कुर्ता-पायजामा पहनाया गया इसी पहनावे में वे लोगों को मंच पर दिखते थे

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फिर उनके पार्थिव बॉडी को तिरंगे में लपेटा गया  अंतिम यात्रा प्रारम्भ हुई अंतिम यात्रा के दौरान नीरज चर्चित गीत बजते रहे नुमाइश मैदान में कृष्णांजलि नाट्यशाला के मंच पर मृत शरीर पर जनता दर्शन के लिए रखा गया यहां कैबिनेट मंत्री सहित लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की यहीं पीएसी के बैंड की धुन पर उन्हें अंतिम सलामी दी गई

मुक्तिधाम में शाम लगभग पांच बजे उनकी अंत्येष्टि की गई
इसके बाद नुमाइश मैदान के पास स्थित मुक्तिधाम में शाम लगभग पांच बजे उनकी अंत्येष्टि की गई अपनी रचनाओं के रूप में महाकवि हमेशा जीवित रहेंगे.पूर्व में नीरज की ख़्वाहिश के मुताबिक उनके पार्थिव बॉडी को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को दान किया जाना था

लेकिन लगातार बेकार सेहत के कारण उनके विभिन्न अंग इस स्थिति में नहीं रह गये थे कि उन्हें चिकित्सा शोध काम में प्रयोग किया जाता लिहाजा , परिजन ने ऐन वक्त पर अंतिम संस्कार का निर्णय किया बताते चलें कि गोपाल दास नीरज का 19 जुलाई को दिल्ली स्थित अखिल इंडियनआयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था

गोपाल दास नीरज के पार्थिव बॉडी को प्रातः काल दिल्ली से आगरा ले जाया गया
उन्हें तबियत बेकार होने के बाद आगरा से दिल्ली रेफर किया गया था गोपाल दास नीरज के पार्थिव बॉडी को प्रातः काल दिल्ली से आगरा ले जाया गया यहां प्रातः काल आठ बजे सरस्वती नगर बल्केश्वर मे उनके पार्थिव बॉडी को अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया   यूपी के पूर्व CM अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उन्हें यहां श्रद्धांजलि दी अखिलेश यादव ने बोला कि अपने गीतों के माध्यम से नीरज हमेशा अमर रहेंगे समाजवादी पार्टी के प्रदेश की सत्ता में आने के बाद नीरज की स्मृति में इटावा स्थित उनके गांव को यादगार बनाया जाएगा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में भी नीरज को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने इस महान कवि को हिन्दुस्तान के साम्प्रदायिक सौहार्द , सहिष्णुता  बहुलतावाद की समृद्ध धरोहर का प्रतीक करार दिया उन्होंने बोला कि नीरज ने जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को अपना बॉडी दान करने की वसीयत करके भी यह साबित किया कि मृत्यु के बाद भी वह इन्सानियत के कार्य आने की तीव्र ख़्वाहिश रखते थे

आगरा में नीरज की अंतिम यात्रा मे भी सैकड़ों लोग शामिल हुए
उनके निधन से अपूरणीय क्षति हुई है उर्दू के लेखक प्रोफेसर शैफी किदवई ने बोला कि नीरज का इस संस्थान के साथ भावनात्मक संबंध था कवि कुमार विश्वास  हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा समेत तमाम गणमान्य लोग नीरज के दर्शनों के लिए पहुंचे आगरा में नीरज की अंतिम यात्रा मे भी सैकड़ों लोग शामिल हुए

कवि सम्मेलन समिति द्वारा तैयार रथ में उनका पार्थिव बॉडी रखा गया इस दौरान उनके लिखे गीत ऐ भई जरा देखकर चलो गूंजते रहे करीब एक किलोमीटर तक अंतिम यात्रा के बाद एंबुलेंस से नीरज की पार्थिव देह को अलीगढ़ ले जाया गया हालांकि रथ पर अंतिम यात्रा को लेकर थोड़ा टकराव भी हुआ नीरज के पुत्र मिलन प्रभात  नाती ने एंबुलेंस से पार्थिव देह को अलीगढ़ ले जाने को बोला ताकि वहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हो सके

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