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संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से होगा प्रारम्भ, हो सकता है बड़ा हंगामा

संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से प्रारम्भ होने जा रहा है. इस सत्र में हंगामे के पूरे संभावना दिख रहे हैं. मानसून सत्र से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने मिलकर रणनीति तय की है. मीटिंग में गवर्नमेंट को घेरने के पूरे इशारा दिए हैं. विपक्षी नेताओं ने निर्णय किया है कि सत्र चलना चाहिए इसमें बेरोजगारी, किसान, दलित, अल्पसंख्यकों  ओबीसी से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा. विपक्ष मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी गवर्नमेंट को जोर शोर से घेरने की तैयारी में है.

मीटिंग के बाद कांग्रेस पार्टी के नेता अधीन नबी आजाद ने बोला कि सत्र प्रारम्भ होने से पहले विपक्षी दलों की मीटिंग हुई है. उन्होंने बोला कि सत्र में किन मुद्दों को उठाया जाएगा इस पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है. उन्होंने बोला कि पूरा विपक्ष संसद को चलते हुए देखना चाहता है. विपक्षी नेताओं की यह मीटिंग संसद भवन की लाइब्रेरी बिल्डिंग में हुई. इस मीटिंग में कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. इसमें अधीन नबी आजाद, अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे, आनंद शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हुए.

वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार, तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सुखेन्दु शेखर रॉय, बीएसपी से सतीश चंद्र मिश्रा, सपा से राम गोपाल यादव, आरजेडी से बिहार के पूर्व मुख्यमत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती, डीएमके से एस एलंगोवन, सीपीआई-एम से मोहम्मद सलीम, सीपीआई से डी राजा, जेडी-एस से डी कुपेन्द्र रेड्डी, आरएसपी से एनके प्रेमचंद्रन, केसी-एम से जोस के मणि आईयूएमएल से कुन्हाल कुट्टी शामिल हुए.

आजाद ने बोला कि हम राष्ट्र की जनता के मुद्दे उठाना चाहते हैं. अगर गवर्नमेंट इन मुद्दों पर चर्चा करने से बचेगी तो हम विरोध करेंगे.  इसकी जिम्मेदार गवर्नमेंट खुद होगी. सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव पर भी मंथन किया गया. विपक्षी दलों ने राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए साझा उम्मीदवार उतारने को लेकर चर्चा की है.

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