Thursday , November 22 2018
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केंद्र का यह कदम चमड़ा उद्योग में फूंकेगा नयी जान

केंद्र गवर्नमेंट ने मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक एरिया की इकाइयों तथा रक्षा बलों से राष्ट्र में बने चमड़े के उत्पादों को खरीदने के आदेश जारी किए हैं. इससे राष्ट्र के चमड़ा उद्योग में एक नयी जान आने की प्रबल आसार पैदा हो गई है  चमड़ा उद्यमी बहुत ज्यादा उत्साहित हैं.

आने वाले दिनों में राष्ट्र में चमड़ा उद्योग में एक नयी क्रांति की आसार से भी मना नहीं किया जा सकता. पंजाब लेदर फेडरेशन का कहना है कि घरेलू खपत से उद्यमियों में एक नयी जान आएगी अगर यह लहर चल निकली, तो लेदर उद्योग नंबर वन पर आ जाएगा.

इससे एक तरफ जहां राष्ट्र में वस्तुओं  सेवाओं के विनिर्माण  उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं मेक इन इंडिया को प्राथमिकता मिलेगी. चमड़ा कारोबारी इसे लेकर अभी से योजना तैयार करने में जुट गए हैं, ताकि सरकारी ऑर्डर और डिमांड को समय पर पूरा किया जा सके.

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केंद्र गवर्नमेंट के आदेशों के मुताबिक, सैडलरी (घुड़सवारी में घोड़े की पीठ पर कसे जाने वाला जीन सहित अन्य सामान), यात्रा सामान, चमड़ा परिधान  ऊंचे स्थानों पर पहने जाने वाले जूते आदि की आपूर्ति करने वाले घरेलू विनिर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पादों में निश्चित मात्रा में घरेलू सामान का प्रयोग किया गया है.

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यह है अनिवार्यता
कॉम्बैट जूते, सेफ्टी शू, फुटवियर सामान, सिंथेटिक अपर्स वाले खेल के जूते  चमड़े के अपर्स के लिए न्यूनतम 70 प्रतिशत लोकल सामग्री प्रयोग की जानी चाहिए. इसी तरह सैडलरी, यात्रा के सामान, चमड़ा परिधानों तथा दास्ताने आदि के विनिर्माताओं के लिए लोकल सामग्री की अनिवार्यता 60 प्रतिशत होगी. केंद्र गवर्नमेंट इसे जमीनी स्तर पर लागू करने जा रही है. आदेश के मुताबिक, क्रियान्वयन की निगरानी का नोडल मंत्रालय डीआईपीपी होगा.

निर्यात में भी वृद्धि की उम्मीद

सरकार जहां घरेलू खपत बढ़ाने की तैयारी कर रही है, वहीं 2019 तक चमड़ा निर्यात  उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है. वर्तमान में राष्ट्र का चमड़ा निर्यात सालाना 5.66 अरब डॉलर का है  केंद्र गवर्नमेंट का लक्ष्य इसमें आगामी वित्त साल में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का है.

हिंदुस्तान ही नहीं, चमड़े के पहनावों की विदेशों में खासी मांग है. हिंदुस्तान की चमड़ा निर्यात में अच्छी-खासी भागीदारी है. मशहूर कंपनी बावा स्किन के मालिक आत्मजीत सिंह बावा का कहना है कि यह एक सराहनीय कदम है  इससे चमड़ा निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा  निश्चित तौर पर एक क्रांति आएगी. इंडियन उत्पादों की विदेशों में मांग है  अगर निर्यातकों की खपत हिंदुस्तान में अधिक हो जाती है, तो इससे लाभ ही होगा.

सरकार की अधिसूचना का इंतजार
पंजाब लेदर फेडरेशन के सचिव अजय ने बोला कि पिछले छह-सात वर्ष से लेदर इंडस्ट्री की घरेलू खपत स्थिर चल रही थी  केंद्र गवर्नमेंट का यह आदेश उद्योग में जान पैदा करने वाला है. चमड़ा उद्योग बहुत ज्यादा उत्साहित है  गवर्नमेंट की अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है. गवर्नमेंटकौन-कौन से उत्पादों को हिंदुस्तान में ही खरीदने की सूची जारी करती है, उसके हिसाब से ही उद्यमी अपनी अगली बिजनेस योजना तैयार करेंगे.

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