Sunday , July 22 2018
Loading...
Breaking News

दिलजीत दोसांझ बने एक्टिंग के सूरमा

इन दिनों बॉक्‍स कार्यालय पर बायोपिक्‍स का ही बोलबाला है  इसी क्रम में एक  आज रिलीज हो गई है हिंदुस्तान में स्‍पोर्ट्स वैसे भी बहुत ज्यादा पसंद किया जाता है  अगर खेल पर कोई फिल्‍म बनाई जाए तो फिर दर्शकों के लिए जैसे सोने पर सुहाना हो जाता है ‘सूरमा’ की कहानी हॉकी के खिलाड़ी संदीप सिंह की है, जिनकी जिंदगी का प्रयत्न काबिले तारीफ है इस फिल्‍म में एक्‍टर दिलजीत दोसांझ  तापसी पन्नू की जोड़ी साथ नजर आई है इसके साथ ही इस फिल्‍म से ही बॉलीवुड एक्‍ट्रेस चित्रांगदा सिंह भी पहली बार प्रोड्यूसर बन रही हैं

Loading...

कहानी
‘सूरमा’ की कहानी प्रारम्भ होती है एक महिला हॉकी प्लेयर हरप्रीत कौर (तापसी पन्नू) की आवाज से, जो हरियाणा के शाहाबाद के संदीप सिंह की कहानी की आरंभ करती हैं अपने कोच की सख्ती की वजह से 9 वर्ष की आयु में ही संदीप का मन हॉकी से उचट जाता है  वह खेलना छोड़ देता है लेकिन बड़े होने पर उसे एक लड़की से प्‍यार होता है  इसी लड़की के प्‍यार के लिए वह फिर से हॉकी स्टिक उठाता है इस खेल में वह इतनी मेहनत करता है कि इंडिया के लिए भी खेलता है लेकिन इस बीच एक हादसे के चलते संदीप को गोली लगती है  वह व्‍हीलचेयर पर आ जाते हैं लेकिन व्‍हीलचेयर पर आने के बाद भी संदीप अपना हौसला नहीं खोता  एक बार फिर राष्ट्र के लिए खेलने की उम्‍मीद अब भी उसके मन में हैं

यानी इस कहानी में प्‍यार के लिए एक खेल सीखने से लेकर उस खेल के जिंदगी बनने तक सबकुछ है इस कहानी में संदीप सिंह के बड़े भाई का बहुत ज्यादा अहम भूमिका है, जो अपने भाई की इस प्रतिभा को पहचानता है  उसकी हर संभव मदद करता है बड़े भाई का भूमिका अंगद बेदी ने निभाया है निर्देशक शाद अली की इस कहानी में बहुत ज्यादा कुछ है  उसे बहुत ज्यादा अच्‍छे से दिखाने की प्रयास भी की गई है कहानी की गति अच्छा है, हालांकि फर्स्‍ट हाफ में इसे थोड़ा तेज किया जा सकता था फिल्‍म मे दिलजीत दोसांझ दिल जीतते हैं उन्‍हें पर्दे पर देखकर मजा आता हैवहीं उनके कोच के भूमिका में एक्‍टर विजय राज ने अच्‍छा भूमिका निभाया है फिल्‍म के डायलॉग्‍स बहुत ज्यादा अच्‍छे हैं जो आपको पसंद आएंगे

फिल्‍म का संगीत अच्छा है  फिल्‍म की रिदम के साथ चलता है इस फिल्‍म की एक कमी है इसके मैच के सीन अक्‍सर ऐसी फिल्‍मों यह सीन सबसे ज्‍यादा एक्‍साइटमेंट पैदा करते हैं, लेकिन उस मामले में फिल्‍म थोड़ी निर्बल बन पड़ी है फिल्‍म के क्‍लाइमैक्‍स में भी वह रोमांच महसूस नहीं होता जो होना चाहिए

Loading...