Thursday , November 15 2018
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आखिर क्यों जनसंख्या नियंत्रण के लिए हमारे सिस्टम के पास कोई ठोस नीति नहीं?

बढ़ती जनसंख्या का दूसरा पहलू ये भी है कि इस समस्या ने हमारे सिस्टम की कमियों  लोगों की सोच को सबके सामने लाने का कार्य किया है  जनसंख्या रोकने के लिए हमारा सिस्टम कोई ठोस नीति बनाने के बजाए आज भी नारों  Slogans तक सीमित है  आपको भी कुछ Slogans याद होंगे जैसे 

हम दो, हमारे दो
छोटा परिवार सुखी परिवार 
जनसंख्या पर रोक लगाओ, विकास की धार बढ़ाओ 
हिन्दू हो या मुसलमान, एक परिवार एक संतान

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इतने प्रभावशाली नारों के बाद भी हिंदुस्तान की जनसंख्या 135 करोड़ हो चुकी है  इसका मतलब ये हुआ की राष्ट्र के लोगों ने इन बातों को गंभीरता से नहीं लिया  सिस्टम ने भी इस तरफ कोई विशेष ध्यान नहीं दिया  पिछले 70 सालों में हमारे राष्ट्र का सिस्टम ऐसी कोई योजना नहीं बना पाया है जिससे वो गांवों की आबादी को शहरों की तरफ आने से रोक सके  अपनी ज़रूरतों  सुविधाओं के चक्कर में गांवों की आबादी शहरों में पहुंच गई है  आज बढ़ती जनसंख्या के बोझ से, भागने वाले शहररेंगते हुए दिखाई देते हैं 

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शहरों में ज़रा सी बारिश आने पर ऐसा लगता है कि जैसे कोई बड़ी आपदा आ गई हो  इस बात का सबसे ताज़ा उदाहरण है राष्ट्र की औद्योगिक राजधानी   मुंबई  पिछले कुछ दिनों की बारिश से ये महानगर एक विशाल तालाब में बदल चुका है  एक स्थान से दूसरी स्थान जाने के लिए मुंबई के लोग सड़कों पर भरे हुए पानी से होकर गुजर रहे हैं  बारिश बंद होने के बाद भी मुंबई का सिस्टम सड़कों से पानी नहीं निकाल पाया है  शहर की ज़्यादातर सड़कें पानी में डूबी हुई हैं महानगरों में इस तरह की दिक्कतों की वजह है   लापरवाह सिस्टम  लगातार बढ़ती जनसंख्या मुंबई में इस समय करीब सवा दो करोड़ लोग रहते हैं  इतने लोगों का बोझ उठाना मुंबई के बस की बात नहीं है हिंदुस्तान के हर शहर में आबादी का Time Bomb टिक टिक कर रहा है हमारे सिस्टम को इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा

आबादी का ये टाइम Bomb धीरे धीरे, लोगों की सोच पर भी प्रभाव डालने लगता है  ये परिवर्तनइतनी धीमी गति से होता है कि किसी को पता नहीं चलता राष्ट्र में सामाजिक पतन के लिए भी जनसंख्या ज़िम्मेदार है जब आबादी का दबाव बढ़ता है तो राष्ट्र के लोग संवेदनहीन हो जाते हैं अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के प्रयत्न में, लोग दूसरों की परवाह नहीं करते वो अपनी जीवन में किसी तरह का तनाव नहीं लेना चाहते अगर उनके आसपास कोई आदमी मुसीबत में हो तो वो उसकी मदद करने के बजाए आगे बढ़ जाने में ही अपनी भलाई समझते हैं यानी जनसंख्या बढ़ने के साथ साथ राष्ट्र में संवेदनहीन लोगों की संख्या भी बढ़ रही है 

आज हमारे पास राजस्थान के बाड़मेर से एक वीडियो आया है इस वीडियो में एक सड़क हादसे बाद गंभीर रूप से घायल
युवक आस-पास के लोगों से मदद मांग रहा है  इस हादसे में इस युवक के दो साथियों की मौत हो चुकी हैं  उनके मृत शरीर सड़क पर पड़े हुए हैं लेकिन ये लोग इस युवक की मदद करने के बजाए तमाशा देख रहे हैं  वीडियो बना रहे हैं  संवेदनहीनता की हद ये है कि इस दौरान वीडियो बनाने वाला एक युवक Selfie लेने लगा  इस युवक को इस बात की परवाह नहीं थी कि घायल आदमी की मदद कैसे की जाए  वो इस हादसे के ज़रिए सोशल मीडिया पर मशहूर होने का रास्ता ढूंढ रहा थाघायल युवक सड़क पर उपचार के लिए तड़पता रहा लेकिन यहां खड़े लोगों ने इसे अस्पताल नहीं पहुंचाया  बाद में उपचार ना मिलने की वजह से इस युवक की मौत हो गई  इस वीडियो को देखने के बाद अब आप खुद ये तय कीजिए की आपके अंदर कितनी संवेदनशीलता बची है  ये एक्सीडेंट किसी भी इंसान के साथ हो सकता है लेकिन लोगों में मदद करने की भावना हो, तो इस नुकसान को घटायाजा सकता है आज का कड़वा हकीकत ये है कि आबादी के RDX में जब विस्फोट होता है तो भावनाओं की मौत हो जाती है  लोग सिर्फ अपने बारे में सोचना प्रारम्भ कर देते हैं

जनसंख्या विस्फोट से समस्याओं का भी विस्फोट होता है  इसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए ये ज़रूरी है कि हिंदुस्तान के ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं में शामिल करवाया जाए   ताकी लोग बीमारी  बेरोज़गारी की स्थिति में दूसरों पर निर्भर ना हों 

आम तौर पर लोगों की ये धारणा होती है कि लड़के का जन्म होने से ही वंश बढ़ता है  अक्सर देखा जाता है कि लड़के की उम्मीद में ही लोग लगातार बच्चे पैदा करते हैं 

महिलाओं की साक्षरता दर को बढ़ाने की प्रयास होनी चाहिए  क्योंकि आमतौर पर ये देखा गया है कि अनपढ़ महिलाएं जानकारी की कमी की वजह से परिवार नियोजन के महत्व को नहीं समझ पाती हैं  इस तरह अशिक्षा  गरीबी के कुचक्र में फंसकर परिवार  गरीब होते जाते हैं 

बालिकाओं को एजुकेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए  लड़कियों को अगर मुफ्त एजुकेशन दी जाए तो भी ये फायदे का सौदा है  क्योंकि पढ़ी-लिखी महिला पूरे परिवार का मार्गदर्शन करती है 

एक या दो बच्चों वाले परिवारों को Gifts या Incentive देकर प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए 

परिवार नियोजन के महत्व पर प्रोग्राम होने चाहिए  जनसंख्या नियंत्रण के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए 

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