Tuesday , September 25 2018
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बढ़ती आबादी के बावजूद विकास करने वाला एक देश है चाइना

वैसे तो बढ़ती हुई आबादी एक समस्या है, लेकिन चाइना ने इसे समस्या के साथ  एक संसाधन माना  लोगों को अपनी अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन बनाया इसीलिए चाइना आज संसार का सबसे बड़ा Manufacturing Hub है हिंदुस्तान चाहे तो चाइना से प्रेरणा ले सकता है लेकिन यहां एक बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि हिंदुस्तान में लोकतंत्र है, लेकिन चाइना में लोकतंत्र नहीं हैचाइना ने अपनी बढ़ती हुई आबादी को कार्य पर लगाया लेकिन हिंदुस्तान ने अपने लोगों को आज़ादी दी

भारत के लोगों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी को अपनी ढाल बना लिया  ये मान लिया कि उन्हें कार्यन करने की आज़ादी है, उन्हें मेहनत न करने की आज़ादी है हिंदुस्तान में चाहे लोगों के सामने कार्यकरने का  बड़ा से बड़ा मौका भी हो, तो भी वो कार्य नहीं करते  इसीलिए हिंदुस्तान आलस्य का Hub बन गया है यानी चाइना Manufacturing Hub है  हिंदुस्तान आलस्य का Hub है

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कुल मिलाकर हिंदुस्तान अपनी जनसंख्या को अपनी शक्तिशाली Workforce नहीं बना पायाआज हिंदुस्तान के पास इतनी बड़ी आबादी को अच्छा ज़िंदगी  रोज़गार देने की शक्ति नहीं है

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अगले 3 दशकों तक हिंदुस्तान की कार्य करने वाली जनसंख्या 30% की दर से बढ़ेगी जबकि इसी दौरान चाइना में कार्य करने वालों की संख्या 20% कम हो जाएगी

भारत युवाओं का राष्ट्र है यहां 20 वर्ष से कम आयु के युवाओं की संख्या 41% है इस युवा शक्ति के ज़रिए भारत Defense, मेडिकल  Technology के एरिया में संसार की ताकत बन सकता है
लेकिन इन युवाओं को हर वर्ष 1 से सवा करोड़ नयी नौकरियों की ज़रूरत होगी

परेशानी की बात ये भी है कि राष्ट्र में अनपढ़ युवाओं की संख्या करीब 27 करोड़ है  हमारे युवा पढ़ाई कर भी लें तो भी वो जॉब के काबिल नहीं बन पाते हैं Aspiring Minds नाम की एक संस्था के सर्वे के मुताबिक हिंदुस्तान में हर वर्ष करीब 6 लाख विद्यार्थी इंजीनियर बनते हैं लेकिन इनमें से 51% विद्यार्थियों को अपनी बेकार अंग्रेज़ी की वजह से जॉब नहीं मिलती

इंजीनियरिंग के 61% विद्यार्थियों के अंग्रेज़ी का व्याकरण का ज्ञान 7वीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे से भी कम होता है

सिर्फ 7% इंजीनियर ही फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोल पाते हैं

देश की 70 फीसदी आबादी आज भी गांव में रहती है, राष्ट्र की 60 फीसदी ज़मीन पर फसल पैदा की जाती हैं लेकिन इसके बावजूद हमारे राष्ट्र में 20 करोड़ से ज़्यादा लोग रोज़ाना भरपेट भोजन नहीं कर पाते

बढ़ती जनसंख्या की वजह से राष्ट्र में वाहनों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है लेकिन सड़कों के निर्माण की स्पीड उतनी तेज़ नहीं है हिंदुस्तान का रोड नेटवर्क संसार में दूसरे नंबर पर है  लेकिन ये भी हिंदुस्तान की आबादी के लिए कम पड़ रहा है हिंदुस्तान में प्रति एक हज़ार लोगों पर सिर्फ 3 किलोमीटर सड़क उपलब्ध है  जबकि अमेरिका में 1 हज़ार लोगों पर करीब 21 किलोमीटर सड़क उपलब्ध है 

देश में बढ़ती आबादी का बोझ राष्ट्र की  सड़कों पर साफ देखा जा सकता है, राष्ट्र के सभी महानगरों में बढ़ती भीड़भाड़  वाहनों की बड़ी संख्या की वजह से सड़कों पर जाम लगना एक आम बात हैवाहनों की बढ़ती संख्या की वजह से अक्सर बड़े बड़े शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक रेंगता रहता है

भारत के लोगों को शायद ये जानकर आश्चर्य होगा कि संसार में कुछ ऐसे राष्ट्र भी हैं जहां पर मां-बाप बनने वाले लोगों को Gifts  Incentives दिए जाते हैं  क्योंकि इन राष्ट्रों में लोग बच्चे पैदा नहीं करना चाहते वो बच्चों को अपनी जीवन पर एक बोझ समझते हैं  यही वजह है कि ये राष्ट्र लगातार बूढ़े होते जा रहे हैं 

Russia के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने साल 2006 में कम होती आबादी को Russia की सबसे बड़ी समस्या बताया था

वर्ष 2007 में, Russia की गवर्नमेंट ने 1 से ज़्यादा बच्चों को जन्म देने वाली स्त्रियों को करीब 7 लाख 56 हज़ार रुपए का incentive देने का प्रोग्राम प्रारम्भ किया था

वर्ष 2011 में Putin ने Russia की जन्म दर बढ़ाने के लिए 53 अरब डॉलर खर्च करने की घोषणा की थी 

Japan की राजधानी Tokyo के कुछ इलाकों में पहली बार बच्चे के जन्म पर मां-बाप को करीब 1 लाख 16 हज़ार रुपए दिए जाते हैं 

Turkey के राष्ट्रपति ने साल 2016 में  स्त्रियों से अपील की थी कि वो कम से कम 3 बच्चों को ज़रूर जन्म दें  साल 2015 में उन्होंने एक योजना बनाई जिसमें पहली बार मां बनने वाली स्त्रियों को सोने का सिक्का दिया गया था

सिंगापुर भी जनसंख्या बढ़ाने के लिए योजनाएं बनाता है  ज़्यादा बच्चे पैदा करने वाले लोगों को Tax में छूट दी जाती है साल 2012 में सिंगापुर में Youtube पर एक Video भी Viral हुआ जिसमें बच्चे पैदा करने को देशभक्ति से जोड़ा गया था 

लेकिन हिंदुस्तान में दशा दूसरे हैं  यहां जनसंख्या वृद्धि एक बहुत बड़ी समस्या है  गवर्नमेंटजनसंख्या कम करने के लिए नीतियां बनाती हैं  लेकिन ये नीतियां भी इसलिए लागू नहीं हो पाती हैं क्योंकि धर्म  मजहब के नाम पर जनसंख्या वृद्धि को जायज़ ठहराने की कोशिशें की जाती हैं

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