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नक्षत्रशाला में चांद की खूबसूरती देखने के होंगे खास बंदोवस्त

इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण 27 जुलाई को दिखाई देगा. ग्रहण के दौरान चंद्रमा करीब चार घंटे के लिए धरती की छाया में आ जाएगा. इस दौरान आम दिनों की अपेक्षा चंद्रमा थोड़ा छोटा   लाल नजर आएगा. सदी की अनोखी खगोलीय घटना को शहरवासी तारामंडल स्थित नक्षत्रशाला से देख सकेंगे. नक्षत्रशाला के वैज्ञानिक ऑफिसर महादेव पांडेय ने बताया कि दुलर्भ खगोलीय घटना को दिखाने के लिए नक्षत्रशाला में अत्याधुनिक दो टेलीस्कोप लगाए जाएंगे.  इनकी मदद से धरती से 40 हजार किलोमीटर दूर की किसी भी खगोलीय घटना को देख सकते हैं.

नक्षत्रशाला के खगोलविद्ध अमर पाल सिंह ने बताया कि आम दिनों में धरती से चंद्रमा की दूरी 3 लाख 60 हजार किलोमीटर दूर होती है. मगर 27- 28 जुलाई को लगने वाले चंद्रग्रहण के दौरान धरती से चंद्रमा की दूरी 4 लाख 5 हजार किलोमीटर हो जाएगी. इसके पहले वर्ष पहला चंद्र ग्रहण जो 31 जनवरी को लगा था उसकी अवधि 3 घंटा  24 मिनट की थी. सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण 27  28 जुलाई को राष्ट्र के सभी हिस्सों में दिखेगा.

चार घंटे धरती की छाया में रहेगा चंद्रमा
खगोलविद्ध अमर पाल सिंह ने बताया कि 104 वर्ष बाद आंशिक चंद्र ग्रहण 27 जुलाई को इंडियनसमयानुसार रात 11 बजकर 54 मिनट पर प्रारम्भ होगा  पूर्ण चंद्र ग्रहण 28 जुलाई को तड़के एक बजे प्रारम्भ होगा. उन्होंने बोला कि चंद्रमा 28 जुलाई को तड़के 1 बज कर 52 मिनट से 2 बज कर 43 मिनट तक सबसे ज्यादा अंधकार में रहेगा. इस अवधि के बाद 28 जुलाई को तड़के 3 बजकर 49 मिनट तक आंशिक चंद्र ग्रहण रहेगा. हमारे राष्ट्र में खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए यह स्वर्णिम मौका होगा क्योंकि ग्रहण को लगभग पूरी रात देखा जा सकता है.

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सुपर ब्लड मून का दिया है नाम
खगोलीय घटना में इस खास चंद्रग्रहण को ब्लड मून का नाम दिया गया है. ऐसा चंद्रमा के लाल दिखाई देने की वजह से है. पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा जब धरती की छाया में रहता है तो इसकी आभा रक्तिम हो जाती है जिसे ब्लड मून (लाल चांद) बोला जाता है. ऐसा उस समय होता है जब चांद पूरी तरह से धरती की छाया में ढक जाता है. ऐसे में भी सूरज की लाल किरणें बिखर कर चंद्रमा तक जाती हैं.  ब्लड मून को नंगी आखों से भी देखा जा सकता है.

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