Friday , November 16 2018
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पॉक्सो एक्ट में समाप्त होगा लड़का व लड़की के बीच भेद

पॉक्सो कानून में अब लड़के  लड़की का भेद समाप्त होगा. पॉक्सो कानून में इस परिवर्तन संबंधी विधेयक को संसद के मानसून सत्र में मंजूरी मिलने की आसार है. इस विधेयक में 12 वर्ष तक के बच्चों (लड़का) के साथ बलात्कार या कुकर्म में सज़ा-ए-मौत का भी प्रावधान है. छोटे बच्चों के प्रति हो रहे अपराधों के लिए प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुएल ऑफेंसेस (पॉक्सो) में इस परिवर्तन पर अध्यादेश पहले ही लाया जा चुका है. राष्ट्र में अब तक छोटे लड़कों के विरूद्ध भी यौन क्राइम के मामले बढ़ रहे हैं. लिहाजा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अध्यादेश के बाद अब मानसून सत्र में आने वाले बिल में परिवर्तन करके लिंग समानता का प्रस्ताव किया है.

20 वर्ष होगी न्यूनतम सजा
पॉक्सो एक्ट में संशोधन करके 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों से बलात्कार के मामले में 10 वर्ष की न्यूनतम सजा को बढ़ाकर 20 वर्ष कर दिया गया है. बलात्कार के मामले में सुनवाई तीन माह में अपील छह महीने में निस्तारित करने का भी प्रस्ताव है. इस प्रस्ताव में यह भी प्रावधान किया गया है कि 12 वर्ष से कम आयु के बालक एवं बालिका से बलात्कार या कुकर्म के दोषी को मौत के अलावान्यूनतम 20 वर्ष की कारागार या उम्रकैद की सजा भी दी जा सकेगी.  जुर्माना इतना लगाया जाए जिससे पीड़ित का इलाज  पुनर्वास में सहायता मिले.

नाबालिगों के विरूद्ध क्राइम में 500 प्रतिशत की वृद्धि
बाल अधिकारों के लिए कार्य करने वाले गैर सरकारी संगठन क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) के मुताबिक हिंदुस्तान में पिछले 10 वर्षों में नाबालिगों के विरूद्ध क्राइम में 500 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है. आंकड़ों के मुताबिक बच्चों के खिलाफ होने वाले 50 प्रतिशत क्राइम राष्ट्र के पांच राज्यों में दर्ज किए गए. इसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली  पश्चिम बंगाल प्रमुख हैं. एक अध्ययन के मुताबिक हिंदुस्तान में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन क्राइम का शिकार होता है. राष्ट्रमें हर घंटे 6 बच्चे गायब हो रहे हैं.

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