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46 साल बाद जेएनयू के छात्रों को बांटी जाएंगी डिग्रियां

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में 8 अगस्त को पीएचडी के छात्रों का दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। यह दीक्षांत समारोह जेएनयू के छात्रों के लिए बेहद खास है क्योंकि यह जेएनयू के इतिहास का दूसरा दीक्षांत समारोह होगा।
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गौरतलब है कि जेएनयू में 46 साल पहले 1972 में पहला और आखिरी दीक्षांत समारोह हुआ था। इस दीक्षांत समारोह में अभिनेता बलराज साहनी ने ऐसा भाषण दिया था जिसके बाद ये काफी विवादों में आ गया। वो दिन था और आज दिन वहां फिर दीक्षांत समारोह नहीं हुआ।
अब 8 अगस्त को होने वाले दीक्षांत समारोह का छात्रों को काफी बेसब्री से इंतजार है। आगे पढ़ें कि बलराज साहनी ने ऐसी क्या स्पीच दी थी जिसके बाद आज तक जेएनयू में दीक्षांत समारोह ही नहीं हुआ।

बलराज साहनी के भाषण की दस प्रमुख बातें

जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविघालय) में तकरीबन 46 साल पहले यानि साल 1972 में पहला और आखिरी दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ था। समारोह में अतिथि के तौर पर आये अभिनेता बलराज साहनी का भाषण सुनने वाले लोग आज भी उस भाषण को नहीं भूल पाये हैं। जानें उस भाषण की 10 खास बातें-

1. अभी हमारी हालत उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आजाद तो हो गया है पर ये नहीं जानता कि इस आजादी का करना क्या है। उस पक्षी के पास पंख तो हैं पर वह उस सीमा तक ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है।

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2. एक आजाद आदमी के अंदर कुछ सोचने, फैसले लेने और अपने फैसलों पर अमल करने की हिम्मत होती है, गुलाम आदमी ये दिलेरी खो चुका होता है। वह हमेशा दूसरों के विचारों को अपनाता है और घिसे पिटे रास्तों पर चलता है, मैंने जिंदगी से यही सबक सीखा है, अपनी जिंदगी में जब भी मैं कठिन निर्णय लेता हूं तो खुश होता हूं और आजाद महसूस करता हूं।

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3. आज हमारे देश को 25 वर्ष हो गए हैं पर क्या हम कह सकते हैं कि गुलामी और हीनता का भाव हमारे मन से दूर हो चुका है? क्या हम ये दावा कर सकते हैं कि सामाजिक, व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर हमारे विचार, फैसले और कार्य हमारे अपने हैं ना कि किसी की नकल? क्या हम अपने फैसलों पर अमल कर सकते हैं या हम यूं ही नकली स्वतंत्रता का दिखावा करते हैं।

पढ़े लिखे बद्धिमान व्यक्ति के लिए हिंदी फिल्में एक तमाशे से ज्यादा और कुछ नहीं

4. पढ़े लिखे बद्धिमान व्यक्ति के लिए हिंदी फिल्में एक तमाशे से ज्यादा और कुछ नहीं हैं। हमारी कहानियां उन्हें बचकानी, तर्कहीन और असलियत से दूर लगती हैं। हम तकनीक, नृत्य और कहानी में पश्चिमी फिल्मों की नकल करते हैं, कई बार तो पूरी फिल्म ही विदेशी फिल्मों की नकल होती है, कोई हैरानी नहीं कि आप इन फिल्मों पर हंसत होंगे पर आपमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो फिल्म स्टार बनने के सपने देखते होंगे।

5. मैं यह मानता हूं कि तमिलनाडु या बंगाल के लोगों में अपने पारंपरिक पहनावे को लेकर कोई हीन भावना नहीं है, वहां एक प्रोफसर से लेकर एक किसान तक किसी भी अवसर पर धोती पहनकर कहीं भी जा सकता है पर वहां भी उधार लिए गए विचार किसी न किसी शक्ल में सामने आते हैं, ये किसी ना किसी स्वरूप में हर जगह मौजूद हैं।

6. क्या कभी आप कॉलेज के किसी लड़के से सिर के बाल या दाढ़ी मूंछ मुंडवाने के लिए कह सकते हैं जबकि आजकल इसे बढ़ाने का फैशन है, पर अगर कल योग के प्रभाव में आकर यूरोप में विघार्थी ऐसा करने लगे तो मैं दावे से कह सकता हूं कि अगले ही दिन कनॉट प्लेस में आपको गंजे सिर दिखाई देंगे। योग को इसकी जन्मभूमि में प्रचलित होने के लिए यूरोप से ही सर्टीफिकेट लेना होगा।

7.  टूटी फूटी हिंदुस्तानी सारे देश के लोग बोल और समझ लेते हैं। वह इसमें अपनी सारी व्याकरण मिलाकर प्रयोग करते हैं। इस तरह की भाषा में लड़की भी “जाता है” और लड़का भी “जाता है” होता है। इस तरह के माहौल में एक ऐसी आजादी मिलती है कि कई बार बुद्धिजीवी भी ऐसी भाषा बोलते हुए दिखते हैं और यही भारत की परंपरा है।

8. किसी भी सभा या सोसाइटी में यदि कोई जलसा हो तो वहां मंत्री जरूर आना चाहिए, नहीं तो फिल्म अभिनेता दोनों में से एक अध्यक्ष होगा और एक मुख्य अतिथि या इसका उलटा होगा, लेकिन किसी बड़े नाम का वहां होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि ये एक  ब्रिटिश औपनिवेशिक परंपरा है।

9. ये हॉलिवुड के लइटमैन एक तरह के कवर के लिए बार्न डोर शब्द का प्रयोग करते हैं, बंबई फिल्म कर्मरारियों में इसे बंदर नाम दिया गया, वाह… कितना अच्छा बदलाव है। हिंदुस्तानी में कितनी संभावनाएं हैं कि वह अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली को आसानी से अपना लेती है।

10. भारत का शासक वर्ग आज यही कर रहा है, वह देश में ना इन्कलाब लाना  चाहता है ना बुनियादी तब्दीली। अंग्रेजी की व्यवस्था कायम रखने में ही उसका फायदा है पर वह खुलेआम अंग्रेजों को अंगीकार नहीं कर सकता, राष्ट्रीयता का कोई ना कोई आडंबर खड़ा करना उसके लिए आवश्यक है।

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