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उत्तराखंड क्रिकेट पर 23 तक आएगा ये बड़ा फैसला

कोर्ट में मौजूद लोगों की माने तो उत्तराखंड और बिहार क्रिकेट पर कोई बात नहीं हुई, लेकिन तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि जहां पर विवाद है, वहां लोकपाल की नियुक्ति की जा सकती है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तराखंड में लोकपाल की देखरेख में क्रिकेट होगा। हालांकि सारी बातें सुप्रीम कोर्ट से आदेश की कॉपी मिलने के बाद ही साफ हो पाएंगी। जानकारी के मुताबिक 23 जुलाई तक सुप्रीमकोर्ट क्रिकेट से जुड़े सभी विवादित मामलों का निपटारा कर देगी।
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दोपहर करीब 2:20 मिनट पर शुरू हुई सुनवाई सुप्रीमकोर्ट में करीब 3:45 मिनट तक चली। इधर प्रदेश के क्रिकेटरों के साथ खेल प्रेमियों को उम्मीद थी कि सीओए की ओर से सुप्रीमकोर्ट में रखी गई रिपोर्ट पर फैसला शाम तक आ जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड रणजी टीम के खेलने और नहीं खेलने का संशय दूर हो जाएगा। पर सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश को सुरक्षित रख लिया है। इस बारे में क्रिकेट प्रशासक समिति के अध्यक्ष विनोद राय से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

कांसेंसस कमेटी पर सस्पेंस! 
सीओए ने पिछले दिनों उत्तराखंड क्रिकेट को मान्यता देते हुए बीसीसीआई की डेवलपिंग कमेटी के चेयरमैन प्रो. रत्नाकर सेट्टी की अध्यक्षता में जो कांसेंसस कमेटी बनाने की बात कही थी, उस पर सस्पेंस है। दरअसल लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर कोर्ट का फैसला आया तो 70 साल से लेकर पॉलिटिकल लीडर बाहर हो जाएंगे। ऐसे में सीएयू को एक नाम दोबारा भेजना होगा क्योंकि, महिम के अलावा दूसरा नाम जो सीओए भेजा गया है वह वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हीरा सिंह बिष्ट का है।

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जानकारी के मुताबिक उनकी उम्र 70 साल से ज्यादा है। वहीं सरकार की ओर से भेजा गया एक नाम पूर्व सांसद बलराज पासी का है और वह सक्रिय राजनीति में हैं। जानकारी के मुताबिक 2019 में उन्होंने टिकट के लिए दावेदारी भी कर दी है। जबकि सीओए ने भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि दो स्टेडियम होने की वजह से सचिव स्तर का आदमी सरकार की ओर से इस कमेटी शामिल हो सकता है। सूत्रों की माने तो अभी तक प्रो. रत्नाकर सेट्टी को भी इस संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ।

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