Tuesday , November 13 2018
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रोहिंग्याओं को दिया जा रहा है काम

रोहिंग्याओं को हिंदुस्तान गवर्नमेंट शरणार्थी न मानते हुए राष्ट्र से बाहर भेजना चाहती है. वहीं, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन्हें कार्य पर रखा जा रहा है. रोहिंग्या शिमला में पहुंच गए, मगर पुलिस प्रशासन बेखबर है. मामला उजागर करने पर जांच की बात हो रही है, मगर सवाल यह है कि जिन रोहिंग्या को राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है, वे शिमला तक कैसे पहुंच गए.

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नगर निगम शिमला ने पांच वार्डो टुटू, मछयाठ, बालूगंज, कच्चीघाटी और टूटीकंडी में सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स किया है. इसके तहत एनके कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका दिया गया है. यह कंपनी जम्मू से रोहिंग्याओं को कूड़ा एकत्रीकरण के लिए शिमला लेकर आई है. इस कंपनी ने 40 कर्मचारी नियुक्त किए हैं. इनमें रोहिंग्याओं के अतिरिक्त प्रदेश के अन्य क्षेत्रों  यूपी और बिहार से लोगों को कूड़ा एकत्रित करने के लिए रखा गया है. ये लोग शिमला में घर-घर जाकर कूड़ा उठाएंगे.

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इससे पहले कि शिमला में सफाई काम प्रारम्भ हो, शहर में पहुंचे 12 रोहिंग्याओं ने रहने के लिए अस्थायी ठिकाना तलाश लिया है. अब ये लोग परिवार को लेने जम्मू गए हैं. शिमला में बहुत ज्यादासंख्या में बांग्लादेशी भी रह रहे हैं. ये लोग निर्माणाधीन भवनों में लकड़ी का कार्य करते हैं. टाइल्स के कार्य में भी ये माहिर हैं.

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यूएन का पहचान पत्र

शिमला के उपनगर टुटू में एक रोहिंग्या ने लोगों को संयुक्त देश (यूएन) का पहचान लेटर दिखाया.लोगों ने रोहिंग्या से बात करने का कोशिश किया तो उसे हिंदी समझ नहीं आ रही थी.

कौन हैं रोहिंग्या?

म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है. यहां अनुमान के मुताबिक 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं.इनके बारे में बोला जाता है कि वे मुख्य रूप से गैरकानूनी बांग्लादेशी प्रवासी हैं जिन्हें गवर्नमेंट ने नागरिकता देने से इन्कार कर दिया है. हालांकि ये म्यांमार में पीढ़ियों से रह रहे हैं. 16 हजार रोहिंग्या मुसलमान संयुक्त देश के शरणार्थियों के तौर पर पंजीकृत हैं.

शिमला के पुलिस अधीक्षक ओमापति जम्वाल का कहना है कि रोहिंग्या के आने की सूचना हमें दैनिक जागरण से मिली है. पहचान पंजीकरण के बिना कोई भी शहर में नहीं रह सकता है. रोहिंग्या के आने के मामले में जांच की जाएगी.

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