Wednesday , September 26 2018
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राशन न मिलने के कारण पत्तियां खाने को मजबूर बच्चे

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में वंचित परिवार के दो बच्चों को भूख मिटाने के लिए पेड़ों की पत्तियां खाना पड़ीं. घंसौर ब्लाक की ईश्र्वरपुर पंचायत के काछीबुधवारा गांव में रहने वाले मरावी परिवार के इन दो बच्चों के पत्तियां खाने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन लीपापोती में जुट गया. प्रशासन के इस दावे की ग्रामीणों ने पोल खोल दी कि घर में पर्याप्त राशन पहले से था.

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दैनिक जागरण के सहयोगी अखबार नईदुनिया ने गांव पहुंच कर पड़ताल की तो पता चला कि पीड़ित परिवार को राशन सहित अन्य योजनाओं का फायदा नहीं मिल रहा था. ग्रामीणों ने बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी कर्मचारी आए  घर में राशन रख दिया. परिवार के पास दो दिन पहले तक राशन के नाम पर एक दाना नहीं था. इससे पहले जिला प्रशासन ने दावा किया था कि परिवार को राशन का फायदा मिल रहा था.

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परिवार के मुखिया ने गत साल गरीबी के कारण आत्महत्या कर ली थी. तीन बेटों की नि:शक्त विधवा मां भी बीमारी के कारण कुछ दिन पहले विवाहित बेटी के घर चली गई. बड़ा बेटा मजदूरी करने शहर चला गया. पीछे छूट गए दो बच्चे. इनमें से एक मंद बुद्धि है. भूख के कारण दोनों को पत्तियां खाने को विवश होना पड़ा.

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मां की हालत खराब, सिर्फ दो ग्राम हीमोग्लोबिन बचा

पहाड़ी में अपनी बेटी के यहां उपचार कराने गई मां झरिया बाई को प्रशासन ने मंगलवार की शाम घंसौर सेहत केंद्र में भर्ती कराया. गंभीर स्थिति को देखकर जिला अस्पताल रेफर किया गया. झरिया बाई के बॉडी में मात्र दो ग्राम हीमोग्लोबिन बचा है, जिससे उसकी स्थिति गंभीर है.

इन सवालों का प्रशासन के पास नहीं कोई जवाब

1. राशन कार्ड कहां है : प्रशासन का कहना है कि परिवार को 12 जून को राशन उपलब्ध कराया गया था, लेकिन परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है. वहीं छोटे बेटे पुनीत (16) ने बताया कि उसके पास राशन कार्ड कार्ड नहीं है.

2. विधवा पेंशन क्यों नहीं मिली : झरिया बाई के पति रमेश मरावी की मौत एक वर्ष पहले हो गई थी, लेकिन अब तक विधवा पेंशन इसलिए नहीं मिल पाई है कि बैंक खाता खोलने के लिए उसके पास कोई दस्तावेज नहीं हैं. फिर किस दस्तावेज पर परिवार को राशन कार्ड उपलब्ध कराया गया. परिवार के तीन बेटे आधार कार्ड मनीष(26), पारधी  पुनीत के पास भी आधार कार्ड नहीं है.

3. मिड-डे मील क्यों नहीं मिला: छोटे बेटे पुनीत का नाम सरकारी स्कूल में लिखा बताया गया, लेकिन उसे स्कूल में मिड-डे मील क्यों नहीं मिला. प्रदेश गवर्नमेंट की उज्जवला योजना के तहत इस परिवार को अब तक गैस चूल्हा तक नहीं मिला है. घर में शौचालय  बिजली कनेक्शन तक नहीं है.

नहीं दिखाए दस्तावेज

झरिया बाई के परिवार को जून माह में बांटे गए राशन के दावे के विषय में दस्तावेज मांगे गए तो ग्राम पंचायत के सरपंच खेमसिंह मरावी ने बोला कि इस परिवार का राशन कार्ड सेल्समैन के पास जमा है.यहां के सेल्समैन ईश्र्वर शिवहरे ने बताया कि उसके पास फिल्हाल दस्तावेज नहीं है. जांच ऑफिसरप्रभारी सीईओ ने दस्तावेज लिए हैं. घंसौर जनपद पंचायत की प्रभारी सीईओ ऊषा किरण गुप्ता से दस्तावेज मांगे गए तो उन्होंने साफ बोला कि इसके लिए आरटीआई लगाओ इसके बाद ही जानकारी दी जाएगी.

अब जागे नींद से

सिवनी के कलेक्टर गोपाल चंद डाड का कहना है कि झरिया बाई को सभी योजनाओं का फायदामिलना चाहिए था. बैंक में खाता नहीं होने के कारण योजनाओं का फायदा नहीं मिल पाया. झरिया बाई के मानसिक रूप से निर्बल बेटे को योजनाओं का फायदा जरूर मिल जाना था. इसमें चूक हुई है.इस परिवार को गवर्नमेंट की विभिन्न् योजनाओं का फायदा जल्द से जल्द दिलाया जाएगा.

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