Sunday , September 23 2018
Loading...
Breaking News

स्वामी विवेकानंदः कुंडली में ही लिखा था संन्यासी बनना

स्वामी विवेकानंद मात्र 39 साल तक जिए. इनमें से लगभग आधा समय उन्होंने यात्राओं में बिताया. अपनी इन्हीं यात्राओं के दौरान विवेकानंद ने दुनिया को देखने का नजरिया, लोगों के सामने रखा. विवेकानंद की इन्हीं यात्राओं में से एक थी, अमेरिका की यात्रा. अमेरिका के शिकागो में हुई धर्म सभा में वेदांत और हिन्दुत्व के बारे में स्वामी विवेकानंद का दिया भाषण, आज भी भारत और यहां की संस्कृति को समझने के लिए पर्याप्त है. कई विद्वानों का मानना है कि स्वामी विवेकानंद की अमेरिका यात्रा के बाद ही वस्तुतः विश्व को भारत के बारे में जानकारी मिली. आज स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है. ‘विवेकानंद की आत्मकथा’ पुस्तक के अनुसार, पिता की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने अपनी कुंडली देखी थी. विवेकानंद कहते हैं- पिताजी ने वह कुंडली उनसे छिपाकर रखी थी. इसमें लिखा था कि वह परिव्राजक यानी संन्यासी का जीवन जिएंगे. आज विवेकानंद की पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनके कुछ विचार.

Image result for स्वामी विवेकानंद

धर्म सभा में कही गई बातें
– अमेरिका के बहनो और भाइयो, आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है. मैं आपको दुनिया की सबसे प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं. मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिन्दुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं.

Loading...

– मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है. हम सिर्फ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं.

loading...

– मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है. मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इस्त्राइलियों की पवित्र स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़-तोड़कर खंडहर बना दिया था और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली थी.

– मुझे इस बात का गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने महान पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और अभी भी उन्हें पाल-पोस रहा है. भाइयो, मैं आपको एक श्लोक की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहूंगा जिसे मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है और जो रोज करोड़ों लोगों द्वारा हर दिन दोहराया जाता है:
रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम् ।
नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव ।।
जिस तरह अलग-अलग स्त्रोतों से निकली विभिन्न नदियां अंत में समुद में जाकर मिलती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता है. वे देखने में भले ही सीधे या टेढ़े-मेढ़े लगें, पर सभी भगवान तक ही जाते हैं.

– वर्तमान सम्मेलन जोकि आज तक की सबसे पवित्र सभाओं में से है, गीता में बताए गए इस सिद्धांत का प्रमाण है: जो भी मुझ तक आता है, चाहे वह कैसा भी हो, मैं उस तक पहुंचता हूं. लोग चाहे कोई भी रास्ता चुनें, आखिर में मुझ तक ही पहुंचते हैं.

विवेकानंद की बातें
– जब तक तुम अपने आप में विश्वास नहीं करोगे, तब तक भगवान में विश्वास नहीं कर सकते.
– हम जो भी हैं हमारी सोच हमें बनाती हैं, इसलिए सावधानी से सोचें, शब्द द्वितीय हैं पर सोच रहती है और दूर तक यात्रा करती है.
– उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए.
– संसार एक बहुत बड़ी व्यायामशाला है जहां हम खुद को शक्तिशाली बनाने आते हैं.
– जिस वक्त मुझे महसूस हुआ कि भगवान शरीर रूपी मंदिर में रहते हैं, उस पल से मैं हर बंदिशों से मुक्त हो गया.

Loading...
loading...