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1 घर 11 मौत: फांसी लगाने से पहले खाया था ये खाना

बुराड़ी के घर से मिले 11 लोगों के मृत शरीर की गुत्थी सुलझने में फिल्हाल थोड़ा वक्त लग सकता है. इसकी वजह है बिसरा जांच. घर से सुराग मिलने के बाद अब फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने बिसरा जांच प्रारम्भ कर दी है. सीक्रेट सूत्रों के अनुसार मंगलवार को टीम ने बिसरा जांच प्रारम्भ कर दी है. आमतौर पर इसमें बहुत ज्यादा वक्त लगता है. चूंकि भाटिया परिवार का यह मामला बड़ा  गंभीर है. इसलिए फॉरेसिंक विशेषज्ञ भी जल्द से जल्द ठोस नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं. बताया जा रहा है कि घर से मिले सैंपल की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. फॉरेसिंक विशेषज्ञ अभी भी कुछ चीजों की जांच में जुटे हैं. इसमें फिंगरप्रिंट अहम किरदार निभा सकता है.
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गौरतलब है कि सोमवार को मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के फॉरेसिंक विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों ने 11 शवों का पोस्टमार्टम किया था. इसके बाद पुलिस ने 10 लोगों के फांसी लगाने की पुष्टि भी की, लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान कुछ लोगों के पेट में फ्लूड (तरलीय पदार्थ) पाया गया था. इसे जांच के लिए पुलिस ने रोहिणी स्थित एफएसएल लैब भेजा है. जहां बताया जा रहा है कि मंगलवार से फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने जांच करना प्रारम्भ कर दिया है. सूत्रों की मानें तो इस प्रक्रिया में फॉरेसिंक विशेषज्ञों को ज्यादा वक्त लग सकता है. अनुमान है कि 15 दिन के भीतर दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट मिल सकती है.

एक फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद यह साबित हो चुका है कि इनकी मौत फांसी की वजह से हुई है, लेकिन इस गुत्थी को सुलझाने के लिए इतना बहुत ज्यादा नहीं है. पेट में मिले फ्लूड की जांच में पता चलेगा कि इन्होंने फांसी लगाने से पहले क्या कुछ खाया था? क्या किसी ने इन्हें मादक पदार्थ या जहर तो नहीं दिया था? हालांकि इसमें एक तथ्य यह भी है कि फ्लूड में अगर मादक पदार्थ या जहर मिलता है तो सभी के बिसरा जांच गहनता से होगी. अगर सभी बिसरा में एक जैसा परिणाम देखने को मिलता है तो निश्चित ही केस में नया मोड़ देखने को मिल सकता है.

फिंगर प्रिंट से मिल सकता है बड़ा सुराग 

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एक वरिष्ठ फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि जिन कपड़ों पर भाटिया परिवार लटके मिले थे. फॉरेसिंक टीम के पास रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं. इन पर फिंगर पि्रंट की जांच की जा रही है.चुन्नी  साड़ी पर फिंगर प्रिंट टेस्ट के बाद यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इनके गले में फंदा डाला किसने? इतना ही नहीं टीम इस केस में ब्लू प्रिंट की मदद भी ले रही है. इसकी मदद से दीवारों  कमरों में किन किन लोगों के फिंगर  फूट पि्रंट हैं, उनका भी पता चलेगा. विशेषज्ञ का कहना है कि फिंगर या फूट प्रिंट 24 घंटों तक कपड़ों या दीवार अथवा किसी भी चीज पर देखा जा सकता है.
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